लेंसकार्ट के CEO की पत्नी ने बंद किया अपना X अकाउंट, पुराने ट्वीट्स वायरल होने के बाद उठाया कदम: PM मोदी ही नहीं, हिन्दू संगठनों के खिलाफ भी जमकर उगली थी आग
लेंसकार्ट सीईओ पीयूष बंसल की पत्नी निधि मित्तल बंसल के पुराने ट्वीट्स वायरल होने के बाद उनका एक्स अकाउंट डिएक्टिवेट हो गया। जिसमें उन्होंने पीएम मोदी बीजेपी और हिंदू संगठनों पर तीखे हमले किए थे। इस बीच, कंपनी के स्टाइल गाइड में हिन्दू प्रतीकों जैसे बिन्दी, तिलक और कलावा पर भेदभाव का विवाद भी तेज हो गया है, जिससे सोशल मीडिया पर भारी बवाल मचा हुआ है ।
लेंसकार्ट के सीईओ पीयूष बंसल की पत्नी निधि मित्तल बंसल ने आम आदमी पार्टी का सपोर्ट किया था और बीजेपी पीएम मोदी तथा हिन्दू संगठनों के खिलाफ तेज टिप्पणियाँ पोस्ट की थीं । हैशटैग जैसे वोट फॉर मफलरमैन और दिल्ली डिसाइड्स भी इस्तेमाल किए गए थे ।
अब वायरल हो चुके स्क्रीनशॉट्स जो 2013 से 2015 के बीच के हैं । उनमें निधि मित्तल बंसल आम आदमी पार्टी यानी एएपी का सपोर्ट दिखा रही हैं, जबकि बीजेपी और हिन्दू संगठनों के खिलाफ तेज टिप्पणियाँ पोस्ट कर रही हैं। कुछ पोस्ट्स में हैशटैग जैसे #vote4mufflerman और #DelhiDecides थे । जबकि दूसरों में हिन्दू महासभा की आलोचना की गई और बीजेपी के बारे में अपमानजनक बातें कही गईं । जैसे-जैसे ये पोस्ट्स सोशल मीडिया पर फैल गए, उनके अकाउंट @nidhimittal13 अनुपलब्ध हो गया, जो बताता है कि बढ़ती आलोचना के बीच इसे हटा दिया गया है ।
इस घटना के साथ लेंसकार्ट कंपनी पर भी विवाद गहरा गया है। कंपनी का 23 पेज का इंटरनल स्टाफ यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग गाइड फरवरी 2026 का डॉक्यूमेंट ऑनलाइन आया, जिसमें कर्मचारियों को बिन्दी, कलावा और धार्मिक कलाई बैंड पहनने से मना किया गया था । वहीं हिजाब और टर्बन को काले रंग की शर्त के साथ अनुमति दी गई थी । सिन्दूर को भी कम लगाने की सलाह थी । इस असमानता ने हिन्दू प्रतीकों पर भेदभाव का आरोप लगाया और सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया ।
पीयूष बंसल ने 15 अप्रैल को पहला बयान दिया। उन्होंने कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट गलत है और ये लेंसकार्ट की मौजूदा नीति नहीं दिखाता । लेकिन एक्स पर कम्युनिटी नोट ने इसे चुनौती दी, क्योंकि डॉक्यूमेंट पर फरवरी 2026 की डेट और ऑफिशियल ब्रांडिंग थी ।
फिर पीयूष बंसल ने अपना बयान बदला । उन्होंने माना कि डॉक्यूमेंट असली है, लेकिन इसे पुराना इंटरनल ट्रेनिंग पेपर बताया । उन्होंने कहा कि बिन्दी और तिलक वाली लाइन कभी नहीं लिखी जानी चाहिए थी और 17 फरवरी को इसे हटा दिया गया था । उन्होंने कहा मैं फाउंडर और सीईओ के रूप में इस चूक की पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ । लेंसकार्ट किसी भी सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति को कभी प्रतिबंधित नहीं करता और आगे भी नहीं करेगा ।
स्पष्टीकरण के बावजूद सवाल बाकी
माफी के बावजूद कई असंगतियाँ चिन्ता बढ़ा रही हैं । अगर डॉक्यूमेंट को सच में 17 फरवरी 2026 को हटा दिया गया था तो सवाल ये है कि फरवरी 2026 वाली वर्जन कर्मचारियों के बीच अभी भी क्यों घूम रही थी ? कंपनी ने कोई अपडेटेड या सुधारा हुआ पॉलिसी भी पब्लिक नहीं किया है, जिससे पारदर्शिता की कमी रह गई है, जबकि कंज्यूमर ट्रस्ट पर दबाव है।
इसके अलावा कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अब कहा है कि मार्च के इंटरनल ऑडिट्स से पता चला कि कंपनी तिलक और बिन्दी लगाने के खिलाफ भेदभाव जारी रखे हुए थी, जिससे और गुस्सा भड़क गया है । (साभार ऑप इंडिया)
