सिस्टम ने आईटीबीपी के जवान की मां का हाथ काटने वाले के विरूद्ध कार्यवाही नहीं की तो कमांडेंट ने अपने कमांडो के साथ कमिश्नर कार्यालय घेर कर की संविधान की रक्षा

भारत के इतिहास की सबसे उत्तम घटना।
डाक्टर ने #आईटीबीपी जवान की दमा के लिए चिकित्सालय में भर्ती मां का स्वस्थ #हाथ ही #काट दिया। पहले तो जवान अपनी माँ का कटा हुआ हाथ दुबारा जुड़वाने के लिए बर्फ के थर्मोकोल डिब्बे में रख कर चिकित्सालय दर चिकित्सालय भागा, लेकिन थक हार गया। फिर जवान ने जब अपराधी डाक्टर पर कानूनी कार्यवाही चाही तो उसको प्राथमिकी पंजीकृत कराने की जगह थाने दर थाने भटकाया गया, और जब संविधान और कानून को संबधित पुलिस ने बत्ती बना कर लोकतंत्र के पिछवाड़े घुसेड़ दिया, पर प्राथमिकी पंजीकृत नहीं की तब कमांडेंट को स्वयं अपने जवान के हित में कानून की रक्षा में आगे आना पड़ा। इस साहसिक व ऐतिहासिक उदहारण के लिए गौरव प्रसाद बधाई और साधुवाद के पात्र हैं। हमें तो अब डर ये है कि सरकार जवान की मां का हाथ पुन: जुड़वाने और डाक्टर का एनकाउंटर व घर बुलडोज करवाने की जगह उल्टे कमांडेंट साहब को ला एण्ड आर्डर व अनुशासन का संदर्भ देकर घेर ना ले।
जैसा कहा जाता है कि भारत का कानून मकड़ी के जाल जैसा है जिसमें छोटे जीव तो फंस जाते हैं लेकिन बड़े जीव इसे फाड़ कर निकल जाते हैं। भारत का कानून पुलिस की जेब में कैद रहता है जिस पर चाहे धारा चेंप दे और अपराधी बड़े लेबल का हो तो प्राथमिकी तक पंजीकृत करने से टाल दे। इसलिए कानून पुलिस की जेब में कैद ना रहे अपितु जनता के हित में खड़ा रहे। इसके लिए भारत के संविधान में एक पंक्ति का तत्काल संशोधन हो और भगवद्गीता के न्याय की श्रेष्ठ पंक्ति जोड़ी जाय ‘तत्क्षण शठेशाट्ठयंम् समाचरेत्’ अर्थात् अपराधी के साथ उसी समय जैसे को तैसा व्यवहार कारित हो और जो जिस भाषा में समझे उसे उसी भाषा में प्रत्युत्तर दिया जाय। हत्या डकैती बलात्कार और एक करोड़ से उपर के गबन व भ्रष्टाचार आदि में वांछित अपराधी पर जेल या बेल में जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद करने व पुलिस सुरक्षा की जगह तत्काल शठेशाट्ठयंम् समाचरेत् करना ही वास्तविक न्याय होगा। क्योंकि भारत का संविधान और कानून अब तक इस प्रक्रिया में पूरी तरह से असफल रहे हैं। इस कारण गंभीर अपराधीयों का बोझ देश के टैक्स पेयर पर आ गया और अपराधियों की समय व सुरक्षा पर भी खर्च बढा है। अस्तु कानून की समीक्षा का यही समय है।

घटना क्रम इस प्रकार है कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में आईटीबीपी (ITBP) जवान की मां के हाथ के काटे जाने और न्याय के लिए दर-दर भटकने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
पीड़ित आईटीबीपी के 32वीं बटालियन में तैनात जवान विकास सिंह। उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी।आरोप: कानपुर के कृष्णा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (टाटमिल चौराहा) में सांस की तकलीफ के लिए भर्ती कराया गया था। जवान का आरोप है कि गलत इंजेक्शन लगाए जाने से हाथ में गहरा संक्रमण (इंफेक्शन) फैल गया। संक्रमण इतना बढ़ गया कि दूसरे अस्पताल में उनकी मां का हाथ काटना पड़ा। प्रदर्शन: न्याय न मिलने और पुलिस द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज न करने पर, जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ बर्फ के डिब्बे में रखकर पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंचा। इसके बाद आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद और 40-50 हथियारबंद जवानों ने पुलिस कमिश्नरेट पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की।वर्तमान स्थिति: पुलिस और स्वास्थ्य विभाग (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) की टीम मामले की जांच कर रही है।न्याय व्यवस्था, कानून के दुरुपयोग और संविधान में त्वरित न्याय के लिए कानून व्यवस्था में बदलाव की आपकी चिंताएं और भावनाएं पूरी तरह स्पष्ट हैं। भारत के संविधान और कानून का उद्देश्य आम जनमानस के अधिकारों की रक्षा करना है और यह सर्वोपरि है।अस्पताल में चिकित्सा लापरवाही और पुलिस व्यवस्था पर विस्तृत कवरेज, जांच के अपडेट व मीडिया रिपोर्ट आप प्रमुख समाचार माध्यमों The Hindu और Moneycontrol पर पढ़ सकते हैं। जय श्री राम।। (साभार – शोशल मीडिया वायरल फेसबुक)