क्या आपने कभी सोचा है कि इतने सारे कॉकरोच और विषधर सांप अब खुले में क्यों आ रहे हैं?
वे भारतीय सत्ता को खुलेआम चुनौती क्यों दे रहे हैं?
क्या बदला है?
किस चीज़ ने उन्हें बाहर आने पर मजबूर कर दिया?
किसान एक तकनीक जानते हैं।
वे इसे “स्मोकिंग आउट” (धुआं देकर बाहर निकालना) कहते हैं।
धुआं ज़मीन के नीचे बने बिलों में जाता है।
छिपे हुए कीड़े-मकोड़े भागकर सतह पर आ जाते हैं।
उनकी छिपने की जगहें ही उनके लिए जाल बन जाती हैं।
दशकों तक, भारत ने एक अदृश्य युद्ध लड़ा।
एक खतरनाक ‘0.5 फ्रंट’।
आतंकी गुटों ने आम नागरिकों का कत्लेआम किया।
माओवादियों ने हमारे जवानों पर घात लगाकर हमले किए।
विदेशी आकाओं ने हिंसा के लिए फंडिंग की।
गैंगस्टरों ने हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी की।
प्रायोजित विरोध-प्रदर्शनों ने सुधारों को रोक दिया।
लेकिन 2020 के आसपास, कुछ बदलना शुरू हुआ।
चुपचाप।
व्यवस्थित रूप से।
लगभग किसी का ध्यान भी नहीं गया।
कोई सार्वजनिक मास्टरप्लान नहीं था।
बस एक के बाद एक कदम उठाए गए।
10 जनवरी 2020।
I4C लॉन्च किया गया।
साइबर अपराध के लिए एक केंद्रीय केंद्र (हब) बना।
सितंबर 2020।
FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) को सख्त किया गया।
विदेशी फंडों की जांच-पड़ताल बढ़ाई गई।
2021।
साइबर-फ्रॉड के विरूद्ध कार्रवाई शुरू हुई।
बैंक चोरी हुए फंड को रोक (इंटरसेप्ट) सकते थे।
FCRA के तहत मिलने वाली रकम SBI के तय गेटवे से होकर आने लगी।
मई 2022।
NATGRID ने बेंगलुरु में अपना कैंपस खोला।
जांचकर्ताओं को डेटा तक पहुंच मिली।
17 अगस्त।
NAFIS लॉन्च किया गया।
फिंगरप्रिंट्स को खोजना संभव हो गया।
जनवरी 2023।
UAPA के तहत चार आतंकी समूहों को प्रतिबंधित किया गया।
मई 2023।
‘ऑपरेशन ध्वस्त’ चलाया गया।
324 ठिकानों पर तलाशी ली गई।
दिसंबर 2023।
तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए।
जून 2024।
फोरेंसिक क्षमता बढ़ाने के लिए ₹2,254 करोड़ मंजूर किए गए।
जुलाई 2024।
तीन नए कानून प्रभावी हुए:
BNS: अपराध और सजा।
BNSS: आपराधिक प्रक्रिया।
BSA: साक्ष्य (सबूत) से जुड़े नियम।
CCTNS 2.0 के ज़रिए पुलिस डेटा शेयरिंग में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को शामिल किया गया।
सितंबर 2024।
5 और गुप्त कदम उठाए गए। समन्वय: साइबर अपराध डेटा साझा करना।
प्रतिबिंब: संदिग्धों की मैपिंग।
संदिग्ध रजिस्ट्री: धोखाधड़ी करने वालों की पहचान।
साइबर कमांडो: डिजिटल रक्षक।
फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर: बैंकों और पुलिस के बीच तालमेल।
जनवरी 2025.
भारतपोल (BHARATPOL) लॉन्च हुआ।
इंटरपोल (INTERPOL) के साथ तेज़ सहयोग।
जनवरी 2025.
CyMAC (साइमैक) की स्थापना।
साइबर-खतरों से जुड़ी जानकारी का समन्वय।
मई 2025.
₹500 करोड़ का MAC अपग्रेड।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)।
मैप्स (नक्शे)।
साझा जानकारी।
फरवरी 2026.
प्रहार (PRAHAAR) पेश किया गया।
आतंकवाद-विरोधी एक राष्ट्रीय रणनीति।
मार्च 2026.
NATGRID (नैटग्रिड) जुड़ा।
11 केंद्रीय एजेंसियां, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, और 11 डेटा प्रदाता शामिल हुए।
अब इन तारीखों को आपस में जोड़कर देखें।
पैसा अपने पीछे निशान छोड़ता है।
फिंगरप्रिंट से पहचान होती है।
डिवाइस सबूत छोड़ते हैं।
नेटवर्क पैटर्न (तरीके) छोड़ते हैं।
अब सभी तरह के अपराधीयों और भ्रष्टाचारियों की ट्रैकिंग मैपिंग और चिन्हित करना संभव है।
एक-एक करके।
अपराधियों के छिपने की जगहें कम होती जा रही हैं।
यह भारत की एक स्टीक व प्रभावी ‘बाहर निकालने वाली’ (smoking-out) रणनीति थी।
धुआं अब सुरंगों के अंदर तक पहुंच चुका है।
जमीन के नीचे छिपे लोगों के पास बाहर निकलने के रास्ते कम हो गए हैं।
जो छिपे हुए हैं, वे अब सबके सामने आ सकते हैं।
शायद सबसे बड़ा और जोरदार चरण अभी आना बाकी है।
क्योंकि भारत अब अंधेरे में भी देखना सीख रहा है।
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(साभार https://www.facebook.com/share/p/1UP5tDbE9r/ हिन्दू टैम्पल)
