म्यांमार में उग्रवादी समूहों को प्रशिक्षण देने के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और ड्रोन तस्करी मामले की जांच से संकेत मिले हैं कि अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है।
खुद को युद्ध विशेषज्ञ बताने वाले और सुरक्षा फर्म संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (एसओएलआइ) के संस्थापक डाइक को 13 मार्च को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर गिरफ्तार किया गया था।
मैथ्यू डाइक, यूक्रेन के छह नागरिकों हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर के साथ गिरफ्तार किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, मैथ्यू डाइक फ्रीलांसर के रूप में काम करता था और असाइनमेंट हासिल करने के लिए एक्स, यूट्यूब जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी युद्ध विशेषज्ञता के बारे में मार्केटिंग करता था।
जांचकर्ताओं ने उसकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए इन प्लेटफार्मों से विस्तृत डाटा मांगा है।एनआइए की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि डाइक और उसकी टीम के सदस्य अलग-अलग तारीखों पर पर्यटक वीजा पर भारत आए।
इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी के लिए उड़ान भरी और फिर अनिवार्य प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी) या संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) के बिना मिजोरम गए, जिसके बाद वे अवैध रूप से म्यांमार में घुसे।
आरोप है कि मैथ्यू डाइक का नेटवर्क म्यांमार स्थित सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देता था, जिसमें ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली और इलेक्ट्रानिक जैमिंग सिस्टम शामिल हैं। आरोपितों ने कई मौकों पर ऐसे प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की बात मान है।
आरोप है कि इस समूह ने यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार में ड्रोन की खेप की तस्करी की ताकि इन सशस्त्र समूहों की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाया जा सके।
एनआइए ने अदालत को यह भी बताया है कि आरोपित अज्ञात सशस्त्र आपरेटरों के संपर्क में थे, जो एके-47 राइफलों से लैस थे, और उन्होंने आतंकी और अवैध गतिविधियों में मदद की। इसने प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही संगठनों को भी हथियार, प्रशिक्षण दिया।
इंटरनेट मीडिया प्रोफाइल के अनुसार, डाइक ने कथित तौर पर सीरिया, लीबिया, अफगानिस्तान और इराक में संघर्षों में भाग लिया, जिसमें 2011 का लीबियाई गृह युद्ध भी शामिल है। वहां उसे पांच महीने से अधिक समय तक युद्ध बंदी के रूप में रखा गया था।
समझा जा रहा है कि सीआईए का मोदी शाह आदि बड़े नेताओं को तारगेट करने का प्लान ध्वस्त हो गया। म्यांमार में उग्रवादी समूहों को प्रशिक्षण देने के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और ड्रोन तस्करी प्रकरण में एनआइए ने न्यायलय को बताया कि अमेरिकी नागरिक मैथ्यू व अन्य आरोपी अज्ञात सशस्त्र आपरेटरों के संपर्क में थे, जो एके-47 राइफलों से लैस थे
