*वेत्यग्रुर्जनिवान् वा अति स्पृध: समर्यता मनसा सूर्य: कवि:। घ्रंसं रक्षन्तं परि विश्वतो गयमस्माकं शर्म वनवत् स्वावसु:।।* (ऋग्वेद,५/४४/७) अर्थ:- *प्रकाशवान् , धन और सुख
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*वेत्यग्रुर्जनिवान् वा अति स्पृध: समर्यता मनसा सूर्य: कवि:। घ्रंसं रक्षन्तं परि विश्वतो गयमस्माकं शर्म वनवत् स्वावसु:।।* (ऋग्वेद,५/४४/७) अर्थ:- *प्रकाशवान् , धन और सुख
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।। *ॐ* ।। 🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩 📜««« *आज का पंचांग* »»»📜 कलियुगाब्द……………………5125 विक्रम संवत्…………………..2080 शक संवत्……………………..1945 मास…………………………..कार्तिक पक्ष……………………………..कृष्ण तिथी……………………………पंचमी रात्रि 09.56 पर्यंत पश्चात षष्ठी रवि………………………..दक्षिणायन
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*┈┉सनातन धर्म की जय,हिंदू ही सनातनी है┉┈* *👉🏻लेख क्र.-सधस/२०८०/कार्तिक/कृ./२* *┈┉══════❀((“”””ॐ””””))❀═════ *🗓आज का पञ्चाङ्ग एवम् राशिफल 🗓* *🌻सोमवार, ३० अक्टूबर २०२३🌻* *सूर्योदय: 🌄 ०६:३२* *सूर्यास्त: 🌅
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*उत्तराखण्ड सरकार ने किया संस्कृत का अपमान”* संस्कृत महाविद्यालयों पर तुगलकी फरमान से क्षेत्रीय जनता में आक्रोश है सचिव संस्कृत शिक्षा के 16 अक्टूबर 2023
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*🚩🔱❄«ॐ»«ॐ»«ॐ»❄🔱🚩* 🌞🛕🛕 *जय रामजी की*🛕🛕🌞 🌺 *जय श्री राधेकृष्णा*🌺 🔔 *बम महाँकाल बाबा*🔔 🏹 *जय माँ
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