*ब्रह्मत्वे सृजते विश्वं स्थितौ पालयते पुनः* *रुद्ररूपाय कल्पान्ते नमस्तुभ्यं त्रिमूर्तये।* *देवा यक्षासुरा: सिद्धा नागा गन्धर्वकिन्नरा:* *पिशाचा राक्षसाश्चैव मनुष्या: पशवस्तस्था।।* *पक्षिण: स्थावराश्चैव पिपीलिकसरीसृपा:* *भूम्यापोऽग्निर्नभो वायु: शब्द:स्पर्शस्तथा
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