नया भारत : मोदी और मैक्रों के बीच ऐतिहासिक 116 राफेल डील के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में सहयोग और पिनाक के संभावित सौदे पर केन्द्रित, विदेशी हिंसक कबीलों का पिछलग्गू बनाने वाले मदरसों व आंग्ल स्कूलों की जगह आत्मनिर्भर भारतीय बनाने वाली गुरूकुल शिक्षा व्यवस्था लागू कब करोगे सरकार!!, आज का पंचाग आप का राशिफल

मुंबई: फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी भारत यात्रा के दौरान आज मुंबई पहुंचे। यहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की मुंबई में राष्ट्रपति मैक्रों के साथ व्यापक बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘ये बैठक इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमने भारत-फ्रांस के संबंधों को एक विशेष वैश्विक सामरिक साझेदारी में बढ़ाया है। हमारी वैश्विक स्थिरता और प्रगति के लिए एक साझेदारी है। हमने उद्योग, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष और उभरती प्रौद्योगिकी में सहयोग पर चर्चा की। हमारे देश स्टार्टअप और एमएसएमई के बीच मजबूत नेटवर्क का निर्माण करेंगे, छात्रों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान की सुविधा देंगे और नए संयुक्त नवाचार केंद्र स्थापित करेंगे’ मैक्रों का यह चौथा भारत दौरा है।

​मुख्य बातें:

​विशेष फोकस: दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य आधार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में सहयोग और राफेल लड़ाकू विमान के संभावित सौदे पर रहा।

​साझेदारी: मोदी और मैक्रों ने भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी की प्रगति और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

​अटूट रिश्ता: पीएम मोदी ने मैक्रों के मुंबई दौरे पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत के साथ फ्रांस की एकजुटता को दर्शाता है।

​दोनों देशों ने आने वाले समय में तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम करने का संकल्प लिया है।

🚩 क्या भारत में फिर से गुरुकुल की परंपरा लौटनी चाहिए? एक गंभीर आत्ममंथन 🚩

हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आई एक सर्वे रिपोर्ट ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को तेज़ कर दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में हिंदू समाज यह मानने लगा है कि भारत के भविष्य को मजबूत और संतुलित बनाने के लिए प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति की ओर लौटना आवश्यक है। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि उस मानसिक बदलाव का संकेत है जो धीरे-धीरे समाज में आकार ले रहा है। लोग अब केवल आधुनिक डिग्रियों और अंकों की दौड़ से संतुष्ट नहीं दिखते, बल्कि शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर प्रश्न उठा रहे हैं।

आज की शिक्षा व्यवस्था पर यदि निष्पक्ष दृष्टि से विचार किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा का अर्थ काफी हद तक सीमित हो गया है। अधिकांशतः इसे नौकरी पाने, परीक्षा पास करने और आर्थिक स्थिरता हासिल करने का माध्यम माना जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि रोज़गार और आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण हैं, लेकिन क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल यहीं तक सीमित होना चाहिए? यही वह प्रश्न है जो गुरुकुल पद्धति को लेकर चर्चा को फिर से प्रासंगिक बना रहा है।

गुरुकुल शिक्षा प्रणाली केवल पाठ्यक्रम आधारित नहीं थी। यह जीवन को संपूर्ण रूप से समझने और जीने की कला सिखाती थी। विद्यार्थी गुरु के सान्निध्य में रहकर न केवल शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करता था, बल्कि व्यवहार, अनुशासन, आत्मसंयम और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी सीखता था। शिक्षा और संस्कार एक-दूसरे से अलग नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे के पूरक थे। यही कारण है कि उस दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्वान बनाना नहीं, बल्कि चरित्रवान नागरिक तैयार करना था।

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, जिसे अक्सर मैकाले की प्रणाली से जोड़ा जाता है, ने ज्ञान को किताबों और परीक्षाओं तक सीमित कर दिया। इससे तकनीकी और प्रशासनिक दक्षता तो बढ़ी, लेकिन नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और आत्मिक संतुलन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप आज हम एक ऐसे समाज को देख रहे हैं जहाँ प्रतिभा तो है, लेकिन दिशा को लेकर भ्रम भी है। इसी संदर्भ में गुरुकुल को केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

गुरुकुल की सबसे बड़ी विशेषता उसका संस्कार आधारित ढांचा था। वहाँ ज्ञान के साथ-साथ बड़ों के प्रति सम्मान, समाज के प्रति कर्तव्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता सिखाई जाती थी। शिक्षा का वातावरण केवल चार दीवारों तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रकृति के सान्निध्य में विकसित होता था। विद्यार्थी पेड़ों, नदियों और खुले आकाश के बीच सीखते थे, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास संतुलित रूप से होता था। यह जुड़ाव उन्हें प्रकृति का उपभोगकर्ता नहीं, बल्कि उसका रक्षक बनाता था।

आत्मनिर्भरता भी गुरुकुल शिक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ थी। वहाँ शिक्षा केवल बौद्धिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी होती थी। विद्यार्थी जीवनोपयोगी कौशल सीखते थे, जिससे वे समाज में अपने स्थान को आत्मसम्मान के साथ बना सकें। शस्त्र और शास्त्र, दोनों का संतुलन उन्हें न केवल विद्वान, बल्कि साहसी और जिम्मेदार बनाता था। आज जब आत्मनिर्भर भारत की बात की जाती है, तो गुरुकुल की यह विशेषता और भी प्रासंगिक प्रतीत होती है।

अनुशासन गुरुकुल जीवन की आत्मा था। यह अनुशासन भय पर आधारित नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण से जुड़ा हुआ था। गुरु और शिष्य के बीच का संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि पारिवारिक और मार्गदर्शक स्वरूप का होता था। इसी अनुशासन ने साधारण बालकों को असाधारण व्यक्तित्व में ढालने की क्षमता दिखाई। इतिहास में अनेक ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहाँ गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी।

आज जब लोग यह कल्पना करते हैं कि बच्चे दिन की शुरुआत मंत्रोच्चार, योग और ध्यान से करें, तो यह केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और संतुलन की बात भी है। ऐसे अभ्यास बच्चों को एकाग्रता, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति प्रदान कर सकते हैं। यदि शिक्षा प्रणाली बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने में सफल होती है, तो उनमें स्वाभाविक रूप से आत्मगौरव और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

गुरुकुल की वापसी की बात केवल शिक्षा में बदलाव तक सीमित नहीं है। यह एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर संकेत करती है। आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। गुरुकुल प्रणाली को ज्यों का त्यों लागू करना शायद व्यावहारिक न हो, लेकिन उसके मूल सिद्धांतों को आधुनिक शिक्षा में समाहित करना एक सार्थक कदम हो सकता है। इससे शिक्षा अधिक मानवीय, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बन सकती है।

यह चर्चा किसी एक वर्ग या विचारधारा तक सीमित नहीं है। यह उस सामूहिक सोच को दर्शाती है जो भारत को केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक नेतृत्व के रूप में देखना चाहती है। यदि समाज का एक बड़ा हिस्सा यह मानने लगा है कि शिक्षा को अपनी जड़ों से जोड़ना आवश्यक है, तो इस पर गंभीर संवाद और नीति-स्तर पर विचार होना चाहिए।

अंततः यह निर्णय समाज और राष्ट्र को मिलकर लेना होगा कि वह किस तरह की शिक्षा अपने बच्चों को देना चाहता है। केवल वर्तमान की जरूरतों को देखकर नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखकर। गुरुकुल की चर्चा हमें यही याद दिलाती है कि शिक्षा केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। अभी तक तो अरबी कबीलों का पिछलग्गू बनाने के लिए लाखों मदरसे हैं वैटिकन कबीलों के पिछलग्गू बनाने के लिए लाखों कान्वेंट स्कूल हैं लेकिन भारतीय बनाने वाले गुरूकुल नहीं हैं तो मदरसों और आंग्ल स्कूलों की जगह आत्मनिर्भर गुरूकुल व्यवस्था लागू कब करोगे सरकार!! हां सचमुच मोदी सरकार को यूजीसी की जगह यूसीसी और गुरूकुल शिक्षा और गोशाला शोध कार्य करना चाहिए। 

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य राजनीतिक टिप्पणी और सार्वजनिक घटनाओं पर आधारित है।

*द्वैपायनोक्तं सुविचार्य येन*

 *स्वदन्तकोट्या निखिलं लिखित्वा।*

*दन्तं पुराणं सुतमिन्दुमौलै -*

 *स्तमग्रयरूपं मनसा स्मरामि।।*

*वाचां निमित्तं शह्यनिमित्तमाद्यं*

  *पदं त्रिलोक्यां निखिलस्तुतीनाम्।*

*सर्वैश्च वन्द्यो न च तस्य वन्द्य:*

 *स्थाणो: परं रूपमसौ स पायात्।।*

*जिन्होंने महर्षि व्यास द्वारा कहे गए पुराण को भली भांति विचार करके अपने दांत की नोक से पूर्ण रूप से लिखकर प्रदान किया, उन शशिशेखर भगवान् शिव के पुत्र, आदिरूप गणेश का मैं चित्त में स्मरण करता हूं।जो समस्त ज्ञान के मूल कारण हैं, जिनका कोई कारण नहीं है, त्रिलोकी की समस्त स्तुतियों में जिनकी प्रथम वन्दना होती है, जो सभी के वन्द्य हैं और जो स्थाणुरूप भगवान् शंकर के ही अपर रूप हैं, वे भगवान् गणेश हमारी रक्षा करें।*

 🌺🙏*जय श्री गणेशाय नमः*🙏🌺

 🌺🙏🌺*जय माता दी*🌺🙏🌺

 🌺🙏 *महर्षि पाराशर पंचांग* 🙏🌺

 🌺🙏🌺 *अथ पंचांगम्* 🌺🙏🌺

*दिनाँक:-18/02/2026,.बुधवार*

प्रतिपदा, शुक्ल पक्ष, 

फाल्गुन दिल्ली __(समाप्ति काल)

तिथि——– प्रतिपदा 16:57:04. तक 

पक्ष————————- शुक्ल

नक्षत्र——– शतभिषा 21:15:16

योग————– शिव 22:44:14

करण————– बव 16:57:04

करण———- बालव 28:30:36

वार———————— बुधवार

माह———————- फाल्गुन

चन्द्र राशि—————— कुम्भ

सूर्य राशि—————— कुम्भ

रितु———————— शिशिर

आयन——————- उत्तरायण

संवत्सर—————— विश्वावसु

संवत्सर (उत्तर) ————-सिद्धार्थी

विक्रम संवत—————- 2082 

गुजराती संवत————– 2082 

शक संवत—————— 1947 

कलि संवत—————– 5126

दिल्ली 

सूर्योदय————— 06:58:17

सूर्यास्त—————- 18:12:02

दिन काल————- 11:13:44 

रात्री काल————- 12:45:21

चंद्रास्त—————- 19:10:02 

चंद्रोदय————— 31:19:22*

लग्न—- कुम्भ 5°10′ , 305°10′

सूर्य नक्षत्र—————— धनिष्ठा 

चन्द्र नक्षत्र————— शतभिषा

नक्षत्र पाया——————- ताम्र

*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*

सा—- शतभिषा 09:18:31

सी—- शतभिषा 15:17:41

सू—- शतभिषा 21:15:16

से—- पूर्वाभाद्रपदा 27:11:18

*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*

        ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

सूर्य= कुम्भ 05°10 , धनिष्ठा 4 गे

चन्द्र= कुम्भ 12°30 , शतभिषा 2 सा

बुध = कुम्भ 23°52 ‘ पूo भाo 1 से 

शु क्र= कुम्भ 15°05, शतभिषा 3 सी 

मंगल= मकर 25°03 ‘ धनिष्ठा 1 गा

गुरु= मिथुन 21°33 पुनर्वसु, 1 के 

शनि=मीन 06°13 ‘ उoभा o , 1 दू

राहू=(व) कुम्भ 15°30 शतभिषा, 3 सी 

केतु= (व) सिंह 15°30 पूoफाo 1 मो

*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩*

राहू काल 12:35 – 13:59 अशुभ

यम घंटा 08:23 – 09:47 अशुभ

गुली काल 11:11 – 12:35

अभिजित 12:13 – 12:58 अशुभ

दूर मुहूर्त 12:13 – 12:58 अशुभ

वर्ज्यम 27:35* – 29:10* अशुभ

प्रदोष 18:12 – 20:47 शुभ

🚩पंचक अहोरात्र अशुभ

💮चोघडिया, दिन

लाभ 06:55 – 08:20 शुभ

अमृत 08:20 – 09:44 शुभ

काल 09:44 11:09 अशुभ

शुभ 11:09 12:33 शुभ

रोग 12:33 – 13:58 अशुभ

उद्वेग 13:58 – 15:22 अशुभ

चर 15:22 16:47 शुभ

लाभ 16:47 18:11 शुभ

🚩चोघडिया, रात

उद्वेग 18:11 – 19:47 अशुभ

शुभ 19:47 – 21:22 शुभ

अमृत 21:22 – 22:57 शुभ

चर 22:57 – 24:33* शुभ

रोग 24:33* – 26:08* अशुभ

काल 26:08* – 27:44* अशुभ

लाभ 27:44* – 29:19* शुभ

उद्वेग 29:19* – 30:54* अशुभ

*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩* 

मकर > 04:38 से 06:34 तक

कुम्भ > 06:34 से 08:14 तक

मीन > 08:14 से 09:38 तक

मेष > 09:38 से 11:14 तक     

वृषभ > 11:14 से 13:12 तक

मिथुन > 13:12 से 16:38 तक

कर्क > 16:38 से 17:48 तक

सिंह > 17:48 से 19:54 तक

कन्या > 19:54 से 22:14 तक

तुला > 22:14 से 00:36 तक

वृश्चिक > 00:36 से 02:40 तक

धनु > 02:40 से 04:36 तक

*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। 

प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 

चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।

शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥

रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।

अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥

अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।

उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।

शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।

लाभ में व्यापार करें ।

रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।

काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।

अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

*💮दिशा शूल ज्ञान————- उत्तर*

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l

इस मंत्र का उच्चारण करें-:

*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*

*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*

*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*

*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*

*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*

*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*

*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

  1 + 4 + 1 = 6 ÷ 4 = 2 शेष

 पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

सूर्य ग्रह मुखहुति

*💮 शिव वास एवं फल -:*

   1 + 1 + 5 = 7 ÷ 7 = 0 शेष

शमशान वास = मृत्यु कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*

*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*

 *वसंत ऋतु प्रारंभ 

*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*

एकमेवाक्षरं यस्तु गुरुः शिष्यं प्रबोधयेत् ।

पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद् दत्त्वा चानृणी भवेत् ।।

।।चाoनीo।।

   इस दुनिया में वह खजाना नहीं है जो आपको आपके सदगुरु ने ज्ञान का एक अक्षर दिया उसके कर्जे से मुक्त कर सके.

*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*

गीता -: ज्ञानकर्मसन्यासयोग अo-4

तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः।

 छित्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत॥

इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू हृदय में स्थित इस अज्ञानजनित अपने संशय का विवेकज्ञान रूप तलवार द्वारा छेदन करके समत्वरूप कर्मयोग में स्थित हो जा और युद्ध के लिए खड़ा हो जा ॥42॥

*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।

नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।

विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।

जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष

नौकरी में प्रमोशन व प्रशंसा मिल सकते हैं। नवीन वस्त्राभूषण पर व्यय होगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। लॉटरी व सट्टे के चक्कर में न पड़ें। बेरोजगारी दूर होने के योग हैं। प्रयास करें। किसी बड़ी समस्या से छुटकारा मिलेगा। अज्ञात भय रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। जल्दबाजी न करें।

🐂वृष

लेन-देन में सावधानी रखें। धनहानि के योग हैं। आय बनी रहेगी। व्यवसाय में ध्यान दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से हानि होगी। पुरानी व्याधि उठ सकती है। सावधानी आवश्यक है। क्रोध न करें। किसी भी निर्णय के लेने में जल्दबाजी न करें। विवेक से कार्य करें।

👫मिथुन

उत्साह बना रहेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त होगा। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। बेचैनी रहेगी। थकान महसूस होगी। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। कोई भी निर्णय सोच-समझकर करें। जल्दबाजी न करें। मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। मान-सम्मान मिलेगा।

🦀कर्क

दौड़धूप अधिक होगी। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव रहेंगे। नौकरी में कार्यभार बढ़ेगा। आय में कमी रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। कार्य की गति रुकेगी। शोक समाचार मिल सकता है। कानूनी अड़चन आ सकती है। विवाद को बढ़ावा न दें।

🐅सिंह

रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। पठन-पाठन व लेखन में मन लगेगा। वस्तुएं संभालकर रखें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय बनी रहेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। यात्रा मनोरंजक रहेगी। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा।

🙍‍♀️कन्या

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कोर्ट व कचहरी के काम बनेंगे। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। काफी समय से अटके काम पूरे होंगे। आय में वृद्धि होगी। वरिष्ठ वक्तियों का मार्गदर्शन मिल सकता है। आने-जाने में दुर्घटना का भय रहेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें।

⚖️तुला

उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। आय बनी रहेगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। व्यवसाय लाभदायक रहेगा। प्रसन्नता रहेगी। विवाद के मौके टालें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। वरिष्ठ मार्गदर्शन करेंगे। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी।

🦂वृश्चिक

स्थायी संपत्ति में वृद्धि के योग हैं। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। पार्टनरों से मतभेद दूर होंगे। शत्रु मौका ढूंढेंगे, सावधान रहें। ऐश्वर्य के साधनों पर व्यय होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। दुकान, फैक्टरी व शोरूम इत्यादि की प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे।

🏹धनु

प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। किसी बड़े काम के होने से प्रसन्नता रहेगी। मातहत साथ देंगे। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। काफी समय से अटके कामों में गति आएगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। भाग्य का साथ रहेगा। आर्थिक नीति में परिवर्तन संभव है। तत्काल लाभ नहीं होगा।

🐊मकर

सामंजस्य बैठाएं। आय में निश्चितता रहेगी। किसी बाहरी व्यक्ति का सहयोग मिलेगा। जल्दबाजी व लापरवाही से बड़ी हानि हो सकती है। विवाद को बढ़ावा न दें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। बनते काम में विघ्न उत्पन्न होगा। तनाव रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। घर-बाहर अशांति रहेगी।

🍯कुंभ

व्यापार में लाभ बढ़ेगा। नौकरी मनोनुकूल रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। अध्यात्म में रुचि रहेगी। सत्संग का लाभ मिलेगा। प्रतिद्वंद्वी घुटने टेकेंगे। जल्दबाजी में लेनदेन नहीं करें। कानूनी अड़चन दूर होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वाणी पर नियंत्रण रखें। तनाव रहेगा। घर में सुख-शांति रहेगी।

🐟मीन

नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। उत्साह तथा प्रसन्नता में वृद्धि होगी। यात्रा लाभदायक रहेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। निवेश शुभ रहेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। कारोबार में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

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