ईरान एक इस्लामिक आतंकी देश है हमास हूती हिजबुल्लाह आईआरजीसी सब एक ही है ईरान के ही हैं। इस्लामिक जिहाद के माध्यम से तीन करोड़ पर्शियनों को मार कर पर्शिया को ईरान जैसा ईस्लामिक देश बना दिया। सोचो ईरान के पास प्रमाणु बम काहे होने चाहिए?
आज जहां अमेरिका व इस्त्राइल केवल रणनीतिक अटैक कर रहे हैं, वहीं ईरान दूसरे देशों में मानव बस्तियों और खाद्य श्रृंखलाओं व तेल पानी के मानव निर्मित प्लांटों पर बमबारी कर के पूरे संसार को आर्थिक व प्रमाणु खतरे में डाल रहा है। समुद्र के व्यापारिक मार्ग पर कब्जा किये बैठा है। ये किसे नहीं दिख रहा है? आज ईरानी सोच और ईरान का भूगत मिसाइल जखीरा समूची मानवता के लिए खतरा नहीं है!! फिर भी बामपंथी रूस व चीन भी आतंकी ईरान के साथ खड़े काहे हैं? यानी इस्लामिक आतंकवाद और बामपंथियों की सोच एक ही है?
भारत में भी इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा कश्मीर आदि में करोडों का चंदा एकत्र होना, मुस्लिम लीग सैक्यूलरों और बामपंथियों द्वारा ईरान के राष्ट्रपति खुमैनी को अब्बा मान कर भारत में विधवा रूदन काहे दिख रहा? आज संसार की शांति और ईस्लामिक आतंक से मानव जीवन को बचाने की लड़ाई अमेरिका और इस्राइल लड़ रहे हैं, भारत को उनका परोक्ष साथ देना चाहिए! ईरानी सोच और ईरान का भूगत मिसाइल जखीरा समूची मानवता के लिए खतरा नहीं है!! आज गाजा के पास खाने रहने का ठिकाना नहीं है लेकिन हथियारों का जखीरा और जनसंख्या विस्फोट पूरा है, ऐसे में भारत द्वारा लड़ा गया आपरेशन सिंदूर जैसा हाईटेक युद्ध केवल चौबीस मिनट में पाकिस्तान की सैन्य युध्द क्षमता समाप्त कर दी और युद्ध लंबा खिंचा भी नहीं वो याद रखा जाना चाहिए। 🇮🇳🎪✍️ हरीश मैखुरी
याद है जब प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को रोका, तो देश जैसे दो हिस्सों में बंट गया था।
एक तरफ विरोधी थे — जो लगातार आरोप लगा रहे थे कि “मोदी झुक गए… अमेरिका के दबाव में आ गए… सरेंडर मोदी!”
दूसरी तरफ उनके समर्थक थे — जिनका खून खौल रहा था। उनका मानना था कि “अब तो पाकिस्तान को पूरी तरह तोड़ देना चाहिए था, ताकि वो दोबारा आंख उठाने की हिम्मत न करे।”
लेकिन आज दुनिया में जो हालात बन रहे हैं, उन्होंने उस फैसले की असली वजह साफ कर दी है।
अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया — और ये सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि एक ऐसा प्रहार था जिसने उसके नेतृत्व, उसके शहरों और उसकी अर्थव्यवस्था तक को हिला कर रख दिया।
पर नतीजा क्या निकला? ईरान अब डर नहीं रहा। उसे अब बर्बादी का डर नहीं है, क्योंकि वो पहले ही उस सीमा को पार कर चुका है जहां खोने के लिए बहुत कुछ बचा ही नहीं।
यहीं पर मोदी का फैसला समझ आता है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को ऐसी चोट दी थी कि वो संभल नहीं पा रहा था। उसके एयरबेस तबाह हो चुके थे, उसकी रणनीति कमजोर पड़ चुकी थी, और वो जवाब देने की हालत में नहीं था।
अगर भारत उस वक्त और आगे बढ़ता, तो शायद पाकिस्तान भी उसी मोड़ पर पहुंच जाता जहां आज ईरान खड़ा है।
और याद रखिए — जब दुश्मन के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचता, तब वो सबसे ज्यादा खतरनाक हो जाता है।
मोदी ने युद्ध जीतकर रोका, डरकर नहीं। उन्होंने पाकिस्तान को सबक भी सिखाया और उसे उस हद तक नहीं धकेला जहां से वापसी नामुमकिन हो जाती।
क्योंकि असली नेतृत्व वही होता है जो सिर्फ युद्ध जीतना नहीं जानता, बल्कि यह भी जानता है कि कब रुकना जरूरी है।
आज अमेरिका खुद युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन परिस्थितियों में ऐसा फंस चुका है कि निकलना आसान नहीं है।
और यही सबसे बड़ी सच्चाई है — युद्ध शुरू करना आपके हाथ में होता है, लेकिन उसे खत्म करना हमेशा आपके नियंत्रण में नहीं होता। 🔥
देशभर में जासूसी नेटवर्क चलाने वाले गिरोहों के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद एक से एक चौंकाने वाली नई जानकारी सामने आ रही हैं। पाकिस्तानी आकाओं से भारत में बैठे गुर्गे सनातन वेशभूषा की आड़ में जासूसी व रेकी कर देश विरोधी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।
हिंदू किए हुए थे नाम
पाकिस्तान में बैठे सभी आका मुस्लिम है लेकिन, उन्होंने पकड़े जाने के डर व नजर में आने से बचने के लिए अपने नाम हिंदू किए हुए थे। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि गिरोह के जासूसी करने वालों में पकड़े गए सुहेल उर्फ रोमियो, नौशाद उर्फ लालू, समीर उर्फ शूटर, ईरम उर्फ महक किए हुए हैं।इनमें सुहेल कलावा बांधता है और गले में रुद्राक्ष धारण करने के साथ टीका लगाता है। जबकि नौशाद और समीर हाथ में कलावा बांधते हैं। शक व नजर में आने से बचने के लिए आरोपितों ने जासूसी के लिए हिंदू युवा व नाबालिगों को चुना था।
पकड़े जा चुके 18 आरोपी
पुलिस मामले में अब तक 18 आरोपियों को पकड़ चुकी है। इनमें सुहेल मलिक उर्फ रोमियो, साने इरम उर्फ महक, प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि, रितिक गंगवार, गणेश, विवेक, गगन कुमार प्रजापति, दुर्गेश, नौशाद अली उर्फ लालू, मीरा ठाकुर हैं।
इनके अलावा छह नाबालिग भी शामिल हैं। जासूसी के साथ अब एजेंसियां लव जिहाद के बिंदु पर भी जांच कर रही है। अंदेशा है कि आरोपियों ने अपने नाम केवल जासूसी के लिए ही नहीं बदले बल्कि इसके पीछे लव जिहाद भी मकसद हो सकता है।
वीओआईपी से आका जुड़े हैं संपर्क में
पाकिस्तानी आकाओं की लोकेशन अभी तक पाकिस्तान, मलेशिया, दुबई, यूके, नेपाल, कनाडा समेत अन्य देशों की आ चुकी है। जांच में पता चला है कि सभी आका भारतीय सिम का इस्तेमाल कर रहे हैं और कालिंग के लिए वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीआआईपी) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी जरिये वह अपनी लोकेशन किसी भी स्थान की दिखा सकते हैं और कालिंग करने वाले नंबर को बदल सकते हैं।
भारत के मुसलमानों ने दान दिया अंब, तक !
1962 के चीन युद्ध में =0
1965 के पाकिस्तान युद्धमें=0
1971 के पाकिस्तान युद्धमें =0
1999 पावकिस्तान कारगिल युद्धमें = 0
2026 के अमेरिका इरान युद्धमें इरान के 600 करोड़
और मजे की बात फिर बोलते हैं। हमारी कौम को शक की नजरिए से देखा जाता है।🙏
