हमारा रुद्रनाथ-गोपीनाथ,गोपेश्वर मंदिर सन 1935 में भी इतना समृद्ध था कि इससे अंग्रेजों के अधिकारी भी चंदे की मांग करते थे

हमारा रुद्रनाथ-गोपीनाथ,गोपेश्वर मंदिर सन 1935 में भी कितना समृद्ध था 🙏 इसका जीता जगता उदाहरण तत्कालीन ब्रिटिश सरकार का ये पुरातन पत्र है 🙏
जब तत्कालीन भारत के क्वेटा ( जो आज पाकिस्तान में है) में विनाशकारी भूकंप आया था और उस आपदा में अंग्रेज सरकार के तत्कालीन वायसराय द्वारा भी मदद हेतु रुद्रनाथ गोपेश्वर गद्दी के रावल साहब को पत्र लिखा गया था 🙏
और मंदिर द्वारा वहां भी मदद की गयी थी 🙏
पत्र का अनुवाद :-

चमोली
26-6-35
प्रिय रावल साहिब, गोपेश्वर,
आपको संभवतः क्वेटा तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में आए भयंकर भूकम्प से हुई विनाशकारी आपदा के बारे में जानकारी होगी। 50,000 से अधिक लोग या तो मारे गए हैं अथवा घायल हुए हैं और उस क्षेत्र के लगभग सभी लोगों को बेघर होना पड़ा है।
माननीय वायसराय महोदय ने इन पीड़ित लोगों की सहायता के लिए धन एकत्र करने की अपील की है और हमारे गवर्नर महोदय ने भी उस अपील का बहुत दृढ़ता से समर्थन किया है।
हर व्यक्ति आपके उस सहयोग की सराहना करता है, जो आपने सम्राट/सम्राज्ञी की सिल्वर जुबिली (रजत जयंती) के अवसर पर तथा बिहार राहत कोष के संबंध में दिया था।
वर्तमान अवसर भी यह मांग करता है कि हम सभी यथासंभव भूकम्प से पीड़ित लोगों की सहायता करें। यह विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात है कि इस आपदा में लगभग 20,000 गढ़वाली लोग प्रभावित/पीड़ित हुए हैं।
डिप्टी कमिश्नर महोदय परसों यहाँ आए थे और उनके साथ हुई बातचीत से यह सुझाव मिला कि आपसे पुनः संपर्क किया जाना चाहिए, ताकि आप हमारी उसी प्रकार उदारतापूर्वक सहायता करें, जैसा कि आपने अन्य अवसरों पर किया है।
मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि इस बार आप क्वेटा भूकम्प राहत कोष के लिए हमें एक अच्छी/उदार राशि का चंदा देने तथा आम जनता से चंदा एकत्र करने में हमारी सहायता करने में पहले से अधिक उदारता दिखाएँ।
आपके शीघ्र उत्तर का अनुरोध है।

आपका सच्चा,

एस. डी. ओ., चमोली

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आज गोपेश्वर मंदिर की भूमि और स्योरे बुरी तरह अतिक्रमण की चपेट में हैं। मंदिर की धर्मशालाओं पर भी कब्जा हो गया। जबकि इस मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा का दायित्व सीधे जिलाधिकारी चमोली के पास है।

इस मंदिर का अपना एक गोपीनाथ गुरूकुल होना चाहिए।