#प्राथमिक #स्वास्थ्य #केंद्र #गौचर का 30 शैय्यायुक्त #सामुदायिक #स्वास्थ्य #केंद्र के रूप में उच्चीकरण क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस #जनकल्याणकारी निर्णय के लिए माननीय #मुख्यमंत्री जी एवं माननीय #स्वास्थ्य #मंत्री जी का समस्त क्षेत्रवासियों की ओर से हृदय से आभार एवं #धन्यवाद🙏
इस चिकित्सा केंद्र के उच्चीकरण से स्थानीय जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी तथा चिकित्सा व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी।
फुल गारंटी के बिना कोई बात नहीं, ईरान ने अमेरिका और इजरायल की नाक में तो दम कर ही रखा है, लेकिन अब उसके अपने पड़ोसियों का भी सब्र पूरी तरह से टूट चुका है. अकूत दौलत और तेल के कुओं पर बैठे अरब देश खासकर सऊदी अरब और UAE अब कूटनीति की मीठी-मीठी बातों से बाहर आ गए हैं और उन्होंने ईरान की गिरेबान पर हाथ डाल दिया है.
एक ओर ईरान जंग खत्म कराने पर पाकिस्तान में अरब देशों की मीटिंग चल रही है. इसी बीच ईरान के जानी दुश्मन सऊदी अरब और यूएई ने तीन शर्तें रख दी हैं. यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गश ने कहा, हमने जंग खत्म करने के लिए 3 शर्तें रखी हैं. ईरान को इसे मानन ही पड़ेगा.
गर्गश ने कहा कि ईरान ने अपने पड़ोसियों को धोखा दिया है. हम टेबल पर बैठकर शांति से चाय पी रहे थे, और टेबल के नीचे ईरान अपने प्रॉक्सी गुटों जैसे यमन के हूती विद्रोही को हथियार सप्लाई कर रहा था. सऊदी अरब और खाड़ी देशों की पहली कंडीशन यही है कि ईरान का यह दोमुंहापन अब नहीं चलेगा. अरब देशों ने युद्ध टालने की पूरी और सच्ची कोशिश की, लेकिन ईरान की नीयत में खोट था. उसकी आक्रामकता पहले से ही प्री-प्लान्ड थी.
नुकसान किया है, तो बिल भी तुम ही भरोगे
सऊदी अरब और UAE ने साफ कर दिया है कि भविष्य में कोई भी राजनीतिक समझौता तब तक नहीं होगा, जब तक ईरान उनके नागरिकों और तेल रिफाइनरियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों का मुआवजा नहीं देता. याद कीजिए जब हूतियों ने सऊदी अरब की अरामको तेल रिफाइनरी और UAE के अबु धाबी पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे. अरब देश जानते हैं कि वो मिसाइलें और ड्रोन तेहरान से ही आए थे. अब सऊदी और UAE ने साफ कर दिया है कि “तुमने हमारे शीशे तोड़े हैं, तो अब पैसे भी तुम ही दोगे.
‘फुल गारंटी’ के बिना कोई बात नहीं
सऊदी अरब की कंडीशन बहुत स्पष्ट है… अब कोई मौखिक वादा या आधी-अधूरी संधि नहीं चलेगी. गर्गश ने जिस स्पष्ट गारंटी और नॉन एग्रेशन के सिद्धांत की बात की है, उसका सीधा मतलब है- ‘लिखित और पुख्ता गारंटी’. सऊदी अरब और UAE अब यह मानने को तैयार नहीं हैं कि ईरान एक तरफ तो शांति समझौता करे और दूसरी तरफ इराक, सीरिया और यमन में बैठे अपने गुर्गों से अरब देशों पर हमले करवाता रहे. उन्हें एक ऐसा मैकेनिज्म चाहिए जो भविष्य में ईरान को किसी भी हिमाकत से रोक सके.
अरब खाड़ी के लिए सबसे बड़ा ‘कैंसर’ है ईरान
गर्गश ने कूटनीतिक लिहाज छोड़ते हुए ईरान के मौजूदा शासन को अरब खाड़ी की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा घोषित कर दिया है. यह इस बात का सबूत है कि चीन की मध्यस्थता में सऊदी अरब और ईरान के बीच जो दोस्ती का दिखावा शुरू हुआ था, उसकी हवा निकल चुकी है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद को यह समझ आ गया है कि जब तक ईरान में कट्टरपंथी अयातुल्लाओं का राज है, तब तक खाड़ी में कभी शांति नहीं आ सकती.
अब गेंद ईरान के पाले में है
खाड़ी देशों ने ईरान को दीवार की तरफ धकेल दिया है. उनकी कंडीशन साफ है कि अपनी हद में रहो, हमारे ऊपर किए गए हमलों का हर्जाना भरो और इस बात की गारंटी दो कि तुम्हारे पाले हुए आतंकी गुट हमारे देशों की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखेंगे. अगर ईरान ये शर्तें नहीं मानता है, तो इसका सीधा मतलब है कि सऊदी अरब और UAE उसे कूटनीतिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने और शायद इजरायल या अमेरिका के किसी कड़े एक्शन का मौन समर्थन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे.
ईरान के पक्षधर सिर्फ एक प्रश्न का जवाब दें, मान लो 1000 हमले इजरायल पर हुए हैं और 1000 कुवैत, कतर सऊदी अरब, UAE par, अगर इन देशों को छोड़ कर सारे हमले इजरायल पर होते तो इजरायल का मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैंग हो जाता। पर सुन्नियों से नफरत ईरानियों के खून में है। अरबों के इकोनॉमिक डेवलपमेंट से जलता है, इसलिए डाटा चेक करो इजरायल से ज्यादा हमले अरब(सारे देशों को मिला कर) देशों पर हुए हैं। हुती को इजरायल नहीं सऊदी अरब के खिलाफ ईरान ने खड़ा किया था। #नमक_हराम यह हैं मुस्लिम स्टूडेंट तेहरान से MBBS कर रही हैं, सबको मालूम है कि युद्ध का केंद्र तेहरान है…28 फरवरी से कल तक बेहद विषम परिस्थितियों में भारत सरकार ने 1700 मुस्लिम,विशेषतः मेडिकल स्टूडेंट्स, को ईरान से निकाला है…
तेहरान स्थित भारतीय एम्बेसी 24 घँटे काम मे लगी है…सैकड़ों भारतीय खास तौर से मुस्लिम स्टूडेंट्स हफ्तों से एम्बेसी में रह रहे हैं,निःशुल्क खाना पीना, सोना… स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति की देखभाल भी भारतीय एम्बेसी ही कर रही है….
चूंकि तेहरान हवाई अड्डा #खत्म है, सुम्बुल को 12 घँटे की एम्बेसी के खर्चे से यात्रा कराकर सबा नामक स्थान पर भेजा जाता है,फिर सीमा पार करा अजरबैजान भेजा जाता है…वहां से फ्लाइट पकड़ कर इन स्टूडेंट्स को दिल्ली की फ्लाइट में बैठाया जाता है….
भारत के अलावा किसी अन्य देश का अपने स्टूडेंट्स के लिए स्थानीय एम्बेसी,ईरान सरकार और दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय के सहयोग से भारत जैसा इतना बड़ा और निहायत खतरनाक Evacuation programme नही चलाया जा रहा है… मगर फ्लाइट् से उतरते ही भारत सरकार की आलोचना शुरू हो गई
“#हमे इतनी देर से क्यों निकाला “…
” #भारत मे अच्छे मेडिकल कालेज होते तो हम ईरान क्यों जाते ?”…..
“#अब हम ईरान फिर से नहीं जाना चाहते,हमे किसी सरकारी कालेज में एडमिशन देकर हमारा MBBS पूरा कराया जाए “…
सब कुछ हांसिल करने के बाद,सुरक्षित भारत सरकार के खर्चे पर दिल्ली स्थित घर पहुचने के बाद सिर्फ अल्लाह का शुक्रिया करना है…. भारत सरकार में कमियां ही कमियां ढूढ़ना है,सिर्फ आलोचना करनी है !
(इधर दिल्ली के उत्तम नगर में “भारत माता की जय”…. लगाने वाले लोग…लाठी खाकर… जेलों में पड़े हैं)
हमने सदैव कहा है जिसका आप जितना ज्यादा तुष्टिकरण करेंगे….वह उतना ही भस्मासुर बनेगा…. हमेशा की तरह ईरान-खाड़ी देशों से बचाकर लाये… भारत सरकार के खर्चे और मदद पर VIP यात्रा करके लौटे लोग…. यही साबित करते हैं…
की ये कोम नमक हराम कोम है।(साभार-शोशल मीडिया संग्रह)
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। स्पेशल सेल की टीम ने लश्कर-ए-तैयबा के ‘मोस्ट वांटेड’ कमांडर शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा कश्मीरी को एक महीने लंबे ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी रविवार रात गाजीपुर इलाके में की गई, जहां पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त टीम ने उसे दबोचा।
जांच में सामने आया है कि लोन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर काम कर रहा था और उसने बांग्लादेश में लश्कर का एक सक्रिय मॉड्यूल तैयार किया था। इस नेटवर्क का मकसद भारतीय और बांग्लादेशी युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करना था।
