भारत बना संसार की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था : इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व निर्माण, धीरे-धीरे बांग्लादेश पर शिकंजा कस रहा है भारत : तीन बीघा कॉरिडोर और फरक्का समझौते से फंसाया बांग्लादेश को, जेल में बंद टुकड़े टुकड़े गैंग के अर्बन नक्सल इस्लामिक चरमपंथी उमर खालिद के लिए अमेरिकी मुस्लिम मेयर ममदानी की निकली चीख भाजपा ने कहा अमेरिकी भारत के भीतरी मामलों में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं, जब समाज को विभाजित करने के लिए एक तरफा विसंविधान बनते हैं तभी उपद्रवी पनपते हैं

भारत को नए साल से पहले ही अच्छा समाचार मिला है. भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. सरकार के साल के अंत में आए आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत ने जापान को पीछे छोड़ दिया है. आने वाले सालों में भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है. यह जर्मनी को पीछे छोड़ देगा. इस बात की पक्की पुष्टि साल 2026 की पहली छमाही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ओर से जारी किए जाने वाले आंकड़ों से होगी, जिसमें 2025 के अंतिम आंकड़े शामिल होंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों और सरकारी आकलनों के अनुसार भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है। आज भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुँच चुकी है और अब केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही भारत से आगे हैं।
यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली। मजबूत नीतियाँ, इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप्स का विस्तार और वैश्विक निवेश—इन सबका नतीजा है यह ऐतिहासिक सफलता। आज भारत को सिर्फ आबादी के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक ताक़त के लिए जाना जा रहा है।
यह हर भारतीय के लिए गर्व का पल है।
भारत बन गया है—अब बधाई तो बनती है। 🇮🇳📈

धीरे-धीरे बांग्लादेश पर, #शिकंजा कस रहा है भारत. तीन बीघा कॉरिडोर और फरक्का समझौते से फंसाया बांग्लादेश को.

मित्रों.. 2024 के मध्य और खासतौर पर 2025 की शुरुआत से बने हालात अब भारत और बांग्लादेश के बीच तनावपूर्ण संबंधों का नया अध्याय लिखते नजर आ रहे हैं.

बांग्लादेश अब जो भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है, मोहम्मद यूनुस यह ना भूले कि उसकी गर्दन पूरी तरह से भारत के पंजे में है.

अगर भारत की तरफ आंख उठाने की बांग्लादेश ने कोशिश भी की तो भारत के बिना मारे बांग्लादेश में तबाही आ जाएगी. क्योंकि भारत ने अगर तीन बीघा कॉरिडोर या तीन बीघा जो गलियारा है उसको लेकर कदम उठा लिया तो यूनुस छटपटाते हुए मर जाएगा.

● तो मित्रों, आखिर यह तीन बीघा कॉरिडोर क्या है.! जिसको लेकर बांग्लादेश की नब्ज़ कहा जा रहा है.!?

बांग्लादेश में होने वाले फरवरी महिने में चुनाव के बाद जब बांग्लादेश में नई सरकार सत्ता में आएगी, तो उसे जिन प्रमुख मुद्दों का सामना करना पड़ेगा, उनमें से एक है भारत के साथ फरक्का जल बंटवारे की संधि का नवीनीकरण, जो 2026 में समाप्त हो रही है और जिसमें स्वतः विस्तार का कोई प्रावधान नहीं है, जिसके कारण नए सिरे से बातचीत करना आवश्यक हो जाएगा.

फरक्का में गंगा जल के बंटवारे पर पहला समझौता 7 नवंबर 1977 को ढाका में हस्ताक्षरित किया गया था. इस संधि से कुछ ही महीने पहले, मार्च में मोरारजी देसाई जी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया था, जबकि उसी वर्ष अप्रैल में मेजर जनरल जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति बना था. फिर, जब 12 दिसंबर, 1996 को दूसरे समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, तब भारत के प्रधानमंत्री देवेगौड़ा और बांग्लादेश की शेख हसीना को पद संभाले हुए केवल छह महीने ही हुए थे, दोनों नेताओं ने जून में अपने अपने पदभार ग्रहण किए थे.

मित्रों, बैराज में दो जगह पानी जाती है. एक तो गंगा में पानी जाती है जो कि बांग्लादेश में चली जाती है. दूसरा हुबली में पानी आती है. समझौते के तहत अगर 75000 क्यूसेक से ज्यादा पानी है तो 45000 क्यूसेक भारत रखेगा और बाकी बांग्लादेश को दे देगा. अगर 70 से 75000 क्यूसेक से कम है तो 35000 क्यूसेक भारत रखेगा और बाकी बांग्लादेश को दे देगा. और अगर 70 या 73000 क्यूसेक से भी कम है तो भारत 30000 क्यूसेक पानी रखेगा और बाकी पड़ोसी को देगा. कुल मिलाकर कहे तो भारत को कम से कम 30 से 35000 क्यूसेक जल की आवश्यकता है वो रख के बाकी बांग्लादेश को दे देगा, इसलिए यह बैराज बनाया था. अब ये समझौते की मियाद 2026 में खत्म हो रही है. तो इस बार, भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक स्थिर और दीर्घकालिक सरकार है,

जबकि बांग्लादेश लगभग 17 महीनों की अस्थिरता के बाद लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार की स्थापना की ओर अग्रसर है.

अब यह देखना बाकी है कि क्या संधि का आपसी सहमति से समाधान होगा, या फिर कुछ सुधारों के साथ नवीनीकरण किया जाता है, या यदि बांग्लादेश भारत को अस्थिर करने की इच्छा रखने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय तत्वों के इशारों पर चलता रहता है तो भारत कड़ा रुख अपनाएगी.

मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत, देश और उसके लोगों की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा के लिए कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगी. संयोगवश, पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के कारण, भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. यह निर्णय भारत की संप्रभुता की रक्षा और पाकिस्तान की कार्रवाइयों के खिलाफ जवाबी उपायों के व्यापक पैकेज का हिस्सा था. बांग्लादेश की 30% खेती इसी पानी पर निर्भर है. अगर ऐसा हुआ तो बांग्लादेश के एक बड़े हिस्से में सुखा की स्थिति पैदा हो जाएगी और वहां खेतीबाड़ी सारी चौपट हो जाएगी.

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद भारत से बांग्लादेश के रिश्ते बिगड़े हुए हैं, ऐसे में बांग्लादेश को डर है कि अगर भारत ने इस समझौते को रिन्यू नहीं किया तो उसकी एक तिहाई आबादी प्यासी मर जाएगी और खेती बिल्कुल चौपट हो जाएगी.

यही वजह है कि वह अब अपनी गरीबी का रोना रोते हुए भारत के आगे नाक रगड़ रहा है और बांग्लादेश में कुछ दिनों से जो राजनयिक अफरा-तफरी हो रही है, वह उसी का असर है.

● तो मित्रों, 3 बीघा गलियारा क्या है.. जो बांग्लादेश को सबसे बड़ी चोट दे सकता है!

बांग्लादेश के दहाग्राम एवं अंगारपोर्टा एन्क्लेव के संबंध में 1974 के एलबीए के अनुच्छेद 1(14) में तीन बीघा के पास 178 मीटर x 85 मीटर के इलाके को स्थायी रूप से पट्टे पर देकर इन एन्क्लेव तक पहुंच का प्रावधान है. इसे 7 अक्टूबर 1982 को भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री और बांग्लादेश के तत्कालीन विदेश मंत्री के बीच और 26 मार्च 1992 को भारत के विदेश सचिव, बांग्लादेश के अतिरिक्त विदेश सचिव के जरिए लागू किया गया था. यह पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में स्थित है. इसके तहत बांग्लादेशी नागरिक बिना वीजा/पासपोर्ट के भारतीय जमीन से होकर गुजरते हैं.

2015 में जब मोदी जी की सरकार आई तो उन्होंने इस जगह को आपस में एक्सचेंज कर लिया. लेकिन एक जगह ऐसी है, जिसको कहते हैं दाहा ग्राम अंगार कोटा इनक्लेव, इसकी आबादी बहुत बड़ी है, मतलब यह बहुत बड़ा क्षेत्रफल वाला आबादी है, जिसमें 20 हजार से ज्यादा परिवार रह रहे हैं.

अब भारत चाहे तो अपनी ज़मीन वापस ले सकता है, इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय बाध्यता नहीं है. ये पूर्ण रूप से भारत की उदारता पर निर्भर करता है. तो क्या आप लोग, 22 हजार से ज्यादा परिवार, यानी कि एक परिवार में 8 कंगलुओं को जोड़ लिया जाए तो करीब 1 लाख 76 हजार कंगलुओं को भारत में बर्दास्त कर सकते हैं..!? वैसे एक जंगली शुकर 15 बच्चे से कम पैदा नहीं करता. इसके आगे और कुछ नहीं लिखूंगा.!

जब इस जमीन को लेकर दोनों देशों के बीच आदान प्रदान पर समझौते हो रहे थे, तब भारत में कांग्रेस और TMC इसका कड़ा विरोध किया था, इसलिए नहीं की, एक बड़ी जमीन बांग्लादेश को दे दिए गए, बल्कि वहां की एक बहुत बड़ी आबादी उनके हाथों से निकल गई, जो उनके वोटबैंक थे. उस जगह के उस वक्त के भारतीय, जो अभी कंगलू बन गए हैं, बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था, बांग्लादेश में न मिलने के लिए. रक्तपात भी हुआ था. मोदी जी ने उस जगह के बदले बांग्लादेश के कई छोटे छोटे हिन्दू गांवों को भारत में मिलाया था…

यदि उस वक्त हिन्दू भी एक जगह, एक बड़ी आबादी रहते तो, हम भी एक बड़ी जगह एक मुश्त में ले सकते थे. लेकिन नहीं, हम हिन्दू तो अलग-अलग रहने की आदी हो चुके हैं…

उमर खालिद को दिल्ली के एक न्यायालय ने अंतरिम बेल दे दिया, क्योंकि उनको अपनी बहन की शादी में जाना था। 16 दिसंबर से लेकर 29 दिसंबर तक की बेल दी गई थी और उनको बताया गया था कि इस बीच में आप सोशल मीडिया पर बिल्कुल भी सक्रिय नहीं होंगे और अपने घर परिवार वालों से मिलकर वापस जेल आ जाएंगे। 29 तारीख को वह जेल में जमा हो गए होंगे।

लेकिन संयोग देखिए कि उनके जेल में वापस जाते ही जो ममदानी साहब, जो न्यूयॉर्क के मेयर हैं, एक चिट्ठी लिखते हैं कि खालिद के साथ बड़ा अन्याय हो रहा है, क्योंकि उनको 5 साल से बिना मुकदमे के जेल में रखा गया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और इसलिए खालिद को जमानत दे दी जानी चाहिए। उस पत्र पर और भी कई सांसद हस्ताक्षर कर देते हैं।

अब इसका समर्थन करने के लिए आ जाती है आई ए एम सी, जिसका पूर्ण रूप है इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल, और वह अपने वेबसाइट पर लिखते हैं कि वे ममदानी और बाकी सांसदों की मांग का समर्थन करते हैं। आईएमसी अपने वेबसाइट पर यह भी लिखती है कि वे भारत में जो क्रिश्चियन के ऊपर अत्याचार हो रहा है, उसको देखते हुए अमेरिकी सरकार से मांग करती है कि बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद को प्रतिबंधित कर दिया जाए।

तो मुद्द्यावर ये है कि ये उनको भी पता है कि उनकी यह मांगें पूरी नहीं होंगी, लेकिन यह लोग हमेशा प्रयास करते रहते हैं। और दूसरी बात, अगर यह खालिद अपने आप को जेएनयू का कम्युनिस्ट नेता कहता है, तो कम्युनिज्म को तो धर्म पर विश्वास ही नहीं है, तो इसके लिए भारत और अमेरिका के मुसलमान क्यों खड़े हैं? और तो और आई ए एम सी जो है, वह खालिद के नाम पर छात्रवृत्ति भी देती है।अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद के लिए लिखे गए नोट पर बीजेपी आपे से बाहर है। बीजेपी ने अमेरिकी नेता से दो टूक कह दिया है कि भारत अपने आंतरिक मामलों में इस तरह से कोई भी दखल कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। केंद्र में सत्ताधारी दल ने सवाल किया है कि हमारे लोकतंत्र और न्यायपालिका पर सवाल उठाने वाले वो आखिर होते कौन हैं? बता दें कि ममदानी ने खालिद से सहानुभूति वाला नोट उनके माता-पिता को दिया था, जो उनके शपथग्रहण के दिन उजागर हो गया। ‘

भारत इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा’ उमर खालिद के लिए पिछले साल दिसंबर में लिखे गए न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के नोट के खुलासे पर बीजेपी बहुत ही भड़की हुई है। शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पार्टी मुख्यालय में कहा, ‘अगर कोई व्यक्ति किसी आरोपी का समर्थन करता है, भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणियां करता है, तो भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत के प्रत्येक नागरिकों को भारत की न्यायपालिका पर पूरी आस्था है।’

विश्व को अनुशासित करने वाला ग्रंथ मनुस्मृति जिसके कारण आज पूरी दुनिया ये जान पाई की देश सुचारू रूप से चलाने के लिए नियम कायदे होने की अधिक आवश्कता हैं, नही तो जानवर रूपी इंसान अपराध करते रहेंगे यानी विश्व का पहला संविधान मनुस्मृति जहा नारी को देवी स्वरुप मानकर पूजा करने, सम्मान करने को कहा गया आज उसी मनुस्मृति को नेताओ द्वारा बनाए गए गुंडे जलाने लगे हैं!

 मनु महाराज जी द्वारा दी गई मनुस्मृति को आज कोई भी दो कौड़ी का ऐरागैरा जला सकता है उस पर कोई case नही होगा! 

लेकिन अगर मनुस्मृति में आस्था रखने वाले लोग उस जानवर की उसकी औकात बताएं कि तू मनुस्मृति नही जला सकता उसकी गैर कानूनी हरकतों का reaction दे तो उस पर झूठा case ST SC लगा दी जाएगी!

औरतों को खेती मानने वाला आसमानी किताब निर्लज्ज नेताओ द्वारा पोषित गुंडों को जलाने की हिम्मत नही होती है लेकिन जिस ग्रंथ में महिलाओं को देवी माना गया है उस ग्रंथ को जला दिया जा रहा है!

कारण जब कानून एक तरफा फुट डालने के लिए बनाए जाते हैं तभी इस तरह के उपद्रवियों का जन्म होता है!

जिसे जानवर असुर वाली जिंदगी ही जीना हो उसे इंसान नही बनाया जा सकता लेकिन शठेशाट्ठयंम् समाचरेत्क करने के अतिरिक्त समाज में शांति स्थापित नही हो सकती हैं!

भारत आज सिर्फ बाहरी आतंकवादियो से ही नही बल्कि घर के अंदर पल रहे हिंदू धर्म के नाम पर आरक्षित आतंकियों से भी जुझ रहा है! 

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इस अधर्म को रोकना तुच्छ इंसानो के बस की बात ही नही है, चीखने चिल्लाने से ये जानवर रुकने वाले नही इसके लिए भी ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने वाले स्वाभिमानी आस्थावान कोई तपस्वी ही इस अधर्म को रोक सकता है

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या तो एकदम इस एकतरफ़ा घटिया कानून के खिलाफ़ भीड़ जाओ या फिर चुप रहकर तमाशा देखते रहे इन नेताओं द्वारा बनाए असुरों का! (साभार?