Will Iran, which has brought the entire world to the brink of economic recession, abandon its path of nuclear terrorism simply because of missile attacks? Or should the US respond in the same language?
क्योंकि अमेरिका भी युद्ध हार या जीत पर समाप्त नहीं करता
वो लाभ हानि व हितों को देख कर युद्ध का निर्णय तय करता है..
और पीछे छोड़ जाता है ऐसी स्थिति जहाँ से उबरने में कई पीढ़ीयाँ एडियां रगड़ती हैं
• जापान की तबाही खुद में इतिहास है
• वियतनाम आज तक अमेरिकन बम से जूझ रहा है…. इतना बारूद है अमेरिका का बरसाया कि सायद और 200 साल धमाके होते रहें
• अफगान आवाम कभी भी बंदूक के साये से बाहर निकलेगी कहना कठिन है
• ईराक वो उजड़ा देश है जहाँ जिंदगी सिसक रही है..
और अमेरिकन इस सब की परवाह किये बगैर अपनी कीमत वसूल आगे बढ़ गये…
ईरान के पास अवसर था…
अपनी परमाणु सनक को छोड़ आगे निकले
पर IRGC को इस्लामिक निरंकुशता की लत लगी हुईं थी…. और किसी का कुछ न उखाड़ सकते बस उन्हें निर्दोष लोगों को रोंद डालने की सनक चढ़ी है ..
परिणाम …. ईरान फिर जल उठा…
तहरान का हर कौना आज धुएं की चादर से ढका हुआ है
200 टॉमहॉक मिसाइल सिर्फ तहरान पर कल से अब तक गिरी हैं
हवाई हमले अलग….
तेहरान में मौत बरस रही है…
अगर दो दिन यही स्थिति रही …. तेहरान गाज़ा बन जायेगा…
अमेरिका को कोई अंतर न पड़ता ईरानी रहें या बर्बाद हो जाएँ…
वो तेल और व्यापार मार्ग के नियंत्रण व अन्य देशों से व्यापारिक वसूली कर खर्च से 100 गुना वसूल लेगा…
ईरान बाकी दुनियाँ से कहीं पीछे… घसिट कर… अपाहिज़ हो जियेगा. साभार फेसबुक @highlight Satya Sanatan

