‘पर्दे में रहने दो, नशा न छुपाओ’: सहारनपुर में बुर्के की आड़ में सवा दो करोड़ की स्मैक डिलीवरी, खाकी ने बिगाड़ा ‘हसीन’ खेल। वैसे पर्दा नसीं रहना है लेकिन नशा तस्करी के लिए कुछ भी करेगी। गंदा है पर धंधा है। #नशा_जिहाद
तस्करी के बाजार में ‘क्रिएटिविटी’ की कोई कमी नहीं है, लेकिन #सहारनपुर पुलिस के हत्थे चढ़ी इन ‘ड्रग दीदियों’ का कारनामा सुनकर तो फिल्मी स्क्रिप्ट राइटर भी शर्मा जाएं। पुलिस की नजरों से बचने के लिए मैडमों ने बुर्के को ही अपना चलता-फिरता गोदाम बना डाला, मगर खाकी के रडार ने इस ‘गुप्त मिशन’ को बीच रास्ते में ही डिकोड कर दिया।
सहारनपुर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रेशमा और आसमा नाम की दो महिलाओं को सवा दो करोड़ रुपये (2.20 करोड़) की भारी-भरकम स्मैक की खेप के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। इतना ही नहीं, जब पुलिसिया अंदाज में पूछताछ हुई, तो इन महिलाओं की निशानदेही पर दो अन्य मददगारों को भी धर दबोचा गया।
पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ, उसने तस्करों की नई ‘डिलीवरी स्कीम’ का पर्दाफाश कर दिया है। बड़े-बड़े ड्रग माफिया इन महिलाओं को बाकायदा ‘कवर’ के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे ताकि बुर्के की आड़ में बिना किसी शक-शुबहे के करोड़ों का नशा आसानी से ठिकाने लगाया जा सके। मैडमों को लगा था कि इस लिबास के पीछे उनका काला कारोबार कभी पकड़ा नहीं जाएगा, लेकिन पुलिस ने खेल ऐसा उलटा कि अब पूरी टोली हवालात की हवा खा रही है। फिलहाल सहारनपुर पुलिस इन मोहरों के जरिए गिरोह के असली आकाओं की गर्दन नापने की तैयारी में जुटी है। पूरा प्रकरण कुछ ऐसा है कि
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नशा तस्करी के विरूद्ध ‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 2.20 करोड़ रुपये (सवा दो करोड़) कीमत की अवैध स्मैक बरामद की है। इस मामले में दो महिलाओं समेत चार नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
यह संयुक्त कार्रवाई थाना मंडी पुलिस, एसओजी (SOG), स्वाट (SWAT) और सर्विलांस सेल की टीम द्वारा मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को की गई।
घटना से जुड़े मुख्य विवरण:
• बरामदगी: तस्करों के कब्जे से कुल 1 किलो 100 ग्राम (1.1 किलोग्राम) स्मैक और 4 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये आंकी गई है।
• गिरफ्तार आरोपी: पकड़े गए आरोपियों की पहचान रेशमा उर्फ अरशी, आसमा उर्फ बोबी, निजाकत उर्फ नज्जी (सहारनपुर व शामली का पुराना अपराधी) और अब्दुल उर्फ आहत के रूप में हुई है।
• तस्करी का तरीका (मोडस ऑपेरंडी): पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के पास से किसी अज्ञात व्यक्ति से यह स्मैक खरीदकर लाते थे। इसके बाद वे सहारनपुर में इसकी छोटी-छोटी पुड़िया (डोज़) बनाकर स्थानीय नशा करने वालों को महंगे दामों पर बेचते थे।
• कार्रवाई का स्थान: पुलिस टीम ने इन चारों को बाबालाल दास आश्रम के बाड़े के गेट के पास चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया।
पुलिस ने इन सभी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर इन्हें जेल भेज दिया है और इनके पूरे फॉरवर्ड व बैकवर्ड सप्लाई नेटवर्क का पता लगा रही है।
जिस तरह नशा तस्करी में भारी संख्या में समुदाय विशेष के लोग पकडे़ जा रहे हैं। नपुंसक बनाने की दवा जहरीली दवा तस्करी के के सामने आ रहे हैं। यह नशा जिहाद नहीं तो और क्या है?
