दिसंबर तक भारत के एक रूपये में ईरान की 500 रियाल मिल जाती थी फिर हुआ युद्ध और आज हमारे एक रूपये में लगभग 15 हजार रियाल मिल सकते है लेकिन अमेरिका विरोधियो की नजर में युद्ध ईरान ने जीता है। मूर्खता और जाहिलपन का इससे बड़ा प्रमाण कोई नहीं हो सकता।
भारत मे महंगाई दर 7 प्रतिशत हो गयी थी तो मनमोहन सरकार के पैर उखड़ गए थे, आज भी 4.5-5 के बीच है लेकिन हम त्राहि कर लेते है। ईरान मे 500% है, आप एक बार को सोचकर तो देखो आपके हाथ मे 15000 का फोन है वो अचानक 75 लाख का हो जाये तो कैसा हो?
ईरान के जितने मिडिल क्लास थे सभी 6 महीने में गरीब हो चुके है और गरीब भूखमरी में जी रहे है। दुनिया में सबसे निर्दयी और संवेदनहीन वो व्यक्ति है जिसे लगता है कि युद्ध हथियार मारने गिराने और जमीनी कब्जे का नाम है।
ऑपरेशन सिंदूर के समय एक कॉमेडियन ने पाकिस्तान का मजाक उड़ाते हुए कहा था गिरने दो राफेल हम फिर से खरीद लेंगे हमे थोड़ी ना IMF से लोन लेना है। दर्शको ने जमकर ताली बजाई मगर ये युद्ध की सच्चाई है अस्त्र शस्त्र बने ही इसीलिए है कि या तो स्वयं नष्ट हो या लक्ष्य भेदन करे? अर्जुन ने कर्ण का वध किया ये इतिहास है, अर्जुन को कितने बाण चलाने पड़े ये बेफिजूल की चर्चा है।
अमेरिका ने लगभग 2.3 ट्रिलियन डॉलर अफगानिस्तान में फूक दिए थे कई अमेरिकी सैनिको ने वीरगति भी प्राप्त की और कई अमेरिकी माताएं बहने संतानहीन और विधवा हुई। आज भी आपको उनके ह्दयविदारक इंटरव्यू देखने को मिल जायेंगे और ये ऐसी जंग थी जिसका आज भी अमेरिका के पास कोई जवाब नहीं है।
लेकिन उसी युद्ध में अमेरिका ने तमाम शस्त्र परीक्षण किये, 4 ट्रिलियन डॉलर की डेटा इंडस्ट्री खड़ी कर ली। पश्चिमी देश मानव शरीर पर मेडिकल प्रयोग ना करे ये तो हो नहीं सकता, उसकी स्टडी अलग हुई होगी और सबसे बढ़कर ठंडे देश से आयी अमेरिकी सेना ने सूखे और कम नमी वाले क्षेत्र में सैन्य अभ्यास किया।
ये सब बाते आंकड़ों में नहीं बताई जा सकती तो इसका मतलब ये तो नहीं कि इसका कोई मोल नहीं। वर्तमान के युद्ध पुराने युद्धों से बिल्कुल अलग हो गए है। भारत ने पाकिस्तान पर आक्रमण किया इसलिए नहीं कि उसे शक्ति प्रदर्शन करना था अपितु इसलिए कि लम्बी शांति चाहिए थी। शब्द याद रखे लम्बी स्थायी नहीं क्योकि स्थायी शांति एक भ्रम है।
पाकिस्तान फिर से युद्ध की तैयारी में लगा है, कई कारण आपको बाजार की चर्चा में मिल जायेंगे मगर असल कारण सिर्फ इतना है कि पाकिस्तान की सेना को अपनी अप्रूवल रेटिंग फिर से चाहिए चाहे फिर भारत POK वापस ही क्यों ना ले। वही युद्ध होगा तो जाहिर है भारत के कुछ सैनिक भी वीरगति प्राप्त करेंगे।
भारत के विमान क्षतिग्रस्त होंगे पाकिस्तानी सेना उसी में अपना प्रोपोगंडा चला लेगी और आप खुद देखेंगे कांग्रेस समेत कई बुद्धि विवेक से शून्य हिंदूवादी भी उनके अजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। युद्ध की परिभाषा अब बस यही बची है, युद्ध के दो परिणाम होते है एक सोशल मीडिया पर दिखाई देता है दूसरा जमीन पर।
पाकिस्तान, ईरान या अफगानिस्तान कोई भी देश हो ये कभी सोशल मीडिया पर हार ही नहीं सकते क्योकि उनके पास जीतने का यही एक मैदान है और ये सबसे सस्ता भी है। आपके पास इस्लामिक उम्मा है जबकि हम काफ़िर तो बंटे पड़े है दूसरी ओर भारत, अमेरिका और इजरायल को हमेशा अवलोकन करना पड़ता है।
जिसके कपडे सफ़ेद हो उस पर लगी हल्दी भी स्पष्ट दिखाई देती है वही कीचड मे रेंग रहे व्यक्ति की गंदगी भी उसके लेवल का श्रृंगार लगती है। नहीं फर्क पड़ता कि सैनिक मारे गए या विमान स्वाहा हुए, मुद्दा है हमें जो हासिल करना था वो कर लिया।
आज कश्मीर साफ है, गाजा पट्टी समतल हो चुकी है और अमेरिका ईरान को भूखे मार रहा है। ये वो उपलब्धि है जो कभी गणित के अंको पर नहीं गिनी जायेगी, शायद हम इनफार्मेशन वॉर भी हार जाए लेकिन असल मैदान मे विजयलक्ष्मी काफिरो का वरण कर चुकी होंगी।✍️ परख सक्सेना
