कुँवर रेवती रमण सिंह ने अखिलेश यादव को उनकी जगह बता दी है। किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा होगा।
‘व्हाइट हाउस’ में रहने वाले सामंतवादी अखिलेश यादव जब उनसे मिलने प्रयागराज पहुँचे तो रेवती रमण सिंह ने एक स्टूल मँगाया। उस स्टूल को अखिलेश यादव के सामने रखा गया। फिर कुँवर साहब ने उसीपर पाँव रखा।
औक़ात दिखाए जाने के पीछे भी कारण है। अब चुनाव है तो अखिलेश यादव उनके दरवाजे पर हाजिरी लगा रहे हैं। ये वही अखिलेश यादव हैं जिन्होंने 2024 में कुँवर साहब की जगह राम मंदिर के विरोध में केस लड़ने वाले कपिल सिब्बल को राज्यसभा भेजा था। इसके बाद सिंह परिवार ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी थी, जबकि कुँवर रेवती रमण सिंह सपा के सह-संस्थापक रहे हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव को पहली बार औक़ात तब दिखाई जब उन्होंने अपने बेटे को न केवल कांग्रेस का टिकट दिलवाया बल्कि इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से जिता भी दिया। 42 साल बाद इस सीट पर कांग्रेस जीती।
अखिलेश यादव को याद रखना चाहिए कि जब उनके अब्बा मौलाना मुलायम सिंह यादव की कोई औक़ात नहीं हुआ करती थी तब कुँवर साहब संयुक्त उत्तर प्रदेश में नेता-प्रतिपक्ष हुआ करते थे। ‘जनता दल’ के स्तम्भ थे। स्वयं 8 बार विधायक, 2 बार लोकसभा सांसद रहे। राज्यसभा सांसद बने। बेटे को भी विधायक, मंत्री और सांसद बनाया।
अखिलेश यादव को इस बे’इज़्ज़ती के बाद अब याद करना चाहिए कि कैसे 2 वर्ष पूर्व जब कुँवर रेवती रमण सिंह लखनऊ में अस्पताल में भर्ती थे तब यही अखिलेश यादव उनका हालचाल लेने तक नहीं गए थे। प्रयागराज गए तो उनसे मिले नहीं। अब चिड़िया चुग गई खेत तो…
