सृष्टि कंडारी की आत्महत्या एवं सौरभ खत्री परिवार को पुलिस अभिरक्षा में लिए जाने के कानूनी व सामाजिक पक्ष पर अति महत्वपूर्ण विश्लेषण

धामी सरकार के आदेश पर देहरादून में हुई सरकारी टीचर #सृष्टि_कंडारी की संदिग्ध मौत प्रकरण की जांच अब CBCID द्वारा होगी, विवाह के आठ माह बाद ही सृष्टि का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला था।
घटना क्रम में देखने से पता चलता है मूल रूप से अगस्तमुनी रूद्रप्रयाग जनपद के निवासी #सौरभ_खत्री चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर में बहुत होनहार छात्र था, वह बीटैक है और उसने पहले उतर प्रदेश में व और फिर उतराखडं में समीक्षा अधिकारी का कमीशन निकाला। आजकल वह उत्तराखंड सरकार में निजी सचिव पद पर कार्यरत है। आठ माह पूर्व ही बड़े हर्ष उल्लास के साथ उसका विवाह हुआ था, सौरभ खत्री धीर गंभीर समझदार मृदुभाषी अकेला लड़का है उसकी विवाहित बहन भी डाक्टर है और स्वास्थ्य विभाग में है। उनकी माता प्रवीना खत्री बहुत समझदार और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति भी इन्टर कालेज गोपेश्वर और बाद में देहरादून इन्टर कालेज में शिक्षिका रहीं। उनके पिता मनोहर खत्री एक बहुत सज्जन व्यक्ति थे वे अलकापुरी (चमोली) रतूड़ा आदि अनेक इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य रहे जिनकी ब्रेन हेमरेज अन्य गंभीर बीमारी के कारण एक सप्ताह पहले ही मृत्यु हुई थी, तब सौरभ अपने पिता के क्रिया-कर्म में था कि चौथे दिन ही २९ जुलाय २०२६ को उनकी शिक्षिका पत्नी #सृष्टि ने भी आत्महत्या कर ली, जो बहुत दुखद समाचार है, इसी को दुखों का पहाड़ टूटना कहा जाता है।
मूलतः श्रीनगर गढ़वाल की शिक्षिका सृष्टि के भी पिता नहीं थे, वे अच्छी पढीलिखी और संवेदनशील बतायी गयी हैं, शोशल मीडिया देख रहा था कि सृष्टि बुलेट मोटर साइकिल से जाब पर जाती हैं। अब उनकी मृत्यु के उपरांत पूरा परिवार दुखी व अचंभित है। उनकी माता ने मानसिक उत्पीड़न व दहेज हत्या का आरोप लगाया है।https://www.facebook.com/share/v/17SqpTowyw/   (सृष्टि की माता जी का वक्तव्य) 

सृष्टि प्रकरण पुलिस विवेचना के अधीन है, प्रकरण की संवेदनशीलता व मुख्य आरोपी के उत्तराखंड सचिवालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत होने को देखते हुए पहले जांच पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) वंदना वर्मा को सौंपी गई है। नामांकित आरोपियों को अभिरक्षा में लेने के बाद पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार आगे की कानूनी कार्यवाही की जाएगी। देवप्रयाग के विधायक विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री से मिल कर इस घटना की जांच सीबीसीआईडी को देने की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच व दोषियों को सजा दिलाने की मांग की थी जिस पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए गहनता से छानबीन व कार्यवाही के निर्देश दिए। इसी कारण अब सौरभ खत्री व उनकी बहन को पुलिस ने अभिरक्षा में लेकर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित कर दी है।

दोनों गढ़वाली परिवार हैं समझदार भी हैं। सौरभ खत्री ‘राजा’ का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न और निर्व्यसनी व संस्कारित परिवार है। अस्तु विचारों की भिन्नता तक तो बात ठीक हो सकती है, लेकिन दहेज उत्पीड़न के विषय में मृतका सृष्टि के द्वारा वायरल वीडियो में कोई उल्लेख नहीं है, इस एक्ट का उपयोग अनेक बार केस को मजबूत बनाने व प्रतिशोध के लिए भी आमतौर पर होता हुआ देखा जाता है, जो इस घटना में भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू है।
जो भी हो सहनशक्ति के अभाव में घटी आत्महत्या की यह अप्रिय घटना बहुत दुखद है, मृतका के वायरल वीडियो में देखा जा सकता है उसमें एक होनहार बुलट शिक्षिका को ‘मनहूस’ कहने से वह इतनी #ट्रोमेटाईज व आहत हुई कि आत्महत्या कर करने को विवश होगयी, जो अब कभी लौट कर नहीं आयेगी। सृष्टि की सास प्रवीना खत्री का कहना है कि ‘हमारे लिए बहू बेटी से बढ़कर थी, लेकिन जाब के कारण वह ससुराल कम ही रह पाई, सृष्टि बहुत अच्छी थी, हम उसे देखने के लिए विकल रहते, राजा को भी वह बहुत पसंद थी उसी के कहने पर राजा ने उसके लिए विवाह से पहले ही महेन्द्रा बुलेरो खरीदी थी लेकिन 02 जनवरी 2026 को पिता का ब्रेन हेमरेज होने के कारण मैक्स देहरादून में उनकी ब्रेन सर्जरी हुई, तब से मेदांता और देहरादून के गैलेक्सी व कैलाश आदि बड़े चिकित्सालयों में छ सात माह उपचार के कारण परिवार पर आर्थिक भार बढ गया’, अब गाड़ी बेचने की स्थिति आ गयी तो सृष्टि ने कहा’ यह गाड़ी मुझे पसंद है इसे मत बेचो भले इसकी किस्त मैं अपने वेतन से दूंगी’, सृष्टि उस गाड़ी को शौक से चलाती भी थी। यहां तक कि जब त्रियुगी नारायण में सृष्टि और सौरभ का विवाह संस्कार संपन्न हुआ तो दुल्हन उस गाड़ी को वहां से अगस्तमुनी तक चला कर भी लायी, वो जब भी देहरादून ससुराल आती गाड़ी वही चलाती थी। अब पति पत्नि के परस्पर सहमति के इसी किस्त वाले विषय को अनेक जगह दहेज प्रकरण के रूप में उछाला जा रहा है।
यह सबके लिए ध्यान देने की बात है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ “जिस घर या समाज में महिलाओं का आदर और सत्कार होता है, वहाँ सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है”।
और हाँ सृष्टि जैसी नयी पीढ़ी की बालिकाओं को समझना चाहिए कि किसी भी स्थिति में #आत्महत्या इस लोक व परलोक के लिए भी एक अच्छा विकल्प नहीं कहा जा सकता, जीवित व्यक्ति का साथ बहुत से समझदार लोग दे सकते हैं लेकिन मरने वाले के साथ कौन मरता है? अस्तु आत्म हत्या न साहसिक कार्य है न अंतिम विकल्प, अपितु आत्महत्या करके आप जीवित परिजनों को असह्य दुख देकर जाते हैं, आपका तो अंत हो जाता है लेकिन संबंधित परिवारों को आजीवन दुख, पीड़ा, कष्ट व भारी परेशानी होती है। जो शिक्षिका #मनहूस कहे जाने भर से #टूट जाये उसके विद्यार्थी #साहसी बनेंगे? इसीलिए #साहसिक कार्य यही है कि समस्या से #पूरी_शक्ति के साथ सभी विकल्पों व संकल्पों के लिए संघर्ष करो, रात के बाद सुबह अवश्य होती है यही प्रकृति का नियम है।
नयी अंग्रेजी माध्यम पीढ़ी को मान मर्यादा बड़ों का सम्मान और छोटों को प्यार देने का तनिक भान भी नहीं है, वो जीरो टॉलरेंस है। फिर भी हम कहेंगे कि जब भी #पति या #पत्नी पर गुस्सा आये तो तत्काल गुस्सा #उड़ेलने की जगह थोड़ा #ठहरना और मन में सोचना “ये वही तो है जिसके लिए मैने विवाह से पहले बड़े बड़े सपने देखे थे”, उन सपनों के प्यार को कभी मरने मत दो सदैव जीवित रखो तब आपका प्यार न बूढ़ा होगा न मरेगा, बस धैर्य से काम लें संस्कार और सभ्यता यही कार्य करती है, जिसे हम भूल रहे हैं।
  घटना का एक अन्य सामाजिक व व्यवहारिक पहलू यह भी है सौरभ की पत्नी स्वर्गीय सृष्टि और पिता स्वर्गीय मनोहर खत्री दोनों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण क्रिया कर्म पीपल पानी, तेरहवीं, श्राध्द आदि की समस्या है, क्योंकि गिरफ्तारी के बाद अब उस परिवार में इस महत्वपूर्ण धार्मिक रिचुअल्स के लिए कोई बचा ही नहीं। उधर लडकी के परिवार वालों पर दुखों का पहाड़ तो टूटा ही अब कानूनी लडाई की चुनौती भी आ गयी। यहां लडकी के सरकारी देयक और उसकी जगह कानूनी मृतक आश्रित कौन होगा ये पेंच भी है।
नयी पीढ़ी को भी #आत्म_हत्या जैसी किसी अप्रिय व #अवांछित घटना से पहले अपनी परेशानी अपने परिजनों व मित्रों से अवश्य शेयर करनी चाहिए। सृष्टि की सास का कहना है कि ‘सृष्टि बहुत अच्छी थी, माना कि वह किसी एन्जायटी या डिप्रेशन में थी फिर भी उसे ऐसे शोकपूर्ण समय में आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाना चाहिए था, हमें अपनी परेशानी बताती, अपनी मम्मी को बताती मायके ही चले जाती कम से कम बची तो रहती’। आधुनिकता की दौड़ में विवाह के बाद माईके पक्ष की भी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण भूमिका यही है कि वे बेटी को अनावश्यक गाईड भले ना करें लेकिन उसकी खोज खबर लेते रहें बेटी दुखी दिखती रहती है या उसे सुसराल में कोई आर्थिक सामाजिक मानसिक परेशानी दिखती है तो तुरंत उसका समाधान करें या वापस बुला कर सहयोग करें और दोनों पक्ष मिल कर स्थिति की समीक्षा अवश्य करें। परस्पर वार्ता से बड़ी बड़ी समस्याओं का सरलता से समाधान निकला जा सकता है, क्या पता जिसे हम बड़ी समस्या माने बैठे हैं उसका सहजता से समाधान तत्काल निकल जाय।
शोशल मीडिया पर #सृष्टि_खत्री के आत्म हत्या से पहले के वीडियो से भी समझा जा सकता है कि किसी की बातों से बहुत ट्रामेटाईज होने की जगह धैर्य से काम लें तो #आत्महत्या की स्थिति नहीं आती, दोनों परिवारों पर दुखों के संताप का पहाड़ नहीं टूटता, क्योंकि दोनों पहाड़ के ही सुशिक्षित और संस्कारवान परिवार हैं। अपने पैरों पर खड़ी शिक्षिका #सृष्टि के पास भी अपने प्रियजनों को समस्या बता कर #परस्पर #सामंजस्य बिठाने, परिस्थिति अनुकूल होने तक पृथक रहने, या बहुत ही विपरीत परिस्थितियों में विवाह विच्छेद जैसे अनेक विकल्प थे, फिर भी आत्महत्या ही विकल्प क्यों चुना!, समझदार लोग तो हत्या से भी बचने का प्रयास करते हैं क्योंकि मनुष्य जीवन दुर्लभतम है फिर कभी मिलेगा भी या नहीं कौन जानता है?! https://www.facebook.com/share/r/1FuViBpQhw
कानूनी पक्ष क्या है वो अब न्यायालय के विचाराधीन है, अब केस की जांच सीबीसीआईडी को करनी है लेकिन
शोशल मीडिया पर बिना सोचे समझे #सौरभ_खत्री व उसके परिवार को #खलनायक बना कर रख छोड़ा है। कुछ मीडिया महारथी मुंह में माईक डाल कर प्रश्न भी पूछ रहे थे, अरे साठ वर्ष सरकारी शिक्षक व प्रधानाचार्य नौकरी करने वाले पिता और साठ वर्ष सरकारी नौकरी करने वाली माता का संस्कारवान बेटा और उत्तराखंड शासन में निजी सचिव है सौरभ, एक पैंसे की बेइमानी नहीं है उसमें। खलनायक बना दोगे क्या? हाथ में मोबाइल है ही #फांसी लटका दो उसे। कानून को अपना कार्य करने दोगे कि नहीं? किसके घर में छोटी मोटी बातें नहीं होती, तो सब #आत्महत्या करते हैं क्या? यही #अंतिम_विकल्प रह गया? नयी पीढ़ी के सैंतालीस बच्चों ने #नीट परीक्षा पेपर लीक होने पर #आत्महत्या कर ली, सबको जस्टीफाई करने के लिए सरकार को घेरो ये विपक्ष का #सलैक्टिव काम हो सकता है, कानून और समाज का नहीं। समाज दिल्ली के असभ्य उदंडी #काकरोचों को भी देख रहा है और प्रधानमंत्री की तत्परता को भी और #झारखंड के #छात्र_आन्दोलन को भी देख रहा और वहां सरकार की #ढीठता भी। ठीक है युवा #नीट में नहीं निकल सके तो दूसरी राह के लिए #कंम्पीटीट करो #कम्प्लीट बनो न कि #आत्महत्या करने जैसा निर्णय लेने का अपराध करो।
व्यक्ति को धैर्यवान प्रज्ञावान व संयमित हो कर समाधान देखना चाहिए, समस्या नहीं बनना चाहिए #अधीरता व #आत्महत्या जैसे कृत्य की अनुमति न शास्त्रों में है और न संविधान में। क्योंकि इससे यह अमूल्य जीवन तो सदा के लिए नष्ट हो ही जाता है लेकिन #आपरेटिंग_सिस्टम अर्थात #आत्मा को भी तबतक #नया_नीवन नहीं मिल पाता जब तक कि आपकी #महामृत्यु का समय पूरा नहीं हो जाता ऐसा शास्त्रों में उल्लेख है। न जाने किस व्यक्ति की क्या मानसिक स्थिति है क्या पारिवारिक परिस्थिति है ये समझे बिना भीड़ के फैसले से न्यायलय और सरकार चलाने की मानसिकता समाज को किस दिशा में ले जायेगी।
नयी पीढ़ी को #शाटकट, #लो_टैम्परामैंट और #जोश में #होश खोने से बचना चाहिए। आपका जीवन आपके परिजनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, आप उनकी आश व धरोहर भी हो, क्यों कि उन्होंने सारा जीवन आपके लिए व्यय किया है, अस्तु नयी पीढ़ी पहले तो अपने व्यवहार व उपलब्धियों से परिजनों को खुशी दे नहीं तो दुखों का कारण तो ना बने। सार यही है कि दुख के बाद सुख अवश्य आता है, घनी रात के बाद सूर्योदय निश्चित है सुख और दुख दोनों ही #जीवन का चक्र है, धैर्य की परीक्षा भारी दुख में ही होती है। पत्नी की परीक्षा पति की गरीबी में और पति की परीक्षा पत्नी की बीमारी में होती जबकि भाई बंधुओं की परीक्षा विपदा और भारी कर्ज के समय होती है। आज कौन गढ़वाली परिवार चाहेगा कि उसकी नयी बहू आत्म हत्या करे! रसोई में भी जब वर्तन आपस में घिसते हैं, तभी स्वादिष्ट भोजन तैयार होता। परिवार में होने वाली छोटी मोटी बातों से ही परिवार सीखता है आगे बढता है, इसलिए धैर्य आपकी मुख्य संपदा है, उसे बनाये रखें ✍️ हरीश मैखुरी