तमिलनाडु की राजनीति आ सकता है बड़ा मोड़ : कांग्रेस गठबंधन टूटने के तुरंत बाद स्टालिन का दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का अर्थ है कि राजनीति संख्या व समीकरण से अधिक संभावनाओं का खेल है

तमिलनाडु की राजनीति आ सकता है बड़ा मोड़ : कांग्रेस से गठबंधन टूटने के तुरंत बाद स्टालिन का दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का अर्थ है कि राजनीति संख्या व समीकरण से अधिक संभावनाओं का खेल है

कांग्रेस के तमिलनाडु में कुल 5 विधायक हैं, लेकिन सत्ता की राजनीति में संख्या से ज्यादा समीकरण परखे जाते हैं। इसी बीच कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी DMK से दूरी बनाकर TVK का हाथ थाम लिया है। राजनीति के जानकरों में चर्चा है कि DMK अब पहले जैसी सुदृढ़ स्थिति में नहीं रही, और कांग्रेस किसी भी स्थिति में सत्ता के समीकरण से बाहर नहीं होना चाहती।

DMK प्रमुख एम. के. स्टालिन ने कांग्रेस के इस कार्य को “पीठ में छुरा घोंपना” बताया है। कांग्रेस के इस निर्णय के तुरंत बाद उनका दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री मोदी से मिलना भी कई नए प्रश्न व संभावनाओं जागृत कर रहा है।

DMK के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। ऐसे में राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि आने वाले समय में संसद के अंदर समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर DMK, कांग्रेस से दूरी बनाकर NDA को समर्थन दे, ऐसी संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता।और राजनीति है ही संभावनाओं का खेल। 

यदि भविष्य में तमिलनाडु में DMK, ADMK और NDA किसी नए समीकरण के साथ दिखाई दें, तो आश्चर्यचकित नहीं होनी चाहिए। हालांकि भाजपा और DMK का औपचारिक गठबंधन अभी भी दूर की संभावना माना जा रहा है, लेकिन बाहर से समर्थन जैसे विकल्प राजनीति में सदैव खुले रहते हैं।

अब सबकी दृष्टि इनके दिल्ली की बैठकों पर है।

यदि मोदी जी से भेंट के बाद DMK नेता अमित शाह से मिलने जाएं, और भेंट वार्ता लंबी चले… तो समझ जाइएगा कि केवल खिचड़ी नहीं, अपितु पूरा राजनीतिक भोज पक रहा है… 😄 फिर लिखूंगा तमिलनाडु की राजनीति में आ सकता है बड़ा मोड़ : कांग्रेस गठबंधन टूटने के तुरंत बाद स्टालिन का दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का अर्थ है कि राजनीति संख्या व समीकरण से अधिक संभावनाओं का खेल है ✍️ हरीश मैखुरी