शिखर प्रकरण के बाद रियल एस्टेट में हड़कंप, अफसर और बिल्डरों के सिंडिकेट पर गहराया संकट

शिखर प्रकरण के बाद रियल एस्टेट में हड़कंप, अफसर और बिल्डरों के सिंडिकेट पर गहराया संकट

अफसर अपना पैसा वापिस लेने के लिए सक्रिय

✍️ महेश झालानी

​जयपुर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल प्रकरण और ‘अनंता’ रिसॉर्ट्स समूह को संचालित करने वाली कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी परतें खुलने के बाद राजस्थान का रियल एस्टेट और प्रशासनिक अमला एक अभूतपूर्व भूचाल का सामना कर रहा है। इस विवाद ने न केवल नौकरशाही और बिल्डरों के बीच वर्षों से चल रही सांठगांठ की पोल खोल दी है, बल्कि राज्य के कई नामचीन रियल एस्टेट समूहों को सीधे दिवालियेपन के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

​प्रशासनिक गलियारों और सूत्रों से मिल रही पुख्ता जानकारियों के अनुसार, अनंता समूह का संचालन करने वाली कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड में विभिन्न आला अफसरों का 200 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम निवेश फंसा हुआ है। यह निवेश सस्ती दरों पर विला या कॉटेज का झांसा देकर और लीज-बैक के जरिए भारी सालाना रिटर्न के लालच में कराया गया था। मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, इसके अतिरिक्त जयपुर के एक अन्य बड़े और नामचीन बिल्डर के यहां विभिन्न नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों का 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का गुप्त और बेनामी फंड फंसा होने की खबरें हैं, जिसने पूरी ब्यूरोक्रेसी की नींद उड़ा रखी है।

 

​शिखर अग्रवाल के मामले के तूल पकड़ने और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से अधिकारियों में अपनी काली कमाई को सुरक्षित निकालने की होड़ सी मच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की संभावित एंट्री के खौफ से दर्जनों अधिकारियों ने बिल्डरों पर अपना प्रिंसिपल अमाउंट और रिटर्न तुरंत लौटाने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। लेकिन बिल्डरों के सामने इस समय अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। रियल एस्टेट कारोबार का पूरा ढांचा लैंड बैंक, जमीनों की खरीद और अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर टिका होता है, जहां नकदी हमेशा ब्लॉक रहती है।

यदि बिल्डर इस नाजुक वक्त में अफसरों का यह 1200 करोड़ से अधिक का फंड अचानक वापस लौटा देते हैं, तो उनके तमाम चालू प्रोजेक्ट एक झटके में ठप्प हो जाएंगे। इसी मजबूरी और आर्थिक तंगी के खौफ के चलते बड़े बिल्डरों के बीच भारी पैनिक और भय का माहौल बना हुआ है। ​जैसे-जैसे इस पूरे प्रकरण की कड़ियां जुड़ रही हैं, जयपुर के सबसे महंगे और प्रीमियम इलाकों में अफसरों द्वारा खड़ी की गई बेनामी संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा बाहर आने लगा है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके एक रसूखदार पूर्व अधिकारी के पास मेन अजमेर रोड पर लगभग 4,000 वर्ग गज का एक विशाल कमर्शियल प्लॉट होने की बात सामने आई है, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी जा रही है।

इसके अलावा जेडीए आयुक्त रहे एक अधिकारी भी जवाहर सर्किल के पास स्थित अपनी जमीन से छुटकारा पाना चाहते है । इस जमीन की कीमत 120 करोड़ बताई जाती है । दलालो के बीच यह सौदा तेजी से मूवमेंट में है । सिर्फ अजमेर रोड ही नहीं, बल्कि कालवाड़ रोड, वैशाली नगर एक्सटेंशन और शहर के अन्य तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भी कई अन्य अधिकारियों के भारी बेनामी निवेश की जानकारियां धीरे-धीरे उजागर हो रही हैं। यदि इस मामले में आयकर विभाग और ईडी की एंट्री हो गई, तो कई बड़े अफसरों का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है।दरअसल में जयपुर में बड़े बड़े बिल्डरों का बिजनेस ही भ्रष्ट आई ए एस,आई पी एस अफसरों के पैसों से ही चलता है।इस बिजनेस में छोटी-मोटी टांग भ्रष्ट आर ए एस,आर पी एस ओ पुलिस के थानेदार भी फंसा देते हैं। सबके मजे ही मजे हैं।

झालानी जी, आपको तो फिर एक ऐसे आर ए एस से आई ए एस में पदोन्नत अफसर की अकूत संपत्ति का पता होगा,जो जेडीए सचिव, निदेशक स्थानीय निकाय और आयुक्त हाऊसिंग बोर्ड रहने के बाद रिटायरमेंट की औपचारिक तिथि से लगभग एक साल पहले स्वेच्छिक सेवानिवृत लेकर एक मिडिया हाऊस को संभाल रहे हैं।यह अधिकारी हर मुख्यमंत्री के काल में और हर मुखिया सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव के टायम में सबका लाडला रहा है और इस पर कोई पत्रकार भी टिप्पणी लिखने से घबराते हैं ऐसा क्योंCm साहब आप अपनी ईमानदारी से काम करो ओर जो भ्रष्ट है उनको सजा दो….

आप बिल्कुल सही काम कर रहे हो

इन नौकरशाहों ने देश को अंग्रेजों से भी ज्यादा लूटा है।
सभी बड़े अधिकारियों की सम्पत्ति की जाँच की जानी चाहिए। आय से अधिक संपत्ति को जब्त कर संबंधित अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।

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I doubt something will happen because “everyone” is involved

When we say Everyone which means Indirectly Everyone is involved.

#कोटपूतली में #पदास्थापित रह चुके IAS IPS RAS RPS
को अगर Cbi या Ed अपनी जांच में शामिल कर लें तो बहुत बड़ा गिरोह सरकार के हत्थे चढ़ जायेगा।

साभार (https://www.facebook.com/share/p/19D9aXmZ2q/)

https://www.facebook.com/share/v/1ABQWDgo64/

यदि #उत्तराखंड में भी देहरादून में मसूरी, थानों, लाल तप्पड़, हरिद्वार में लक्सर बिहारी गढ बुगगावाला हंसनावाला खेड़ी शिकोहपुर आदि हल्द्वानी काशीपुर रुद्रपुर, और सहारनपुर जनपद के उतराखडं से लगे क्षेत्रों में ही छान बीन हो जाय तो बहुत से नेता पूर्व आईएएस आईपीएस नंगे हो जायेंगे। सो, दो सौ बीघा जमीने किन किन माननीय के रिश्तेदारों के नाम हैं, वहां दलाल ही बता देंगे, यह भी पता चलेगा कि दिल्ली और हरियाणा का #भू_माफिया कैसे उत्तराखंड को #लील चुका है! और कैसे #दलालों ने नदी में बह चुकी जमीनों के बदले #ग्राम_समाज की #सरकारी_भूमि की #खुर्दबुर्द कर बेच दी और किस किस तरह से #वन_विभाग व ग्राम समाज की #हजारों_एकड़ भूमि को #समुदाय_विशेष के लोग तहसील से मिल कर #अपने_नाम लगा चुके हैं। बस कुछ बड़ी बड़ी सरकारी ऐजेसिंयों के माध्यम से जांच निष्ठा पूर्वक एवं निष्पक्ष हो जाय।
“मोर व नील गाय मार कर खा रहे हैं, यहां बहुत हैं, सब चलता है कौन पूछता है, जो रात खेतों में पहरा देते हैं वही मार देते हैं, जो जांच में आता है उसे ही फार्म हाउस में बिठा कर बिरयानी खिला देते हैं, यहां तार बाड़ वाले बड़े बड़े प्लाट और फार्म हाउस नेताओं व अधिकारियों या उनके रिश्तेदारों के ही तो हैं, जांच कौन करेगा!” ऐसा सुन कर उत्तराखंड का #घटाटोप भी पता चलता है। ✍️ हरीश मैखुरी