समग्र संसार की शांति के लिए आतंक के आका ईरान को वापस पर्शिया बनाया जाना आवश्यक है

मिडल ईस्ट की जंग अब एक ऐसे खौ*फनाक दौर में पहुंच गई है, जहां सीमाओं की दीवारें टूट चुकी हैं। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने बीती रात ईरान की राजधानी तेहरान के कलेजे में उतरकर एक ऐसा भीषण हमला किया है, जिसने पूरी दुनिया को हि*लाकर रख दिया है।

आधी रात को जब तेहरान सो रहा था, तब इजरायली लड़ाकू विमानों ने ईरान के उस सबसे गुप्त अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स पर बमों की बारिश कर दी, जिसे ईरान अपना ‘अजेय किला’ मानता था। यह हम*ला इतना सटीक और घातक था कि इसने ईरान के सबसे बड़े सैन्य संगठन, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मिसाइल प्रोग्राम की कमर तोड़ दी है।

यूनिवर्सिटी के नीचे छिपा था ‘मौ*त का कारखाना’

इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जगह को निशाना बनाया गया, वह ऊपर से देखने में एक साधारण यूनिवर्सिटी लगती थी। जी हां, यह अंडरग्राउंड सैन्य कॉम्प्लेक्स तेहरान की मशहूर ‘इमाम हुसैन सेंट्रल मिलिट्री यूनिवर्सिटी’ के ठीक नीचे बनाया गया था। दुनिया को दिखाने के लिए यह एक सैन्य शैक्षणिक संस्थान था, लेकिन जमीन के कई फीट नीचे ईरान के वैज्ञानिक और सैनिक घातक बैलिस्टिक मिसाइलों के रिसर्च और डेवलपमेंट में जुटे थे। इजरायल ने अपनी खुफिया जानकारी के दम पर इस दोहरे चेहरे का पर्दाफाश कर दिया और सीधे उस जगह को निशाना बनाया जहां से नई मिसाइल प्रणालियों पर काम किया जा रहा था।

बैलिस्टिक मिसाइलों की सुरंग हुई जमींदोज

इजरायली सेना ने दावा किया है कि इस अंडरग्राउंड परिसर के भीतर एक बेहद लंबी और गुप्त सुरंग थी। इस सुरंग का इस्तेमाल आईआरजीसी के सैनिक बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन और उनके परीक्षण (Testing) के लिए करते थे। यह सुरंग ईरान के मिसाइल प्रोग्राम की लाइफलाइन मानी जा रही थी। आईडीएफ के सटीक हमलों ने इस सुरंग को बुरी तरह त*बाह कर दिया है। जानकारों का मानना है कि इस हमले से ईरान का मिसाइल प्रोग्राम कई साल पीछे चला गया है। यह ऑपरेशन इतना गुप्त था कि हमले के बाद ही ईरान के सुरक्षा बलों को समझ आया कि उनके सबसे सुरक्षित ठिकाने में सेंध लग चुकी है।

आपातकालीन सैन्य केंद्र पर सर्जिकल स्ट्राइक

इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, यह कॉम्प्लेक्स केवल रिसर्च सेंटर नहीं था, बल्कि संकट की स्थिति में इसे ईरान के ‘आपातकालीन सैन्य केंद्र’ के रूप में इस्तेमाल किया जाना था। यहां आईआरजीसी की रणनीतिक योजनाओं पर काम होता था और भविष्य के युद्धों की ब्लूप्रिंट तैयार की जाती थी। इजरायल ने इस केंद्र को तबाह करके यह संदेश दे दिया है कि ईरान का कोई भी कोना, चाहे वह जमीन के कितना भी नीचे क्यों न हो, इजरायली मिसाइलों की पहुंच से दूर नहीं है। इस हम*ले के बाद पूरे तेहरान में सुरक्षा और सतर्कता को चरम पर पहुंचा दिया गया है।

आईडीएफ ने इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की है, जिसने ईरान के सैन्य अहंकार को बड़ी चोट पहुंचाई है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान इस जबरदस्त चोट का बदला लेगा या फिर यह जंग किसी और बड़े विना*श की ओर बढ़ेगी। इसलिए समग्र संसार की शांति के लिए आतंक के आका ईरान के समग्र आतंकवादीयों को समाप्त करके वापस पर्शिया बनाया जाना आवश्यक है

समाचारों में देख रहे हैं कि ईरान ने अपनी घातक मिसाइल अलग-अलग क्षेत्रों में अंडरग्राउंड छुपा कर रखी है।

जो कि सेना और कुछ विशेष लोगों के अतिरिक्त किसी को कुछ पता नहीं है।

इसी गोपनीयता के चलते वह अमेरिका इजरायल को चकमा दे रहा है।

यह बात भी सत्य है कि ईरान का सहयोग पीठ पीछे चीन और रूस कर रहा है।

फिर भी 

देश की रक्षा शक्ति केवल हथियारों से नहीं, बल्कि रणनीतिक गोपनीयता और खुफिया व्यवस्था से भी तय होती है। 

कई देश अपनी सैन्य क्षमताओं को छिपाकर रखते हैं ताकि संभावित दुश्मन उनकी वास्तविक शक्ति का सही आकलन न कर सके।

उदाहरण के लिए Iran ने अपनी रक्षा नीति में भूमिगत मिसाइल ठिकानों और गुप्त सैन्य संरचनाओं को महत्वपूर्ण स्थान दिया है। 

इन गतिविधियों का संचालन मुख्यतः Islamic Revolutionary Guard Corps के माध्यम से होता है, और उनकी जानकारी सीमित अधिकारियों तक ही रहती है। इससे बाहरी शक्तियों के लिए उसकी वास्तविक सैन्य तैयारी को समझना कठिन हो जाता है।

दूसरी ओर India एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ रक्षा से जुड़ी कुछ जानकारी सार्वजनिक चर्चा में भी आती है।

लेकिन हमारे यहां के अधिकतर हिंदू इतने भोले भूषण होते है कि वे अपने यहां की सुई से लेकर पहाड़ तक कि जानकारी सार्वजनिक कर देते।

वे यह नहीं समझ पाते की नागों को मारना होता है या उन्हें दूध पिलाना है 

जिसमे बहुतेरी हिदुवानी बाईयों का बस चले तो आंचल खोल कर नागों को दूध पिलाएं और सब बंटाधार कर दें !

बड़ी भोली जनता है…! तो दूसरी ओर भारत में रह खाकर पड़ोसी दुश्मन देशों की गाने वाले एक एक की जानकारी लीक करते देते रहते हैं। परन्तु… 

संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा के लिए Official Secrets Act 1923 जैसे कड़े कानून मौजूद हैं और रक्षा अनुसंधान मुख्यतः Defence Research and Development Organisation के माध्यम से गोपनीय रूप से संचालित होता है।

अंततः किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा का आधार सैन्य शक्ति के साथ-साथ सूचनाओं की सुरक्षा और रणनीतिक अनुशासन होता है।

उदहारण के लिए 

मध्य भारत में कल सैन्य प्रशिक्षण हुआ जेट विमान दिखाई दिए यह खबर पड़ोसी देश में तुरंत पहुंच रही