महाभारत में ‘नागदेवी’ के रूप में मुख्य रूप से नागलोक की राजकुमारियों और देवियों का संदर्भ मिलता है, जिनमें सबसे प्रमुख नाम नागकन्या उलूपी और नागों की देवी मनसा देवी का आता है। महाभारत की कथाओं में नागवंश का बहुत बड़ा महत्व ।
नाग की कई जातियां हैं। संसार का ऐसा कोई भूखंड नहीं जिसकी जानकारी नागों को नहीं हो। यह भूमि नागप्रिया है। वह नागाधारिका है। उसका नाम नागरखंड है। नग या पर्वत नागों से। नाग निवास से ही हमारे गृहों को कल्पित किया गया, नाग ही वास्तुपुरुष और नाग से ही काल। नाग की चाल से ही काल क्रम और दिशाओं का निर्धारण होता है। नाग के विषय में हम कितना जानते हैं? जो जानते हैं, वे ग्रंथ नागों की देन, वे अक्षर नागाक्षर; व्याकरण का नाम तक्षकारण। लेखन पंक्ति नाग पंक्ति और उसमें मात्राएं, यति, गति, छंद, बंध, सभी नाग से। न्याय अन्याय नाग से, अपराध नियंत्रण के दंड भी नागयष्टि। समस्त सीमा और मर्यादा के चिह्न नागस्थान, नगस्थान और नागरिक निवास।
मुनिश्रेष्ठ आगे बोले :
हमारे नगर भी नागों से और नागरक तथा नागरिक भी। नारी इसलिए नारी कि वह नाग से वैर नहीं करती, पूजा करती हैं। उत्पादन का गुण ग्रहण करती हैं। और नागमणि ? रत्न और धातु का ज्ञान, पहचान और सुरक्षा नागों ने सिखाई। मुद्राओं का नाम नाणा होने, कोश का नाम नागस्थान और कोथलिका के नकुल सा होने की कहानियां ऋषियों ने कही है। नाग एक पूर्ण संख्या है नौ। नाग से ही सब निधियां हैं। नागों ने ही अपनी केंचुली उतारकर मनुष्य को वस्त्र धारण करना सिखाया।
युधिष्ठिर के पूछने पर मुनिवर कहने लगे :
मनुष्य ने निवास के लिए जब भी विचार किया, तो सबसे पहले नागों से निवेदन किया कि वे अन्यत्र चले जाएं। जब खेती करने का विचार आया तो नागों से दूर जाने की प्रार्थना की लेकिन यह भी कहा कि वे खेत की सुरक्षा के लिए सदैव अपनी दृष्टि बनाए रखें। क्षेत्रपाल होकर श्रम को सार्थक करें। जब कूप या वापी खनन की इच्छा होती, नाग जलदर्शक होते। यह नागविद्या बहुत दुर्लभ है।
हे पृथापुत्र !
भूमि और नाग का संबंध बहुत पुराना है। नाग से पृथ्वी रक्षित है तो शासित भी। देवता भी नाग का अनादर नहीं करते। नाग के आग्रह पर ही ईश्वर अवतार लेते हैं। नाग से गीत, संगीत, नृत्य, नाटक जैसी लीलाओं में रस है। पृथ्वी के ऊपर और नीचे सब स्थान पर नागों की सत्ता है। नाग उसमें सर्वत्र विहार कर भूमि को स्पर्शसुख देने के व्याज से उत्पादकता बनाए रखते हैं और रज को अर्थवान करते हैं।
हे राजन्!
ऐसे नाग का सबसे बड़ा शत्रु है मनुष्य। बाज और नेवले तो फिर भी उसको जीने देते हैं। कभी अपनी ओर से हमला नहीं करते और उसको विहारकर भूमि को उत्पादिका बनाए रखते हैं। सर्प स्वयं बहुत भयभीत प्राणी है। कान नहीं होने से आशंकित रहता है। मनुष्य तो उसे देखते ही मार डालता है। हाय! वह स्वयं कितना अभागा है।
नागों ने नगर बसाये थे : तक्षशिला, नागपुर, चमोली उत्तराखंड में नागनाथ पोखरी गांव, और गौचर के निकट नाग गांव व नागों का डांडा पर्वत हैं, चमोली जनपद में ही नागों के कुंड हैं एक कुंड में पारद छुवाने से सोना बनने का और एक नाग कुंड के जल पीने से पार गामिता की स्थिति मिलने का भी उल्लेख आया है। भारत में नागौर, अहिच्छत्रपुर। यही नहीं पूरा नागलोक है। नाग रसायन के जानकार थे। अमृत साधक। नागों की अन्य जातियों से अंतर्भुक्ति हुई, तब नागदेव तत्व का सूत्र व्यापक हुआ। शिव के साथ नाग, विष्णु के साथ नाग[शैया] बलराम शेषनाग के अवतार हैं। गूगापीर प्रसिद्ध हैं। उलूपी नागकन्या अर्जुन को व्याही थी। पार्श्वनाथ के प्रसंग ज्ञेय है। यह नाग-गाथा लंबी है। नाग, पुराण कथाओं में दूर-दूर तक फैला हुआ है। नाग संगीत की मान्यता और नागों द्वारा शास्त्रीय संगीत का अवदान मार्कण्डेय पुराण में साक्षीभूत है।
नागों को लेकर लोक में अनेक कहानियां कही जाती है। ग्रीक में देवी और नाग द्वारा सृष्टि रचना का मिथक प्रचलित है। हमारे यहां नाग कहां नहीं?
भाभी ने ननद से कहा कि > चलो मिट्टी खोद कर ले आवें ! ननद ने कहा कि आज हम उपासी हैं , आज नहीं । भौजाई बोली >> मैं मिट्टी खोद दूंगी , तुम भर लेना । ननद की समझ में आ गई , खदान पर पंहुचीं । भौजाई फावडा चलाने लगी , खोदते समय सांपिनी के अंडा-बच्चा फावडा लगने से मर गये। घर में मिट्टी आ गई। धीरे-धीरे बात पुरानी हो गई। उसे भूल गये। आगे चल कर भौजाई के गर्भ हो, बालक का जन्म भी हो किन्तु बालक कुछ दिन बाद ही मर जाय। छह बालक मरे ।
एक डोकरी-मैया आई। उसने कहा कि >> तूने स्याओ देवी मां का अपराध किया है । अब, यह स्याओ माता कौन है ? नाग देवी ! किस प्रकार यह कहानी हमें पुरातत्व के सूत्रों की भांति किसी प्राचीन – युग में ले जाती है ! यह संस्कृति शास्त्रियों के अध्ययन की बात है! (व्रतखण्ड)
नाग कितना व्यापक है, पुराण कथाओं में दूर-दूर तक फैला हुआ है। गरुड कथा हो, शिव हों, विष्णु हों, पार्श्वनाथ हों, नाग के विस्तार को देखिये। गरुड क्यों विष्णु का वाहन है? उड़ने वाले नाग कैसे बारिश करते हैं। दिवाली का दीया देख नाग किस पाताल जाते हैं? भारत में अनेक-स्थानों पर नागतीर्थ हैं। मत्स्य, नरसिंह, कूर्म की तरह नाग पुराण था? महाभारत नाग शास्त्र के सूत्र आस्तिक मुनि के साथ लिए है। सुश्रुत और चरक विष व्याधियों के क्रम में नाग को नहीं भूलते। जिन दिनों मैं सर्पशास्त्र पर काम कर रहा था, तब अनेक पन्ने नागमणि की तरह आलोकित होते रहे। नीलमत पुराण ऐसी कहानियां आत्मसात् किए हैं। अनेक उत्सव नागों की देन हैं!
