देव पूजन में विधि और विधान का महत्वपूर्ण स्थान है बिना विधि विधान के पूजन से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता यही शास्त्र सम्मत है यही
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देव पूजन में विधि और विधान का महत्वपूर्ण स्थान है बिना विधि विधान के पूजन से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता यही शास्त्र सम्मत है यही
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लेखक :- आशीष पाठक *जब लंकाधीश रावण पुरोहित बना …”* (अद्भुत प्रसंग, भावविभोर करने वाला प्रसंग) बाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामायण में इस कथा का
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*?? – : रुद्राष्टकम : – ??* *नमामीशमीशान निर्वाणरूपं* *विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम* *निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं* *चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम* हे भगवन ईशान को मेरा प्रणाम
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सृष्टि के अस्तित्व में सभी कुछ जोड़ों में मौजूद है – स्त्री-पुरुष, दिन-रात, तर्क-भावना आदि। इस दोहरेपन को द्वैत भी कहा जाता है। हमारे अंदर
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सुनील पंत उत्तराखंड के चमोली जनपद के देवाल ब्लाक में स्थित रूपकुंड झील को रहस्यमय झील के रूप में जाना जाता है। दर्पण का आकार
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