यदि हम यूजीसी पर हस्तक्षेप नहीं करेंगे तो UGC के दुष्परिणाम घातक होंगे सवर्णों को टारगेट किया जाएगा, सर्व समाज आपस में बंट जाएगा

UGC पर भडके सुप्रीम कोर्ट के मुख्यन्यायधीश ,कहा की👇🏻👇🏻यदि हम यूजीसी पर हस्तक्षेप नहीं करेंगे तो UGC के दुष्परिणाम घातक होंगे सवर्णों को टारगेट किया जाएगा,सर्व समाज आपस में बंट जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे (CJI सूर्यकान्त शर्मा )

सवर्णों आरक्षण ने तुम्हारी नौकरी छीन ली और, SCST एक्ट ने तुम्हारे स्वाभिमान को चुनौती दीया , और अब UGC नीति तुम्हारे बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर रहा है

सोचने वाली बात यह है कि हर बार जब ऐसे बड़े फैसले आते हैं, तो पहले उन्हें टालने या स्थगित करने की प्रक्रिया होती है। 

आज भी मामला आगे की तारीख पर है, लेकिन क्या हमने इतिहास से कुछ सीखा है

जब आरक्षण लागू हुआ,तब भी यही प्रक्रिया अपनाई गई,जब SC/ST एक्ट आया, तब भी पहले तारीखें बढ़ती रहीं, और अंत में फैसले लागू कर दिए गए, आज फिर वही स्थिति बनती दिख रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कौन सी सरकार है या कौन सा दल है, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम अपने अधिकारों, अवसरों और भविष्य के प्रति जागरूक हैं या नहीं?

समाज तभी मजबूत होता है जब वह संगठित, जागरूक और सच को समझने वाला हो।

अगर हम खुद सवाल नहीं पूछेंगे, तो कोई और हमारे लिए नहीं खड़ा होगा।

यह समय है सोचने का, समझने का और अपने बच्चों के भविष्य के लिए आवाज उठाने कादलितों को पांच हजार वर्ष दबाने का झूठ : स्वतंत्रता से पहले दो सौ वर्ष #अंग्रेज लुटेरों का बलात् आधिपत्य रहा, उससे पहले दुर्दांत गो भक्षी #मुगल म्लेच्छों का आठ सौ वर्ष भारत पर जबरन कब्जा रहा, उससे पहले डेढ़ हजार वर्ष #मौर्य साम्राज्य व #चोल आदि का साम्राज्य था जिनके वशंज आज के दलित हैं, उससे पहले सैकड़ों वर्ष #बौद्धों का राज था, उससे पहले एक हजार वर्ष तक #यदुवंशी भगवान #श्रीकृष्ण का राज था और उनके एक मित्र गरीब याचक ब्राह्मण सुदामा थे। फिर भी संविधानिक दलितों ने पांच हजार वर्ष पानी नहीं पिया? और कहते हैं “मनुवादी ब्राह्मण तो यूरेशिया से केवल दो हजार वर्ष पहले ही भारत आये” तो फिर पांच हजार वर्ष #पानी से #वंचित रखने वाले कौन थे!! 😅😉😎

भाई आज के यूरेशिया को ही शास्त्रों में आर्यावर्त कहा गया है, आर्याव्रत में ही भारतवर्ष है। 
वैसे तो #मोहन_भागवत जाति विहीन समाज बनाने का ज्ञान बघारते हैं लेकिन जाति के आधार पर आरक्षण भी रखना चाहते हैं। दोनों बातें एक साथ कैसे चल सकती हैं? फिर तो ये भारत के जातीय विभेदकारी संविधान जैसी बातें हो गयी कहते हैं सबके लिए समान विधान अर्थात #संविधान लेकिन विधान सारे जातीय विभेद व इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले #विसम_प्रावधान के। 
कांग्रेस की #अपठित #कार्बन कापी बन चुके #मोहन_भागवत आदि को ज्ञात होना चाहिए कि #दलित #पिछड़ी #आदिवासी जैसी कपोल कल्पित जातिवाचक शब्दावली संविधान में हैं। शास्त्रों में नहीं। जाति प्रमाण पत्र भी संविधान ही देता है शास्त्र नहीं।
और #शास्त्रों में केवल सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् की व्यवस्था है। 
जब तक #भारत  शास्त्रों से #संचालित होता था भारत #सोने की #चिड़िया कहलाता था यहां पर्याप्त धन वन संपदा थी मंदिर भी सोने से अटे रहते थे, घरों में ताले नहीं लगते थे लोग एक भी अपशब्द नहीं बोलते थे दूध दही की नदियाँ बहती थी। उसी अकूत संपदाओं को लूटने #मुगल_आक्रांता और #षड्यंत्रकारी_अंग्रेज लुटेरे भारत आये। नालंदा विश्वविद्यालय तक्षशिला विश्वविद्यालय विक्रमशिला विश्वविद्यालय शारदा विश्विद्यालय जैसे दर्जनों अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय और आठ लाख गुरूकुल थे। भारत विश्व गुरु था देश विदेश से विद्यार्थी अध्ययन करने आते थे। जब से भारत का संविधान लागू हुआ पांच म्लेच्छ मुस्लिम शिक्षामंत्रयों ने शिक्षा का भट्टा बिठाया और गुरूकुल पूरी तरह समाप्त कर भारत की हिन्दी संस्कृत भाषा नष्ट कर उर्दू अंग्रेजी जैसी कबीलों की अपशब्द युक्त भाषा को भारत पर थोप दिया। संविधान द्वारा आरक्षण, जातीय विभेद व इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा मिलने के कारण देश की प्रतिभाओं ने पलायन कर दिया। मनुस्मृति लागू करो भारत बचाओ✍️ हरीश मैखुरी