जो व्भ्यक्ति नित्य पंचाग पढता है उसके अरिषट कट जाते हैं और सुखमय जीवन मिलता है इसलिए भगवान बासुदेव नारायण स्वयं भी नित्य पढते हैं
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जो व्भ्यक्ति नित्य पंचाग पढता है उसके अरिषट कट जाते हैं और सुखमय जीवन मिलता है इसलिए भगवान बासुदेव नारायण स्वयं भी नित्य पढते हैं
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📖 *नीतिदर्शन……………..*✍ *निरुत्साहं निरानन्दं निर्वीर्यमरिनन्दम्।* *मा स्म सीमन्तिनी काचिज्जनयेत्पुत्रमीदृशम्।।* 📝 *भावार्थ* 👉🏾 उत्साहरहित, आनंदहीन, शत्रुके आनन्दको बढ़ानेवाले ऐसे पुत्रको कभी कोई माता जन्म न दे।
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*शरीर कभी भी पूरा पवित्र** नहीं हो सकता फिर भी* *सभी इसकी पवित्रता की* *कोशिश करते रहते है* *मन पवित्र हो सकता है* *मगर अफसोस*
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🌹………..|| *पञ्चाङ्गदर्शन* ||……….🌹 *श्रीशुभ वैक्रमीय सम्वत् २०७७ || शक-सम्वत् १९४२ || याम्यायन् || प्रमादी नाम संवत्सर|| हेमन्त ऋतु || मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष || तृतीया तिथि ||
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📖 *नीतिदर्शन……………….*✍ *प्रायो दुरान्तपर्यंता: सम्पदो हि दुरात्मनाम्।* *भवन्ति हि सुखोदर्का विपदो$पि महात्मनाम्।।* 📝 *भावार्थ* 👉🏾 प्रायः दुरात्मा पुरुषोंकी सम्पत्तियाँ भी अन्ततः दुःखदायिनी ही होती हैं
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