*रोजगार और पर्यटन का ग्रीन कॉरिडोर बनेगा दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले उत्तराखंड के ऐतिहासिक मां डाट काली मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। देहरादून-सहारनपुर हाईवे पर स्थित यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है और इसकी स्थापना 1804 में हुई थी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली- देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण कर दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड के लिए रोजगार और पर्यटन का ग्रीन कॉरिडोर शुरू हो गया है। अब दिल्ली- देहरादून का सफ़र महज़ ढाई घंटे का में पूरा हो जाएगा इसके साथ ही चारधाम यात्रा, कॉर्बेट एवं राजाजी नेशनल पार्क, मसूरी, टिहरी और उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटक स्थलों पर आने वाले सैलानियों की बड़ी संख्या में तादात बढ़ने की उम्मीद है।
यह कॉरिडोर केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला “ग्रीन कॉरिडोर” साबित होने जा रहा है। यह कॉरिडोर पहाड़ और मैदान के बीच दूरी को कम करते हुए किसानों, उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।
अब हर्षिल के प्रसिद्ध सेब, जोशीमठ और चकराता की राजमा, पुरोला के लाल चावल, तथा रुद्रप्रयाग के बुरांश का जूस जैसे पारंपरिक और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से और कम लागत पर बड़े शहरों तक पहुँच सकेंगे। लॉजिस्टिक लागत में कमी आने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिरता आएगी।
राज्य में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और एग्री-लॉजिस्टिक्स जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा । इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। इस परियोजना से परिवहन क्षेत्र, कृषि आधारित उद्योग, छोटे और मध्यम उद्योगों को गति मिलेगी। इससे पलायन की समस्या को भी काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, यह कॉरिडोर पर्यटन क्षेत्र के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद सिद्ध होगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण देश-विदेश के पर्यटक आसानी से उत्तराखण्ड के दूरस्थ और प्राकृतिक स्थलों तक पहुँच सकेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और हस्तशिल्प को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देहरादून में दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह में अपने ऐतिहासिक सम्बोधन में पहली बार हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दा देवी राजजात 2027 का जिक्र करते हुए यात्रा को दिव्य ,भब्य एवं सुरक्षित बनाने का संकल्प लिया साथ ही उत्तराखंड राज्य की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने श्री नन्दा देवी राजजात का स्मृति चिन्ह माननीय प्रधानमंत्री जी को भेंट किया आशा है कि श्री नन्दा देवी राजजात 2027 में ढांचागत सुविधाओं के सृजन में केन्द्र सरकार की भरपूर सहायता समय पर मिल जायेगी माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री महेन्द्र भटृ जी के सद
प्रयास और माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में यात्रा ऐतिहासिक होगी श्री नन्दा देवी राजजात समिति एवं नन्दा भक्त
माननीय प्रधानमंत्री जी एवं मुख्य मंत्री जी का आभार व्यक्त करते हैं।
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की बाॅडिंग भी आज के मुख्य समाचारों में है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले उत्तराखंड के ऐतिहासिक मां डाट काली मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। देहरादून-सहारनपुर हाईवे पर स्थित यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है और इसकी स्थापना 1804 में हुई थी।
इस मंदिर के निर्माण से जुड़ी मान्यता है कि जब यहां सड़क या सुरंग का काम चल रहा था, तब एक ब्रिटिश इंजीनियर को सपने में मां काली दिखाई दी थीं। इसी घटना के बाद यहां मंदिर की स्थापना की गई। देवी के उग्र रूप और बाहर निकले हुए दांतों के कारण शुरुआत में इसका नाम ‘दंतकाली’ था। हालांकि, अंग्रेज अफसर संस्कृत का सही उच्चारण नहीं कर पाते थे, जिसके कारण इसका नाम ‘डाट काली’ पड़ गया।
स्थानीय पत्थर और लकड़ी से बना यह मंदिर उत्तराखंड के प्रवेश द्वार पर स्थित है। देवी काली को मार्गों और वाहनों की रक्षक माना जाता है, इसलिए यहां से गुजरने वाले राहगीर और चालक अपनी सुरक्षित यात्रा के लिए इस मंदिर में प्रार्थना जरूर करते हैं।✍️ हरीश मैखुरी
