आज जानते हैं भारत का #संविधान कितना भारतीय है। संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार बी0एन0राव (सर बेनगल नरसिंह राव) ने अक्टूबर 1947 में विभिन्न समितियों की रिपोर्टों एवं 60 देशों के संविधानों का अध्ययन करके भारतीय संविधान का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार किया, मुख्य रूप से 10 देशों के प्रावधानों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप #उद्धरित किया गया है, संविधान में अनेक प्रावधान ब्रिटिश कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC 1860) और सोसायटी पंजीकरण अधिनियम,1860 जैसे कानूनों से और बड़ा प्रशासनिक हिस्सा ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारत सरकार अधिनियम 1935 (Government of India Act 1935) से लिया गया है।
मुख्य देश जिनकी विधियों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप उद्धरित किया गया है
1-ब्रिटेन (इंग्लैंड): संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता और कानून निर्माण की प्रक्रिया।
2-संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): मौलिक अधिकार, प्रस्तावना का विचार और न्यायपालिका की स्वतंत्रता।
3-आयरलैंड: राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) और राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति।
4-कनाडा: एक सुदृढ़ केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था और राज्यपाल की नियुक्ति।
5-ऑस्ट्रेलिया: समवर्ती सूची (Concurrent List) और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।
6-सोवियत संघ (रूस – तत्कालीन USSR): मौलिक कर्तव्य और प्रस्तावना में न्याय का आदर्श।
7-जर्मनी (वाइमर संविधान): आपातकाल के समय मौलिक अधिकारों का स्थगन।
8-दक्षिण अफ्रीका: संविधान संशोधन की प्रक्रिया।
9-फ्रांस: गणतंत्रात्मक व्यवस्था और स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुता का आदर्श।
10 – जापान: विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Procedure Established by Law) से लिया गया है।
अस्तु देखा जाय तो 1950 में बना संविधान #मनुस्मृति की भांति मौलिक भारतीय न हो कर 10 से अधिक देशों की प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था से उद्धरित संग्रह है।
लेकिन जहां उक्त देशों में अपराधीयों, बलात्कारियों, देशद्रोहियों, घुसपैठियों व आतंकवादीयों के तत्काल मृत्युदंड व भारी अर्थदंड की व्यवस्था है। मनुस्मृति में भी तत्काल शठेशाट्ठयंम् समाचरेत् कर की व्यवस्था है, वहीं अंबेडकर की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यों की ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा अंतिम रूप से तैयार भारत के संविधान में उक्त अपराधीयों को दोष सिद्ध होने तक मुचलका, जमानत या दशकों तक जेल में पुलिस सुरक्षा में भोजन, चुनाव लड़ने की सुविधा भी है। इसी कारण अपराधीयों को परिश्रय मिलता है, वे बिना भय के बड़े बड़े अपराध कारित करते हैं।
भारत के संविधान में केवल प्रस्तावना भारतीय थी लेकिन 1976 में आपातकाल के समय जब विपक्ष था ही नहीं, तब #कांग्रेस की प्रधानमंत्री #इंदिरा_गांधी ने 42वें संशोधन के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना में तीन असंवैधानिक शब्द—’समाजवादी’ (Socialist), ‘धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) और ‘अखंडता’ (Integrity)—जोड़े थे।
समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष तो भारत की #मौलिक_संस्कृति नष्ट करने और #धर्मान्तरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जोड़ा गया, जबकि #अखंडता के पीछे #छिपा हुआ #ऐजेंडा है कि भारत का नक्शा #जैसाहै #वैसाही रहे, यानी पीओके या आकसाईचिन तिब्बत मानसरोवर वापस कभी भारत में ना मिलाया जा सके। इन भारत विरोधी तीन असंवैधानिक शब्दों को प्रस्तावना में जोड़ेने से एक जीवंत राष्ट्र पुरुष के रूप में देश की निरंतर #अपूर्णीय_क्षति हो रही है।
(106वां) संविधान संशोधन वर्ष 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पारित हुआ था, जिससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया, यानी 1950 से वोटों के जुगाड़ के लिए संसद में बैठे वोट भिखारियों ने अब तक 106 जातिवादी आरक्षण, एससीएसटी एक्ट, नमाजवादी बक्फबोर्ड, आदि जिहादी विचारों के टल्लों से रफू कर के संविधान को पूरी तरह विद्रुप कर दिया।
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ठीक से देखें तो भारतीय धर्म संस्कृति विरोधी और विदेशी विधानों की नकल करके उद्धरित भारत का संविधान एक तरह का जातीय विभेदकारी और नमाजवादी #विसंविधान है, जो भारतीय संस्कृति को तेजी से नष्ट करने के लिए ही डिजाइन है। उदाहरण के लिए जो भारतीय हिन्दू संस्कृति को कैंसर बोले वो मुख्यमंत्री पद पर विराजमान है। https://www.facebook.com/share/v/182xWwG9yB/
भारतीय धर्म संस्कृति विरोधी और विदेशी विधानों की नकल करके उद्धरित भारत का संविधान एक तरह का जातीय विभेदकारी और नमाजवादी #विसंविधान है, जो भारत की लाखों वर्षों की अद्वितीय सभ्यता व संस्कृति को तेजी से नष्ट करने के लिए ही डिजाइन है, ब्राह्मणों को तिरोहित करना गुरूकुल विनष्ट कर व सवर्णों को वंचित, प्रताड़ित और प्रतिबंधित करके संवैधानिक अछूत बना देता है, और उन्ही से भारी टैक्स लूटता है।
ठीक वैसे ही संविधान का कानून भी तत्काल शठेशाट्ठयंम् समाचरेत् की जगह मकड़ी के जाले तरह डिजाइन है, जिसमें छोटा गरीब तत्काल फंस जाता है लेकिन बड़े पैंसे वाले टिड्डे इसे फाड़ कर निकल जाते हैं।
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उदाहरण के लिए गांधीनगर में एक ही फर्म से 9300 किलो नकली घी पकड़ गया आपको क्या लगता है कि अपराधी को फांसी होगी? यदि भारत का यह संविधान और न्याय व्यवस्था बदली नहीं जायेगी तो ऐसे खुंखार मिलावटखोर अपराधीयों को कई वर्षों तक जेल में पुलिस सुरक्षा में बिरियानी छकने मिलती रहेगी, और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया जायेगा!!
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ठीक वैसे ही संविधान के कानून भी मकड़ी के जाले तरह हैं, जिसमें छोटा गरीब तत्काल फंस जाता है लेकिन बड़े पैंसे वाले और प्रभावशाली टिड्डे इसे फाड़ कर निकल जाते हैं। क्या संविधान देश व देश वासियों की सुरक्षा के लिए है या देश ही संविधान पर न्यौछावर किया जायेगा इस पर अब तेजी से चिंतन-मनन की आवश्यकता है ? भारत के संविधान की प्रासंगिकता इस बात पर निर्भर करेगी है कि वह कितना भारतीय है ? कितना सम्यक, सामयिक व प्रभावकारी है।✍️ हरीश मैखुरी
