अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बयानों की सनसनी के बीच आरती गौड़ का धमाका : कहा खाली फेसबुक पर भौंक रही साक्ष्य हैं तो पुलिस को उपलब्ध क्यों नहीं कराती? इस प्रकरण पर महेंद्र भट्ट सुरेश राठौर और गणेश गोदियाल के वक्तव्य भी

अभिनेत्री #उर्मिला_सनावर के बयानों की सनसनी के बीच #आरती_गौड़ का धमाका।

आरती गौड़ ने उर्मिला सनावर को अपने बयानों के साक्ष्य #पुलिस में प्रस्तुत करने की चुनौती दी, आरती गौड़ ने कहा “खाली फेसबुक पर #भौंक रही है जब पुलिस गवाही के लिए बुला रही है तो आ क्यों नहीं रही #साक्ष्य प्रस्तुत करने?”

बता दें कि शोशल मीडिया पर उर्मिला सनावर के वायरल वीडियो में गट्टू संबोधित करते हुए सुरेश राठौर के एक कथित आडियो को सुनाते हुए उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी दुश्यंत गौतम को वीआईपी बता कर उस रात अंकिता भंडारी केस में लपेटने का प्रयास किया गया है। 

वहीं भाजपा के पूर्व विधायक #सुरेश_राठौर ने #उर्मिला_सनावर के आडियो एआई जनरेटेड #षड्यंत्र बताते हुए उनके मोबाइल की #फौरैंसिक_जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि #अंकिता_भंडारी केस में हाईकोर्ट से निर्णय आ चुका है दोषियों को सजा हो चुकी है इसके बाद ऐसा अनर्गल प्रलाप एक राजनीतिक षड्यंत्र है, कोई दल उर्मिला को मोहरा बना रहा है, राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा #षड्यंत्र नहीं करना चाहिए।

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वहीं इस प्रकरण पर उत्तराखंड BJP अध्यक्ष #महेंद्र_भट्ट बोले प्रति दिन बड़ी संख्या में लोग मिलने आते हैं, फोटो भी खिंचवाते हैं, हम किसी को रोक थोड़ी कर सकते हैं। जहां तक रही आडियो की बात तो पूरी तरह से AI जनरेटेड अपुष्ट ऑडियो और संदिग्ध गतिविधि वाली महिला के दावों को आधार बनाकर बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री #दुष्यंत_गौतम पर आरोप लगाना #अनुसूचित_जाति का अपमान है।

वहीं कांग्रेस इसी विषय को लपक  कर भाजपा को घेरने में जुट गयी है। कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि “यदि सरकार अंकिता भंडारी हत्याकांड की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने हेतु सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश की निगरानी में CBI जांच की संस्तुति 10 दिनों के भीतर नहीं करती है,

तो कांग्रेस पार्टी गढ़वाल मंडल मुख्यालय में विशाल जनआंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी”

(सभी चित्र साभार)

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अब एक वर्ष बाद चुनाव हैं उसी का झोल लग रहा है। क्योंकि कानून स्क्रिप्ट से गाईडेड नहीं होता अपितु साक्ष्यों के आधार पर निर्णय करता है, यदि इतने ही सबूत थे इस महिला के पास और #अंकिता_भंडारी की मृत्यु पर सचमुच दुखी थी तो इतने समय साक्ष्य छिपाये क्यों रखे! जब पहले एसटीएफ की जांच चल रही थी तब पुलिस को साक्ष्य उपलब्ध कराते, पी रैणुका देवी जांच अधिकारी थी उनको ये रिकार्डिंग साक्षय के रूप में देते, नहीं तो जब कोर्ट में केस चल रहा था तब कोर्ट में साक्ष्य देते, नहीं तो आशीष नेगी जब सबूतों के लिए प्रयत्न कर रहे थे तब उनको ये सब रिकार्डिंग देते। मुख्यमंत्री को ही ये रिकार्ड देते और कहती कि मुख्यमंत्री जी सबूत ये हैं भेजो #वीआईपी अपराधियों को जेल।
अब अंकिता भंडारी केस में हाईकोर्ट ने निर्णय देदिया दोषी जेल भेज दिए गये। परिवार को मुआवजा भी दिया गया है। अब #कालातीत होने के कारण कथित रिकार्डिंग का बहुत औचित्य रह नहीं गया, लेकिन फिर भी यदि अपराधियों को ही सजा दिलाना उदेश्य है तो केवल मीडिया में रिकार्डिंग देने से तो कार्यवाही होगी नहीं, यह महिला तो उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को सारी रिकॉर्डिंग और साक्ष्य उपलब्ध करायें वे इस केस को #री_ओपन करा सकते हैं, इसके लिए कौन रोक रहा है इन्हें?
लेकिन ठीक चुनाव के पहले केवल #सनसनी के लिए प्रकट होना तो बड़ा राजनीतिक झोल भी हो सकता है!!

उत्तराखण्ड में क्यों कि राज नीतिक गिद्दों को अंकिता भंडारी केस में सत्ता पाने का अवसर दिख रहा है। अन्यथा अब तक दो सौ से अधिक बेटियाँ उत्तराखंड में केवल #लवजिहाद की शिकार हो चुकी हैं। अन्य केस अलग से हैं उन अभागी बेटियों का तो कोई नाम भी नहीं जानता कार्यवाही होना तो बड़ी बात है। कुछ की शिकायत दर्ज है कुछ की तो लाज शर्म के और बदनामी के मारे शिकायत भी दर्ज नहीं हुई। उनके लिए तो कोई आगे नहीं आ रहा है क्योंकि वे अभागिने किसी के #राजनीतिक #फ्रेम में #फिट नहीं बैठती इसलिए उनकी फिक्र भी नहीं है! !