वरिष्ठ अधिवक्ता भुवन नौटियाल सचिव बार एसोसिएशन कर्णप्रयाग जिला चमोली ने उत्तराखंड बार काउन्सिल को प्रदेश के हित में महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। भुवन नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड बार काउंसिल के 2026 के चुनाव परिणाम आने के बाद कई नए सवाल खड़े हो गए हैं, जिनकी आशंका मैंने पहले भी व्यक्त कर दी थी। विगत 38 वर्षों से अधिवक्ता होने एवं बार एसोसिएशन का सचिव होने के कारण नवनिर्वाचित काउंसिल के सम्मानित सदस्यों व काउंसिल के समक्ष मैं निम्न सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूं। मेरी अन्य अधिवक्ता साथियों से भी प्रार्थना है कि वह अपने सुझाव अवश्य काउंसिल तक भेजें ताकि भविष्य में यथा संभव उन पर कार्रवाई हो सके। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री नौटियाल के कुछ महत्वपूर्ण सुझाव –
1 – वर्तमान चुनाव परिणाम में उत्तराखंड के दूरस्थ दुर्गम पर्वतीय जनपदों उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत व पिथौरागढ़ में कार्यरत एक भी अधिवक्ता निर्वाचित होने में सफल नहीं हो पाया। यहां वोट भी कम था और विभाजन भी अधिक । यह पर्वतीय राज्य के लिए सर्वाधिक चिंतनीय है।
2 – बार काउंसिल के वर्तमान चुनाव में पांच सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थी ताकि वह भी काउंसिल में प्रतिनिधित्व कर सकें जो स्वागत योग्य है।
3- काउंसिल में प्रतिवर्ष दो अधिवक्ताओं का मनोनयन होना है। इसके लिए काउंसिल से आग्रह है कि प्रतिवर्ष एक-एक अधिवक्ता को गढ़वाल व कुमाऊं मंडल से नैनीताल, उधम सिंह नगर ,देहरादून और हरिद्वार जनपदों को छोड़कर मनोनीत किया जाए 5 वर्ष में प्रत्येक जनपद से काउंसिल में प्रतिनिधित्व मिल पाएगा।
4 – उत्तराखंड बार काउंसिल का कैंप कार्यालय गैरसैंण में खोला जाए।
5 – काउंसिल की बैठक प्रदेश के बाहर होने के साथ ही पर्वतीय जनपदों में भी पूरे कार्यकाल के दौरान हो।
6 – बार काउंसिल के चुनाव 5 वर्ष की समाप्ति पर निश्चित रूप से हो ।
7 – पर्वतीय राज्य की बार काउंसिल के आगामी चुनाव के लिए निम्न आरक्षण की व्यवस्था पर विचार किया जाए –
क ) जनपद अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर (कुमाऊँ मंडल) प्रत्येक जनपद से एक सीट सामान्य और इन सभी जनपदों से एक सीट महिला के लिए आरक्षित।
ख) जनपद उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली (गढ़वाल मंडल) प्रत्येक जनपद से एक सीट सामान्य के लिए और इन सभी जनपदों से एक सीट महिला के लिए आरक्षित।
ग ) जनपद नैनीताल, उधम सिंह नगर, देहरादून, हरिद्वार, 9 सीट सामान्य और तीन सीट महिला के लिए इन सभी जनपदों से आरक्षित हों। इस तरह से 23 सीटों पर चुनाव करने से पूरे उत्तराखंड राज्य के प्रत्येक जनपद को प्रत्येक क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिल पाएगा और उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की भावनाओं का आदर हो पाएगा।
