राशि फल और पंचाग

आज का पंचाग आपका राशि फल, उदयकाल की रमा एकादशी व्रत, परिवार व्यवस्था छिन्न भिन्न होने के कारण पश्चिमी जगत का तेजी से इस्लामीकरण हो रहा और पाश्चात्य अंधानुकरण के चलते भारतीय परिवार व्यवस्था भी प्रभावित हो रही

🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉 🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻गुरुवार, ०९ नवम्बर २०२३🌻 सूर्योदय: 🌄 ०६:४६ सूर्यास्त: 🌅 ०५:३५ चन्द्रोदय: 🌝 २७:३३ चन्द्रास्त: 🌜१५:१४ अयन 🌖 दक्षिणायणे

Read more

आज का पंचाग आपका राशि फल, अपने बच्चों को ये छोटी छोटी बातें बताते रहें एक दिन उनके पास अपनी श्रेष्ठ संस्कृति का अतुलित भंडार होगा, कार्तिक मास का महात्म्य, वटसैप वायरल से तीन पोस्ट

🕉श्री हरिहरौ विजयतेतराम🕉   🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻बुधवार, ०८ नवम्बर २०२३🌻 सूर्योदय: 🌄 ०६:४५ सूर्यास्त: 🌅 ०५:३६ चन्द्रोदय: 🌝 २६:३९ चन्द्रास्त: 🌜१४:४८ अयन 🌖 दक्षिणायणे

Read more

आज का पंचाग आपका राशि फल, इस्त्राइल ने हमास आतंकवादियों का गाजा में बजा दिया बाजा, टाप १२ आतंकी कमांडर भी जहन्नुम भेजे गए, इस्त्राइल के समर्थन में आयी अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी, हॉलीवुड फिल्म में वंडर वुमन की भूमिका निभाने वाली विख्यात इजरायली अभिनेत्री गैल गैडोट सेना में सेवा के लिए पहुंची

*🙏🏻श्री हनुमते नमो नमः🙏🏻* *पुण्य लाभ के लिए इस पंचांग को औरों को भी अवश्य भेजिए🙏🏻🙏🏻* *🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 🌤️ *दिनांक –

Read more

आज का पंचाग आपका राशि फल, जन्मेजय ने महर्षि वेदव्यास से पूछा कि श्रीकृष्ण तो सर्व समर्थ थे तब उन्होंने महाभारत जैसा भीषण युद्ध रोका क्यों नहीं तब वेदव्यास ने खोला ये रहस्य

धर्म-का-मार्ग-सनातन-है।। सनातन-का-मार्ग-सत्य-है।। सत्य-का-मार्ग-शिवम-है।। शिवम-का-मार्ग-सुंदर-है।। सुंदर-का-मार्ग-स्वर्ग-है।। स्वर्ग-का-मार्ग-केदारनाथ-है।। केदारनाथ-का-मार्ग-देवभूमि-है।। देवभूमि-का-मार्ग-उत्तराखंड-है।। उत्तराखंड का मार्ग भगवान बद्रीविशाल है यही आलौकिक भूवैकुंठ और स्वर्ग का द्वार है *🌞~ आज का

Read more

आज का पंचाग आपका राशि फल, मक्केश्वर महादेव और काशी विश्वनाथ का फव्वारा, पराली पंजाब में जलाई जाती है और दिल्ली में ही इस pollution के कारण होने वाली बीमारियों से हर वर्ष 50,000 लोग मरते हैं!, पाकिस्तान मियांवाली एयरबेस के अंदर अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा ८ विमान नष्ट ३० सैनिकों की मौत

*वेत्यग्रुर्जनिवान् वा अति स्पृध: समर्यता मनसा सूर्य: कवि:। घ्रंसं रक्षन्तं परि विश्वतो गयमस्माकं शर्म वनवत् स्वावसु:।।* (ऋग्वेद,५/४४/७) अर्थ:-        *प्रकाशवान् , धन और सुख

Read more