*23 अप्रैल को खुलेंगे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट*
*आज वसंत पंचमी को नरेंद्र नगर (टिहरी) स्थित राजमहल में तय हुई कपाट खुलने की तिथि*
• *श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ने शुरू की यात्रा तैयारियां: हेमंत द्विवेदी*
नरेंद्र नगर/ ऋषिकेश/ : 23 जनवरी। इस यात्रा वर्ष श्री बदरीनाथ धाम के कपाट गुरूवार 23 अप्रैल को प्रात: 6.15 ( सवा छ: बजे) खुलेंगे तथा तेल कलश गाडू घड़ा यात्रा मंगलवार 7 अप्रैल से शुरू होगी।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज वसंत पंचमी शुक्रवार 23 जनवरी को नरेंद्र नगर स्थित टिहरी राज दरबार में कपाट खुलने की तिथि तय हुई।श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी)अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि कपाट खुलने की तिथि तय होते ही आगामी यात्रा हेतु बीकेटीसी ने तैयारियां शुरू कर दी है तथा यात्रा व्यवस्थाओंं हेतु कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप दिया जायेगा उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा के साथ साथ आगामी चार धाम यात्रा तैयारियों पर फोकस रहेगा। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय होने के अवसर पर श्रद्धालुओं को बधाई दी चारधाम यात्रा का भी आमंत्रण दिया।
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय होने के कार्यक्रम हेतु टिहरी राजमहल की ओर से आज शुक्रवार को प्रात: साढ़े दस बजे से धार्मिक समारोह शुरू हो गया था। दोपहर बाद महाराजा मनुजयेंद्र शाह की उपस्थिति में पूजा-अर्चना पश्चात राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग गणना तथा महाराजा की जन्मकुंडली देखने के पश्चात विधि – विधान से श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि का निर्धारण किया तथा कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के साथ ही गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा का दिन भी तय हो गया। समारोह में महाराजा मनुजयेंद्र शाह, की जन्म कुंडली देखकर राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल पंचांग गणना पश्चात श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि का विनिश्चय किया।इससे पहले श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत प्रतिनिधियों ने गाडू घड़ा तेलकलश राजमहल के सुपुर्द किया।
इस अवसर पर महाराजा मनुजयेंद्र शाह सहित सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, रावल अमरनाथ नंबूदरी , उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण तथा बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल तथा मंदिर समिति सदस्य श्रीनिवास पोस्ती,प्रह्लाद पुष्पवान, धीरज मोनू पंचभैया , महेंद्र शर्मा , देवीप्रसाद देवली,राजेंद्र प्रसाद डिमरी, नीलम पुरी दिनेश डोभाल, राजपाल जड़धारी डा विनीत पोस्ती, श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, पूर्व सदस्य भास्कर डिमरी, पूर्व सदस्य वीरेंद्र असवाल,विनोद डिमरी, सचिव भगवती डिमरी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी , निजी सचिव प्रमोद नौटियाल, मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़, संजय भट्ट , विश्वनाथ,राजगुरु माधव नौटियाल, स्वास्तिक नौटियाल हरीश डिमरी, पीतांबर मोल्फा,दिनेश डिमरी, हेमंत डिमरी सुधीर डिमरी,मुकेश डिमरी,सुभाष डिमरी, संदीप डिमरी सहित श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।
चमोली नौटी – श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को अगले वर्ष आयोजित करने के लिए नौटी में मनौती मांगी गई। इसके बाद छंतोली को शैलेश्वर शिवालय में स्थापित कर दिया गया।
नंदादेवी राजजात अगले वर्ष आयोजित करने के लिए नौटी मंदिर में कांसुवा के राजवंशी कुंवरों ने पूजा अर्चना कर मनौती मांगी। इस अवसर पर सभी लोगों ने एक स्वर से भगवान से अगले वर्ष नंदा राजजात आयोजित करने की मनौती मांगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी पूजा अर्चना के सम्मिलित होकर भगवान से शिव तथा मां नंदा से अगले वर्ष की नंदा राजजात यात्रा के सफल संचालन की कामना की। इस आशय की विधिवत घोषणा राजकुंवर डा. राकेश कुंवर ने की। महामंत्री भुवन नौटियाल समेत अन्य लोगों की उपस्थिति में अगले वर्ष की राजजात यात्रा को सफल बनाने के लिए आधार भूत आवश्यक सुविधाओं को हर पड़ाव पर सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प भी लिया गया। धार्मिक विधि विधान के साथ छंतोली को शैलेश्वर में मंदिर में स्थापित कर दिया गया। इस तरह पूर्व स्थगन की घोषणा पर कांसुवा-नौटी की नंदादेवी राजजात समिति अपने फैसले पर अड़िग रही। तर्क दिया गया कि मलमास के चलते इस वर्ष राजजात यात्रा का संचालन संभव नहीं है। नंदा धाम नोटी में राज कुंवर ,राजपुरोहित जिलाधिकारी चमोली, पुलिस अधीक्षक चमोली, विधायक कर्णप्रयाग श्री अनिल नौटियाल, 14 सयानो एवं बारह थोकी ब्राह्मण की उपस्थिति में सुनिश्चित हुआ श्री नंदा देवी राजजात यात्रा 2027 में होगी।
चमोली : इधर नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा की बड़ी जात निकालने की घोषणा कर दी गई इसके अंतर्गत 5 सितम्बर को बड़ी जात यात्रा आरंभ होगी। इस मध्य बड़ी जात के आयोजन को लेकर अब तैयारियों पर जोर दिया जाएगा।
कुरूड़ मंदिर में गौड़ ब्राह्मणों ने आयोजकों की उपस्थिति में पूजा अर्चना के पश्चात बड़ी जात के आयोजन की घोषणा की। इसके अंतर्गत पांच सितम्बर से बड़ी जात आरंभ होगी। कुरूड़ में बड़ी संख्या में मौजूद लोगों की उपस्थिति में यह घोषणा की गई। इस मध्य देवी के पश्वा भी अवतरित हुए और बड़ी जात पर मां नंदा ने जाने की स्वीकृति प्रदान की। इस पर लोगों ने करतल ध्वनि से घोषणा का स्वागत किया। कार्यक्रम के मध्य भजन कीर्तन और धार्मिक गीतों की प्रस्तुति से कुरूड़ मंदिर परिसर धर्ममय हो चला। कुरूड़ मंदिर समिति ने कार्यक्रम की सभी तैयारियों को आगे बढ़ाने की घोषणा की। कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला के अनुसार नंदा की बड़ी जात के लिए तिथि की घोषणा हो गई है। अब बड़ी जात संचालन के लिए व्यवस्थाओं की तैयारियां प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने कहा कि पौराणिक आस्था और परंपरा से जुड़ी बड़ी जात किसी भी परिस्थिति में नहीं रोकी जा सकती थी। इसके चलते ही कुरूड़ से इस बार बड़ी जात निकालने पर सभी लोगों ने हामी भरी। एक तरह से अब इस बार बड़ी जात का आयोजन कुरूड से होने जा रहा है। देवडोलियों का यात्रा मानचित्र व कार्यक्रम भी साझा किया गया है। इसके अन्तर्गत अन्य डोलियां भी इसी तरह होमकुंड तक जाएंगी।
बधाण की नंदा का यह रहेगा कार्यक्रम यह होगा।
5 सितम्बर 26- सिद्धपीठ कुरूड से चरबंग।
6 सितम्बर 26- चरंबग से कुंडबगड होते हुए मथकोट।
7 सितम्बर 26- मथकोट से धरगांव, नंदानगर होते हुए उस्तोली।
8 सितम्बर 26- उस्तोली से सरपाणी, लांखी होते हुए भेंटी।
9 सितम्बर 26- भेंटी से स्यांरी बंगाली होते हुए डुंग्री।
10 सितम्बर 26- डुंग्री से केरा, मैन होते हुए सूना।
11 सितम्बर 26- सूना से थराली, राडीबगड होते हुए चेपडों।
12 सितम्बर 26- चेपडों से कोठी होते हुए नंदकेशरी। (गढ़वाल तथा कुमाऊ की राज छंतोलियों का मिलन)।
13 सितम्बर 26- नंदकेशरी से पूर्णा, देवाल, इच्छोली, हाट होते हुए फल्दियागांव।
14 सितम्बर 26- फल्दियागांव से कांडई, लबू, ल्वाणी, बगडीगाढ़ होते हुए मुदोली।
15 सितम्बर 26- मुंदोली से लोहाजंग, कार्तिकबगड़, देवी लाटू मिलन वाण।
15 सितम्बर 26- वाण से रणकधार होते हुए गैरोलीपातल।
17 सितम्बर 26- गैरोलीपातल से डोलीधार होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर 26- बेदनी में नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचैणियां।
19 सितम्बर 26- पातर नचैणियां से कलवा बिनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली-शिलासमुंद्र।
20सितम्बर 26- शिलासमुद्र से पंचगंगा, होमकुंड में बडी जात और जामुनडाली।
21 सितम्बर 26- जामुनडाली से तातडा होते हुए सुतोल।
22 सितम्बर 26- सतोल से कनोल होते हुए वाण।
23 सितम्बर 26- वाण से कुलिंग।
24 सितम्बर 26- कुलिंग से बगडीगाढ होते हुए ल्वाणी।
25 सितम्बर 26- ल्वाणी से उलंग्रा।
26 सितम्बर 26- उलंग्रा से हाट होते हुए वेराधार।
27 सितम्बर 26- वेराधार से टुनरी होते हुए गोठिंडा।
28 सितम्बर 26- गोठिंडा से कुनीपार्था होते हुए कुराड़।
29 सितम्बर 26- सगवाडा से डांखोली।
30 सितम्बर 26- डांखोली से भेटा होते हुए नंदादेवी सिद्धपीठ देवराडा में छह माह का प्रवास।
दशोली की नंदा की रूट मैप
5 सितम्बर – सिद्धपीठ कुरूड से धरगांव होते हुए कुमजुग।
6 सितम्बर – कुमजुग से कुंडबगड होते हुए लुणतरा।
7 सितम्बर – लुणतरा से कांडा, खुनाणा, लामसोडा, माणखी, चोपडाकोट होते हुए कांडई।
8 सितम्बर – कांडई से खलतरा, मोठा, चाका होते हुए सेमा।
9 सितम्बर – सेमा से बैराशकुंड, इतमोली, घुवडखेत होते हुए मटई ग्वाड।
10 सितम्बर – मटई ग्वाड से दाणू मंदिर होते हुए पगना।
11 सितम्बर – पगना से भौंधार, चरबंग होते हुए ल्वाणी।
12 सितम्बर – ल्वाणी से सुंग, बौंटाखाल होते हुए रामणी।
13 सितम्बर – रामणी से कासमातोली, घूनी, पडेरगांव, बूरा होते हुए आला।
14 सितम्बर – आला से जोखना, सितेल होते हुए कनोल।
15 सितम्बर – कनोल से वाण। (लाटू व सभी देवडोलियों का मिलन)।
16 सितम्बर – वाण से गैरोलीपातल।
17 सितम्बर – गैरोलीपातल से होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर – बेदनी में अमुकता भरणी नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचैणियां।
19 सितम्बर – पातर नचैणियां से कलवा विनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुंद्र।
20 सितम्बर – शिला समुंद्र से पंचगंगा, त्रिशूली, होमकुंड होते हुए जामुनडाली।
21 सितम्बर – जामुनडाली से तातडा, द्योसिंगधाम होते हुए सुतोली।
22 सितम्बर -सुतोल से फरखेल।
23 सितम्बर -फरखेत से कुंरूड नंदाधाम।
निश्चित रूप से प्रशासन को इस जात यात्रा के लिए आधार भूत सुविधायें स्वास्थ्य यातायात व सुरक्षा की व्यवस्था करनी होगी।
