भारत तो उपनामों का समंदर है अनगिनत उपनाम हैं जिन्हें जाति बता कर बांटा गया हिन्दूओं को परस्पर बांटने वाली जाति व्यवस्था संविधान में है शास्त्रों में नहीं, आज का पंचाग आप का राशिफल

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 *श्री हरिहरौ**विजयतेतराम*

  *सुप्रभातम* *आज का पञ्चाङ्ग*

   *_मंगलवार, १० फरवरी २०२६_*

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सूर्योदय: 🌄 ०७:११, सूर्यास्त: 🌅 ०६:११

चन्द्रोदय: 🌝 २६:१६, चन्द्रास्त: 🌜११:३६

अयन 🌘 उत्तरायणे(दक्षिण गोले)

ऋतु: 🏔️ शिशिर

शक सम्वत:👉१९४७(विश्वावसु)

विक्रम सम्वत:👉२०८२(सिद्धार्थी

मास 👉 फाल्गुन, पक्ष 👉 कृष्ण

तिथि 👉 अष्टमी (०७:२७से नवमी)

नक्षत्र 👉 विशाखा (०७:५५ से अनुराधा)

योग👉ध्रुव (२५:४२ से व्याघात)

प्रथम करण👉कौलव(०७:२७तक

द्वितीय करण 👉 तैतिल (२०:४३ तक)

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॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗

सूर्य 🌟 मकर, चंद्र 🌟 वृश्चिक 

मंगल🌟मकर(अस्त,पश्चिम,मार्गी)

बुध🌟कुम्भ (अस्त , पूर्व, मार्गी )

गुरु🌟मिथुन (उदित, पूर्व, वक्री)

शुक्र 🌟 कुम्भ (उदित, पश्चिम, मार्गी)

शनि 🌟 मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)

राहु 🌟 कुम्भ, केतु 🌟 सिंह

शुभाशुभ मुहूर्त विचार⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳

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अभिजित मुहूर्त 👉 १२:०९ से १२:५३

अमृत काल 👉 २३:१२ से २४:५९

विजय मुहूर्त 👉 १४:२१ से १५:०५

गोधूलि मुहूर्त 👉 १७:५९ से १८:२५

सायाह्न सन्ध्या 👉 १८:०१ से १९:१९

निशिता मुहूर्त 👉 २४:०५ से २४:५७

राहुकाल 👉 १५:१६ से १६:३९

राहुवास 👉 पश्चिम

यमगण्ड 👉 ०९:४६ से ११:०९

दुर्मुहूर्त 👉 ०९:१३ से ०९:५७

होमाहुति 👉 गुरु (०७:५५ से राहु)

दिशा शूल 👉 उत्तर

अग्निवास 👉 पृथ्वी, चन्द्र वास 👉 उत्तर

शिववास 👉 गौरी के साथ (०७:२७ से सभा में)

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☄चौघड़िया विचार☄〰️〰️〰️〰️〰️〰️

॥ दिन का चौघड़िया ॥ 

१ – रोग २ – उद्वेग, ३ – चर ४ – लाभ

५ – अमृत ६ – काल, ७ – शुभ ८ – रोग

॥रात्रि का चौघड़िया॥ 

१ – काल २ – लाभ, ३ – उद्वेग ४ – शुभ

५ – अमृत ६ – चर, ७ – रोग ८ – काल

नोट👉 दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 

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शुभ यात्रा दिशा🚌🚈🚗⛵🛫

उत्तर-पश्चिम (धनिया अथवा दलिया का सेवन कर यात्रा करें)

तिथि विशेष🗓🗓〰️〰️〰️〰️

शुद्ध विवाह मुहूर्त कुम्भ-मीन ल० (प्रातः ०७:५५ से १०:१७), वृष ल० (प्रातः ११:५५ से दोपहर ०१:५१), गोधुलि ल० (सायं ०६:११ से ०६:३६), तुला ल० (रात्रि १०:५७ से मध्यरात्रि ०१:१५ तक) आदि।

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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 

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आज ०७:५५ तक जन्मे शिशुओ का नाम विशाखा नक्षत्र के चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (तो) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम अनुराधा नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार (ना, नी, नू, ने) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

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उदय-लग्न मुहूर्त

मकर – २९:३२ से ०७:१३

कुम्भ – ०७:१३ से ०८:३९

मीन – ०८:३९ से १०:०३

मेष – १०:०३ से ११:३६

वृषभ – ११:३६ से १३:३१

मिथुन – १३:३१ से १५:४६

कर्क – १५:४६ से १८:०८

सिंह – १८:०८ से २०:२७

कन्या – २०:२७ से २२:४५

तुला – २२:४५ से २५:०५+

वृश्चिक – २५:०५+ से २७:२५+

धनु – २७:२५+ से २९:२८+

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पञ्चक रहित मुहूर्त

शुभ मुहूर्त – ०७:०१ से ०७:१३

रोग पञ्चक – ०७:१३ से ०७:२७

शुभ मुहूर्त – ०७:२७ से ०७:५५

मृत्यु पञ्चक – ०७:५५ से ०८:३९

अग्नि पञ्चक – ०८:३९ से १०:०३

शुभ मुहूर्त – १०:०३ से ११:३६

मृत्यु पञ्चक – ११:३६ से १३:३१

अग्नि पञ्चक – १३:३१ से १५:४६

शुभ मुहूर्त – १५:४६ से १८:०८

रज पञ्चक – १८:०८ से २०:२७

शुभ मुहूर्त – २०:२७ से २२:४५

चोर पञ्चक – २२:४५ से २५:०५+

शुभ मुहूर्त – २५:०५+ से २७:२५+

रोग पञ्चक – २७:२५+ से २९:२८+

शुभ मुहूर्त – २९:२८+ से ३१:००+

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आज का राशिफल🐐🐂💏💮🐅👩

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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

दिन के प्रारंभ में आप पूर्वाग्रह से ग्रसित रहेंगे। अपने आगे किसी की नही चलने देंगे जिस वजह से हानि संभावित रहेगी। कार्य व्यवसाय की गति भी धीमी रहेगी। घरेलू आवश्यकता पूर्ति करने में असमर्थ अनुभव करेंगे। अतिआत्मविश्वास से बचें आज आपके अधिकांश निर्णय गलत निकलेंगे। परन्तु संध्या के समय व्यवसाय में आकस्मिक वृद्धि होगी धन लाभ भी काम चलाऊ हो जाएगा। आगे की योजनाओं पर खर्च करेंगे। महिलाये आज ईर्ष्यालु प्रवृत्ति से ग्रसित रह सकती है। सामाजिक क्षेत्र पर स्वयं के कारण से हास्य के पात्र बनेंगे।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। प्रातः काल किसी योजना के पूर्ण होने से धन आगम होगा। आज दिनचर्या व्यवस्थित रहेगी कार्य भी समय से पूर्ण होंगे लेकिन यात्रा का मन बनने से आवश्यक कार्य मे बदलाव करना पड़ेगा। आर्थिक रूप से दिन शुभ रहेगा परन्तु हाथ खुला होने से ज्यादा देर टिकेगा नही। उधारी के व्यवहार ज्यादा ना बढ़ाएं अन्यथा उलझने बढ़ेंगी। सामाजिक सम्बन्ध आज दिखावा मात्र ही रहेंगे। परिवार में सुख शान्ति की अनुभूति होगी लेकिन महिला वर्ग का स्वभाव अचानक बदल सकता है सतर्क रहें। शान्ती बनाये रखने के लिए परिजनों की आवश्यकता पूर्ति करनी पड़ेगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

आज धन की प्राप्ति जितनी सुगम रहेगी खर्च भी उतनीं ही जल्दी हो जाएगा। खर्चो पर नियंत्रण ना रहने से आर्थिक उलझने बनेगी। व्यवसाय में विस्तार की योजना बनाएंगे परन्तु आज निवेश ना करें धन फंसने की संभावना अधिक है। नौकरी वाले जातक कार्यो की अधिकता से परेशान रहेंगे। आर्थिक लाभ दिन भर होता रहेगा अगर खर्च पर नियंत्रण रख सके तो यह धन आने वाले समय मे अतिउपयोगी सिद्ध होगा। घर के बुजुर्ग अथवा अधिकारी वर्ग से उचित मार्ग दर्शन मिलेगा फिर भी स्वभाव में जल्दबाजी के कारण इसका लाभ कम ही उठा पाएंगे।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

आज दिन का पूर्वार्ध व्यस्तता से भरा रहेगा। व्यवसायी एवं नौकरी वाले लोग अपूर्ण कार्य पूर्ण करने का भरपूर प्रयास करेंगे फिर भी कुछ कार्य अधूरे रह सकते है। परिश्रम की अधिकता एवं स्वास्थ्य की अनदेखी के कारण शारीरिक रूप से कमजोरी थकान रहेगी। आज आपकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा परन्तु लाभ दिलाने में सहायक नही रहेगा। हतोत्साहित ना हो आशानुकूल ना सही काम चलाने लायक लाभ अवश्य होगा। पति पत्नी अथवा किसी अन्य से गरमा गरमी हो सकती है विवेकि व्यवहार अपनाए। यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। खर्च आज सोच समझ कर ही करें।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

आज आपकी दिनचर्या आर्थिक कारणों से उथल-पुथल रहेगी। धार्मिक कार्यो में रुचि रहने पर भी एकाग्रता की कमी रहेगी कार्यो को बेमन से करने के कारण आरम्भ करने से पहले ही सफलता के प्रति आशंकित रहेंगे। आर्थिक लाभ परिश्रमानुसार अवश्य होगा परन्तु उधार के व्यवहारों के कारण बचत मुश्किल से ही कर पाएंगे। महिलाओं को भी आज गृहस्थी में तालमेल बैठाने में अधिक मशक्कत करनी पड़ेगी। पूर्व नियोजित यात्रा पर्यटन की योजना शारीरिक अथवा किसी अन्य कारण से निरस्त करनी पड़ेगी जिससे खास कर सन्ताने निराश होंगी। धर्म लाभ मिलेगा।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

आज का दिन भी शुभ फलो की प्राप्ति कराएगा। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध 

वाले स्वभाव पर अंकुश लगाएं प्रेम संबंध में खटास बनेगी। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा अन्य लोगो के आश्रित रहना पड़ेगा फिर भी जरूरत के अनुसार लाभ अवश्य हो जायेगा। किसी भी महत्त्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले एक बार लाभ हानि की समीक्षा अवश्य करें जल्दबाजी में लिए अधिकांश निर्णय गलत साबित हो सकते है। सामाजिक कार्यो में योगदान के अवसर मिलेंगे। महिलाये आज व्यवहार संयमित रखें मान हानि की संभावना है। आडंबर युक्त जीवन पर खर्च अधिक रहेगा।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

आज का दिन भी आप सुख शांति से व्यतीत करेंगे। कार्य व्यवसाय में छोटी-मोटी बाधाएं आती रहेंगी लेकिन आप इनकी परवाह नही करेंगे। धर्म-आध्यत्म के प्रति गहरी आस्था कर्म पथ से डिगने नही देंगी। कम समय में ज्यादा लाभ कमाने के प्रलोभन भी मिलेंगे परन्तु ये कुछ ही समय प्रभाव दिखाएंगे आज आपके आचरण से किसी का अहित ना हो इसका विशेष ध्यान रखें। भाई-बंधुओ में कुछ समय के लिए अनबन गृहस्थ का वातावरण बिगाड़ेगी किसी बुजुर्ग के सहयोग से स्थिति सामान्य बनेगी फिर भी मन मे क्षोभ बना रहेगा। व्यावसायिक यात्रा की संभावना है लेकिन ज्यादा लाभदायक नही रहेगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

आज आप दिन भर मन ही मन खयाली पुलाव पकाएंगे इनको सार्थक बनाने के लिए कोई ना कोई अभाव बाधा डालेगा। कार्य क्षेत्र अथवा घर मे शंकालु प्रवृत्ति रहने से किसी भी निर्णय को खुल कर नही ले सकेंगे। अधिकांश कार्यो के निर्णय अन्य के ऊपर डाल देंगे। आज आप फिजूल के झगड़े झंझटो से बच कर रहेंगे परन्तु फिर भी किसी अन्य के आपत्तिजनक व्यवहार के कारण माहौल उग्र बनेगा। धन संबंधित कार्यो में मध्यम सफलता मिलेगी। परिवार में थोड़ी खींच-तान के बाद भी स्थिति गंभीर नही बनेगी। संध्या पश्चात मनोरंजन के अवसर उपलब्ध होंगे।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)

आज के दिन आपको प्रत्येक कार्यो में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। दोपहर तक दिनचर्या सामान्य रहेगी। जोड़ तोड़ करके कार्य चलते रहेंगे। नौकरी व्यवसाय दोनों में थोड़ी बहुत समस्या बनी रहेगी फिर भी लाभ के अवसर मिलते रहेंगे। परन्तु संध्या बाद स्थिति प्रतिकूल होने पर विशेष कर सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक रहेगी। आकस्मिक दुर्घटना चोटादि का भय है। परिजनों की छोटी मोटी बातों का बुरा ना माने भाई बंधुओ से भी व्यर्थ बहस ना करें विवाद बढ़ सकता है। महिलाये आज किसी कारणवश स्वयं को लाचार अनुभव करेंगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)

आज का दिन आपको लगभग सभी कार्यो में सफलता दिलाएगा जहां असफल होंगे वहां कारण किसी अन्य की दखलंदाजी रहेगी। नौकरी पेशा जातको को जटिल कार्य सौंपे जाएंगे जिससे आरंभ में थोड़ी असुविधा रहगी परन्तु बाद में वही कार्य लाभ के साथ सम्मान भी दिलाएगा। व्यवसायी वर्ग कार्य क्षेत्र पर खुल कर निर्णय ले सकेंगे फिर भी आर्थिक लाभ के लिए थोड़ा इंतजार एवं किसी की खुशामद भी करनी पड़ेगी। महिलाये कार्य बोझ के कारण चिड़चिड़ी रहेंगी फिर भी घरेलू दिनचर्या को बिगड़ने नही देंगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

आज का दिन आपको सरकारी पक्ष से लाभ कराएगा आर्थिक स्थिति भी पहले से ज्यादा बेहतर रहेगी। खर्च भी अनावश्यक रहेंगे दिखावे पर ज्यादा खर्च करेंगे। कार्य व्यवसाय क्षेत्र पर आज जल्दबाजी में कार्य करेंगे जिससे कुछ ना कुछ त्रुटि अवश्य रहेगी। व्यावसायिक गतिविधियों से धन सम्मान मिलने पर भी मन मे किसी चीज की कमी खलेगी। मित्र परिचितों के साथ संध्या के समय मौज शौक पूरे करेंगे परन्तु रंग में भंग पड़ने वाली स्थिति बन सकती है सतर्क रहें। विपरीत लिंगीय वर्ग से आकर्षण बढेगा। प्रेम प्रसंगों में नजदिकी आएगी। संताने जिद पर अड़ेंगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

आज के दिन आपके मन मे कुछ ना कुछ उधेड़-बुन लगी रहेगी। किसी बड़े कार्य को करने की योजना बनाएंगे लेकिन आर्थिक कारणों से पीछे हटना पड़ेगा। गलती करने पर भी ना मानने के कारण घर एवं बाहरी लोगो से बुरा-भला सुनना पड़ सकता है। कार्य व्यवसाय में परिश्रम अधिक रहेगा लेकिन प्राप्ति अल्प मात्रा में होगी। खर्चे आज आवश्यकता पर ही करेंगे। महिलाओं का विपरीत व्यवहार घर मे कलह कराएगा। संध्या के बाद से मन मे चंचलता अधिक रहेगी पल पल में बातों से पलटेंगे जिससे परिजनों के साथ मित्रो को भी असुविधा होगी।

पैदा हुई तो सरकारी योजनाओं से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी।

स्कूल गई तो सरकारी छात्रवृतियों से वंचित हुई क्योंकि ठाकुर थी। 

कॉलेज गई तो सबसे ऊँचा कटऑफ लाना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी। 

नौकरी करने गई तो सबसे महंगा फॉर्म भरना पड़ा क्योंकि ठाकुर थी ।

फिर क्यों ना यह लड़की गर्व से ख़ुद को ठाकुर कहे, 

वह भी तब जब सामने वाला अपनी बकचोदी पर लगाम नहीं लगा रहा हो।  

हमारा मानना है कि सरकार को अनारक्षित वर्ग के आधार कार्ड पर लिख के देना चाहिए कि यह वहीं परमत्यागी, परम दानीलोग है, जो इस देश में परजीवियों को पाल रहे हैं। हिन्दूओं को परस्पर बांटने वाली जाति व्यवस्था संविधान में है, शास्त्रों में नहीं। जाति प्रमाण पत्र के आधार पर भेदभाव संविधान में है।

भारत में जाति सर्वव्यापी तत्व है। ईसाइयों, मुसलमानों, जैनों, बौद्धों और सिखों में भी जातियां हैं और उनमें भी उच्च, निम्न तथा शुद्ध-अशुद्ध जातियों का भेद विद्यमान है, लेकिन बात सिर्फ हिन्दू जातियों की इसलिए होती है, क्योंकि हिन्दू बहुसंख्यक हैं और जातियों में फूट डालकर या जातिवाद को बढ़ावा देकर ही सत्ता हासिल की जा सकती है या धर्मांतरण किया जा सकता है। राजनीतिक पार्टियों और कट्टरपंथियों को हिन्दुओं को आपस में बांटकर रखने में ही भलाई नजर आती है। 

इस तरह मिला जाति को बढ़ावा : दो तरह के लोग होते हैं- अगड़े और पिछड़े। यह मामला उसी तरह है जिस तरह कि दो तरह के क्षेत्र होते हैं- विकसित और अविकसित। पिछड़े क्षेत्रों में ब्राह्मण भी उतना ही पिछड़ा था जितना कि दलित या अन्य वर्ग, धर्म या समाज का व्यक्ति। पिछड़ों को बराबरी पर लाने के लिए संविधान में प्रारंभ में 10 वर्ष के लिए आरक्षण देने का कानून बनाया गया, लेकिन 10 वर्ष में भारत की राजनीति बदल गई। सेवा पर आधारित राजनीति पूर्णत: वोट पर आधारित राजनीति बन गई। खैर… 

इस तरह हिन्दुओं को बांटा गया अन्य धर्म और जातियों में…

‘रंग’ बना जाति का ‘जहर’

वंश आधारित समाज : वैदिक काल में वंश पर आधारित समाज बने, जैसे पूर्व में 3 ही वंशों का प्रचलन हुआ। 1. सूर्य वंश, 2. चंद्र वंश और 3. ऋषि वंश। उक्त तीनों वंशों के ही अनेक उप वंश होते गए। यदु वंश, सोम वंश और नाग वंश तीनों चंद्र वंश के अंतर्गत माने जाते हैं। अग्नि वंश और इक्ष्वाकु वंश सूर्य वंश के अंतर्गत हैं। सूर्य वंशी प्रतापी राजा इक्ष्वाकु से इक्ष्वाकु वंश चला। इसी इक्ष्वाकु कुल में राजा रघु हुए जिसने रघु वंश चला। भगवान राम जहां सूर्य वंश से थे, वहीं भगवान श्रीकृष्ण चंद्र वंश से थे। ऋषि वशिष्ठ ने भी एक अग्नि वंश चलाया था।

ऋषि वंश: इसी प्रकार मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, कृतु, भृगु, वशिष्ठ, दक्ष, कर्दम, विश्वामित्र, पराशर, गौतम, कश्यप, भारद्वाज, जमदग्नि, अगस्त्य, गर्ग, विश्वकर्मा, शांडिल्य, रौक्षायण, कपि, वाल्मीकि, दधीचि, कवास इलूसू, वत्स, काकसिवत, वेद व्यास आदि ऋषियों के वंश चले, जो आगे चलकर भिन्न-भिन्न उपजातियों में विभक्त होते गए।

आर्यों के काल में जिन वंश का सबसे ज्यादा विकास हुआ, वे हैं- यदु, तुर्वसु, द्रुहु, पुरु और अनु। उक्त पांचों से राजवंशों का निर्माण हुआ। यदु से यादव, तुर्वसु से यवन, द्रुहु से भोज, अनु से मलेच्छ और पुरु से पौरव वंश की स्थापना हुई। 

आज हिन्दुओं की जितनी भी जातियां या उपजातियां नजर आती हैं वे सभी उक्त तीनों वंशों से निकलकर ही विकृत हो चली हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र ये कोई जातियां नहीं हैं और न ही ये किसी वंश का नाम हैं। ये श्रम विभाजन की श्रेणियां हैं। लेकिन आज ये एक समान सोच के समाज में बदलकर भारत को खंडित कर गए हैं।

उक्त तीनों ही वंशों से ही क्षत्रियों, दलितों, ब्राह्मणों और वैश्यों के अनेक उपवंशों का निर्माण होता गया। उक्त वंशों के आधार पर ही भारत के चारों वर्णों के लोगों के गोत्र माने जाते हैं। गोत्रों के आधार पर भी वंशों को समझा जाता है। भारत में रहने वाले हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, जैन, बौद्ध और सिख सभी किसी न किसी भारतीय वंश से ही संबंध रखते हैं इसीलिए उन्हें भारतवंशी कहा जाता है। यदि जातियों की बात करें तो लगभग सभी द्रविड़ जाति के हैं। शोध बताते हैं कि आर्य कोई जाति नहीं होती थी। आर्य तो वे सभी लोग थे, जो वेदों में विश्‍वास रखते हैं।

बदलती जातियां : बहुत से ऐसे ब्राह्मण हैं, जो आज दलित हैं, मुसलमान हैं, सिख हैं, ईसाई हैं या अब वे बौद्ध हैं। बहुत से ऐसे दलित हैं, जो आज ब्राह्मण समाज का हिस्सा हैं। हजारों वर्षों के कालक्रम के चलते क्षत्रियों की कई जातियां अब दलितों में गिनी जाने लगी हैं। आजकल तो कोटे का लाभ लेने के लिए कुछ लोग अपनी ऊंची जातियां छोड़ने को तैयार हैं।

कैसे बनती जातियां? : जातियां समान भाषा, खानपान, कार्य, श्रम विभाजन और व्यवहार के आधार पर निर्मित होती हैं। इसमें जलवायु और स्थान का भी योगदान रहता है। इसमें एक ही तरह के नाक-नक्श का भी योगदान रहता है। जातियों में छुआछूत के कई कारण हैं। प्रारंभिक काल में यह अक्सर खान-पान, श्रम और रंग के आधार पर होता था। इसके कारण एक समान जाति स्वयं अनेक उपजातियों तथा समूहों में विभक्त रहती थी।

जातियों में श्रम विभाज का सबसे बड़ा योगदान रहा है। इस विभाजन का आधार बहुधा एक ही पेशे के अंदर विशेषीकरण के भेद और उपभेद होते हैं किंतु भौगोलिक स्थानांतरण ने भी एक ही परंपरागत धंधा करने वाली एकाधिक जातियों को साथ-साथ रहने का अवसर दिया है। कभी-कभी जब किसी जाति का एक अंग अपने परंपरागत पेशे के स्थान पर दूसरा पेशा अपना लेता है, तो कालक्रम में वह एक पृथक जाति बन जाता है।

प्राचीन जातियां : प्राचीनकाल में पूर्व, पश्‍चिम, उत्तर और दक्षिण भारत में कई तरह की जातियां थीं जिनमें देव, असुर, किन्नर, यक्ष, रक्ष, वानर, मल्ल, किरात, निषाद, रीछ, दानव, गंधर्व, नाग, मानव आदि थे।

आज जितने भी अहीर, जाट, गुर्जर, पटेल, पाटिल, पाटीदार, यादव, चौहान, ब्राह्मण, धनगर, मोची, बलाई, वाल्मीकि, मेहतर, भट, डार, नाई, धोबी, बढ़ई, लोहार, बनिये, सिंह, ठाकुर, शर्मा, तिवारी, मिश्रा, वर्गीस, जोशी, सिसोदिया, वाजपेयी, गांधी, राठौर, झाला, गुप्ता, अग्रवाल, जैन, शाह, चौहान, परमार, विजयवर्गीय, राजपूत, मेंडल, यादव, कर्णिक, गौड़, राय, दीक्षित, भट्टाचार्य, बनर्जी, चटर्जी, उपाध्याय, कुशवाह, पोरवाल, भोंसले, सोलंकी, देशमुख, आपटे, प्रधान, जादौन, जायसवाल, गौतम, भटनागर, श्रीवास्तव, निगम, सक्सेना, चौपड़ा, कपूर, कुलकर्णी, चिटनीस, वाघेला, सिंघल, पिल्लई, स्वामी, नायर, सिंघम, गोस्वामी, रेड्डी, नायडू, दास, जाटव, चमार, पासी, दुसाध, खटीक, कश्यप, बंजारा, पुराणिक, दासगुप्ता, सेन, वर्मा, चौधरी, कोहली, दुबे, चावला, पांडे, महाजन, बोहरा, काटजू, आहूजा, नागर, भाटिया, चतुर्वेदी, चड्डा, गिल, सहगल, टुटेजा, माखरजा, नागौरी, जैदी, टैगोर, भारद्वाज, महार, कहार, सूर्यवंशी, शेखावत, राणा, कुमार, धनगर, डांगे, डांगी, सुतार, विश्वकर्मा, पाठक, नाथ, सिंघल, पंडित, आर्य, खन्ना, माहेश्वरी, साहू, झा, मजूमदार आदि सभी सूर्य, चंद्र या ऋषि वंश के हैं।

अगले पन्ने पर उपनाम बना हिन्दू विभाजन का जहर…

पहले नहीं होते थे उपनाम : इंद्र, वृत्त, शंभर, गार्गी, कृष्ण, कौत्स, चार्वाक, राम, अर्जुन, दुर्योधन, अत्रि, एकलव्य, हनुमान, रावण आदि ऐसे हजारों चर्चित लोग रहे हैं, जो बिना जातिगत सरनेम के ही आज तक प्रसिद्ध हैं। फिर सरनेम और उपनाम की शुरुआत किसने और कब से की?

इस तरह उपनाम शुरू हुए : माना जाता है कि बौद्धकाल में उपनाम रखने की परंपरा शुरू हुई। जो लोग खुद को राजदरबार या धर्म से संबंधित मानते थे वे उपनाम रखते थे, जैसे राजपुरोहित, चतुर्वेदी, सूर्यवंशी, त्रिवेदी, गुप्त, चंद्रवंशी, यदुवंशी, आदि। कई लोग अपने वंश को दर्शाने के लिए गोत्र को ही उपनाम की तरह इस्तेमाल करने लगे, जैसे भार्गव, आत्रेय, कश्यप आदि।

अधिकतर उच्च उपाधियां प्राप्त लोग अपने नाम के आगे उपाधि को ही उपनाम बनाकर दर्शाते थे ताकि उन्हें लोग उच्च समझे। फिर एक ही तरह की उपाधियों का एक उच्च वर्ग निर्मित होने लगा। बाद में जब मुगल आए तो सर्वप्रथम उन्होंने उपाधि प्राप्त लोगों को ही अपने राजदरबार में उच्च पद पर रखा। फिर धीरे-धीरे उन्होंने समय और परिस्थिति के अनुसार अन्य कई जाति समूह के लोगों के उक्त क्षेत्र का अच्छे से संचालन करने के लिए नए-नए पद ‍निर्मित किए, जो बाद में एक जाति में बदल गए। फिर अंग्रेजों का राज आया तब उच्च पद पर आसीन लोगों के अलावा वे कई छोटी और पिछड़ी जातियों के लोगों को भी छोटी-मोटी नौकरी पर रखने लगे। जिस तरह मुगलों के राज में कोई व्यक्ति खुद को खान कहलाना पसंद करता था उसी तरह अंग्रेजों के राज में बाबू, जमीदार, पटवारी आदि। इस तरह जब अंग्रेजों की समझ बढ़ी तो उन्होंने हिन्दुओं में पद और श्रम आधारित कई नई उपाधियां दी जो आज जातियों में निर्मित हो गई है।

अंग्रेज काल की उपजातियां : माना जाता है कि हिन्दुओं को विभाजित रखने के उद्देश्य से ब्रिटिश राज में हिन्दुओं को तकरीबन 2,378 जातियों में विभाजित किया गया। ग्रंथ खंगाले गए और हिन्दुओं को ब्रिटिशों ने नए-नए नए उपनाम देकर स्पष्ट तौर पर जातियों में बांट दिया। इतना ही नहीं, 1991 की जनगणना में केवल मोची की ही लगभग 1,156 उपजातियों को रिकॉर्ड किया गया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज तक कितनी जातियां-उपजातियां बनाई जा चुकी होंगी।

बदलते उपनाम : कई ऐसे उपनाम हैं, जो किसी व्यक्ति या समाज द्वारा प्रांत या धर्म बदलने के साथ बदल गए हैं, जैसे कश्मीर के भट्ट और धर जब इस्लाम में दीक्षित हो गए तो वे अब बट या बट्ट और डार कहलाने लगे हैं। दूसरी और चौहान, यादव और परमार उपनाम तो आप सभी ने सुना होगा। जब ये उत्तर भारतीय लोग महाराष्ट्र में जाकर बस गए तो वहां अब चव्हाण, जाधव और पवार कहलाते हैं। पांडे, पांडेय और पंडिया ये तीनों उपनाम ब्राह्मणों में लगते हैं। अलग-अलग प्रांत के कारण इनका उच्चारण भी अलग हो चला। जैसे पाटीदार ही गुजरात में पटेल कहे जाते हैं।

कॉमन उपनाम : नाम की तरह बहुत से ऐसे उपनाम हैं, जो मुगल और अंग्रेज काल में हुए हिन्दुओं के धर्मां‍तरण के कारण अब सभी धर्म और समाज के कुछ परिवारों में एक जैसे पाए जाते हैं जैसे पटेल, शाह, राठौर, राणा, सिंह, शर्मा, स्मिथ, चौहान, ठाकुर, बोहरा या वोहरा आदि। दाऊदी बोहरा समाज के सभी लोग भारतीय गुजराती समाज के मुस्लिम हैं तो वोहरा उपनाम हिन्दुओं में भी पाया जाता है जिसका मूल वराह से निकला है। वराह नाम की एक पिछड़ी जाति आज भी देश में निवास करती है जिनके देवता भगवान वराह हैं।

भारत में तो उपनामों का समंदर है। अनगिनत उपनाम हैं जिन्हें लिखते-लिखते शायद सुबह से शाम हो जाए। यदि उपनामों पर शोध करने लगें तो की थे ऐसे उपनाम हैं, जो हिन्दू समाज के चारों वर्णों में एक जैसे पाए जाते हैं। दरअसल, भारतीय उपनाम के पीछे कोई विज्ञान नहीं है। ये ऋषियों के नाम के आधार पर निर्मित हुए हैं। ऋषि-मुनियों के ही नाम से ‘गोत्र’ भी बन गए। कालांतर में जैसे-जैसे राजा-महापुरुष बढ़े, उपनाम भी बढ़ते गए। कहीं-कहीं स्थानों के नाम पर उपनाम देखने को मिलते हैं। हालांकि सारे भारतीय एक ही कुनबे के हैं, लेकिन समय सब कुछ बदलकर रख देता है।

भारत में यदि उपनाम के आधार पर किसी का इतिहास जानने जाएंगे तो हो सकता है कि कोई मुसलमान या दलित ‍हिन्दुओं के क्षत्रिय समाज से संबंध रखता हो या वह ब्राह्मणों के कुनबे का हो। लेकिन धार्मिक इतिहास के जानकारों की मानें तो सभी भारतीय किसी ऋषि, मुनि या मनु की संतानें हैं, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, वर्ण या रंग का हो।

स्थानों पर आधारित उपनाम : जैसे कच्छ के रहने वाले क्षत्रिय जब कच्छ से निकलकर बाहर किसी ओर स्थान पर बस गए तो उन्हें कछावत कहा जाता था। बाद में यही कछावत बिगड़कर कुशवाह हो गया। अब कुशवाह उपनाम दलितों में भी लगाया जाता है और क्षत्रियों में भी। महाराष्‍ट्र में स्थानों पर आधारित अनेक उपनाम मिल जाएंगे, जैसे जलगांवकर, चिपलूनकर, राशिनकर, मेहकरकर आदि। दूसरे प्रांतों में भी स्थान पर आधारित उपनाम पाए जाते हैं, जैसे मांडोरिया, देवलिया, आलोटी, मालवी, मालवीय, मेवाड़ी, मेतवाड़ा, बिहारी आदि।

पदवी बने उपनाम, उपनाम बने जाति : राव, रावल, महारावल, राणा, राजराणा और महाराणा ये भी उपाधियां हुआ करती थीं राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में। अन्य भी कई पदवियां हैं, जैसे शास्त्र पढ़ने वालों को शास्त्री, सभी शास्त्रों के शिक्षक को आचार्य, दो वेदों के ज्ञाता को द्विवेदी, चार के ज्ञाता चतुर्वेदी कहलाते थे। उपाध्याय, महामहोपाध्याय उपाधियां भी वेदों के अध्ययन या अध्याय पर आधारित होती थीं। अंग्रेजों के काल में बहुत सी उपाधियां निर्मित हुईं, जैसे मांडलिक, जमींदार, मुखिया, राय, रायबहादुर, चौधरी, पटवारी, देशमुख, चिटनीस, पटेल इत्यादि।

‘ठाकुर’ शब्द से कौन परिचित नहीं है। सभी जानते हैं कि ठाकुर तो क्षत्रियों में ही लगाया जाता है, लेकिन आपको जानकर शायद आश्चर्य हो कि भगवान कृष्ण जी को भी ठाकुर जी कहा जाता है, और यह ठाकुर ब्राह्मणों में भी लगता है। ठाकुर भी पहले कोई उपनाम नहीं होता था तथा यह एक पदवी होती थी। लेकिन यह रुतबेदार वाली पदवी बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हुई। खान, राय, राव, रावल, राणा, राजराणा और महाराणा ये भी उपाधियां या पदवी हुआ करती थीं।

व्यापार पर आधारित उपनाम : भारत के सभी प्रांतों में रहने वाले सभी धर्म के कुछ लोगों का व्यापार पर आधारित उपनाम भी पाया जाता है, जैसे भारत में सोनी उपनाम बहुत प्रसिद्ध है, जो सोने या सुनार का बिगड़ा रूप है। कालांतर में ये लोग सोने का धंधा करते थे तो इन्हें सुनार भी कहा जाता था। ज्यादातर लोग अब भी यही धंधा करते हैं। लुहार उपनाम से सभी परिचित हैं। गुजरात में लोहेवाला, जरीवाला आदि प्रसिद्ध हैं। लकड़ी का सामान बनाने वाले सुतार या सुथार उपनाम का प्रयोग करते हैं। ऐसे अनगिनत उपनाम हैं, जो किसी न किसी व्यवसाय पर आधारित है।

पौराणिक मान्यता अनुसार :

दस सूर्य, दस चन्द्रमा, द्वादस ऋषि‍ प्रमाण।

चार अग्नि वंश पैदा भया, गौत्र छत्तीसो जाण।।

सृष्टि का रचयि‍ता ब्रह्मा को माना गया है। ब्रह्मा के प्रथम पुत्र मनु हैं। मनु के 3 पुत्रि‍यां व 2 पुत्र प्रि‍यव्रत और उत्तानपाद हुए। ब्रह्मा के दूसरे पुत्र मरीचि‍ हुए। मरीचि‍ के पुत्र कश्यप की 13 रानि‍यां थीं। इनमें से 1 रानी के 88 हजार ऋषि‍ हुए। इनमें से गौतम ऋषि‍ से गहलोद वंश की उत्पत्ति मानी गई तथा दधीचि‍ ऋषि‍ से दाहि‍मा वंश की उत्पत्ति हुई। कश्यप की दूसरी रानी के सूर्य हुए। सूर्य से सूर्य वंश की उत्पत्ति हुई। सूर्य से 10 गौत्र बने।

ब्रह्मा के तीसरे पुत्र अत्रि ऋषि‍ थे। इनके 3 पुत्र हुए- 1. दत्तात्रेय, 2. चन्द्रमा, 3. भृगु। दत्तात्रेय से 10 गौत्र बने, जो ऋषि‍ वंश कहलाते हैं तथा चन्द्रमा से भी 10 गौत्र बने, जो चन्द्रवंशी कहलाते हैं। ब्रह्माजी के चौथे पुत्र वशि‍ष्ठजी के 4 पुत्रों से अग्नि वंश बना। इनके भी 4 गौत्र बने जि‍नकी कई शाखाएं हैं।

कश्यप की 13 रानि‍यों में से ही 1 के नाग वंश भी बने लेकि‍न राजा परीक्षि‍त के भय से नागवंशी अपने नाम को त्यागकर अन्य नाम से बस गए। इस प्रकार मानव जाति‍ में कुल 4 वंश व 36 गौत्र माने गए हैं।

कर्म आधारित वर्ण : ऋषि‍-महर्षि‍यों ने कर्म की तुलना करके वर्ण बने है। 20 कर्म करने वाले को ब्राह्मण कहा जाने लगा। 6 कर्म करने वाले को क्षत्रि‍य माना गया। व्यपार व्यवसाय आर्थिक क्रय विक्रय वित्तीय प्रबंधन करने को वैश्य कहा गया जबकि शिल्पकार्य तकनिकी कार्य करने वाले को शूद्र कहा गया। इस प्रकार 4 वर्ण बने। ब्राह्मण एक होते हुए भी इनमें कई हैं और इनमें भी कर्म के अनुसार 84 तरह के ब्राह्मण हैं। क्षत्रि‍य वंश में कई अन्य काम करने से कर्म जाति‍ के अनुसार इनमें भी कई उपजाति‍यां बन गईं।