धर्मान्तरण गिरोहों का भ्रमजाल तोड़ कर छत्तीसगढ़ में 500 लोगों की एक साथ घर वापसी

छत्तीसगढ़ में 500 लोगों की एक साथ घर वापसी

छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में करीब 500 लोगों की एक साथ सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ कराई गई। इसी आयोजन के दौरान करीब 500 धर्मांतरित लोगों की सनातन धर्म में घर वापसी का कार्यक्रम भी रखा गया। आयोजकों के अनुसार, धार्मिक संस्कारों, मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद इन परिवारों को उनकी मूल सनातन परंपराओं और संस्कारों से दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई।

कार्यक्रम में शामिल लोगों के चरण पखारकर उनका स्वागत किया गया और उन्हें सनातन संस्कृति से जुड़ने का संकल्प दिलाया गया। सावन के महीने में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला और पार्थिव शिवलिंगों के निर्माण और पूजन के साथ भगवान भोलेनाथ की विशेष आराधना की गई।

प्रबल प्रताप जूदेव ने कहा- जारी रहेगा घर वापसी अभियान

घर वापसी कार्यक्रम में भाजपा नेता व अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमार दिलीप सिंह जूदेव ने जिस संकल्प के साथ घर वापसी अभियान को आगे बढ़ाया था, उसी कार्य को जारी रखना उनके जीवन का उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि अपनी मूल परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और घर वापसी इसी दिशा में चलाया जा रहा अभियान है। जूदेव ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और जीवन दर्शन का आधार है।

*(वर्तमान में शुद्धि ही आपकी आने वाली पुश्तों की रक्षा करने में सक्षम हैं। याद रखें आपके धार्मिक अधिकार तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक आप बहुसंख्यक हैं। इसलिए अपने भविष्य की रक्षा के लिए शुद्धि कार्य को तन, मन, धन से सहयोग कीजिए। 

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित ‘राम मिलेंगे आश्रम’ में अगस्त 2026 में लगभग 500 मतांतरित लोगों की सनातन धर्म में एक साथ ‘घर वापसी’ कराई गई। यह धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान एक पादरी द्वारा भगवान शिव पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध तथा वैदिक विधि-विधान के बीच संपन्न हुआ। 
कार्यक्रम की मुख्य बातें
  • स्थान: तेंदुवाधाम स्थित ‘राम मिलेंगे आश्रम’, शिवरीनारायण (छत्तीसगढ़)। 
  • संख्या: लगभग 500 मतांतरित लोग
  • योजन: सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का पूजन और पारंपरिक सनातन रीति-रिवाज। ।
  • मुख्य कारण: पादरी अरुण पन्नालाल द्वारा शिवलिंग पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरूद्ध स्थानीय समाज का रोष और विरोध प्रदर्शन।