
सच यह है कि जो अंकिता भंडारी की लाश पर राजनीतिक पकोड़े तलने के लिए अंकिता के माता पिता को अपना राजनीतिक #टूलकिट बना रहे हैं कार्यवाही तो उनपर होनी चाहिए थी। बुजुर्गवर को उनकी सुरक्षा की दृष्टि से अभिरक्षा में लेना भी महत्वपूर्ण पहलू है।
बताते चलें कि धामी सरकार की कड़ी पहल से ही अंकिता भंडारी के हत्यारोपी २४ घंटे के भीतर जेल भेजे गए, अंकिता के परिजनों की मांग पर सरकार द्वारा तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गये, हाई कोर्ट से अंतिम निर्णय आने तक अपराधीयों को जमानत तक नहीं मिल सकी, और हाईकोर्ट से उन्हे आजीवन कारावास हुआ। अब माता-पिता की मांग पर CBI जांच के आदेश हुए हैं। स्पष्ट है कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए के लिए हर स्तर पर दृढ़ता से खड़ी रही धामी सरकार, पी रेणुका देवी की देखरेख में SIT जांच, 500 पन्नों की चार्जशीट और लगभग 100 गवाहों के आधार पर की गयी कठोर कड़ी पहल। पीड़ित परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता और रोजगार भी दिया गया।
पुत्री शोक की दृष्टिगगत उनके माता के साथ पूरे उतराखडं की सहानुभूति व संवेदना है।
इसीलिए विधान सभा चुनाव के निकट आते ही #अर्बन_नक्सल, #बामपंथियों और #कांग्रेसियों में #अंकिता_भंडारी की लाश पर #राजनीतिक रोटियां सेकने और राजनीतिक #नरेटिव सैट करने की # होड़ भी बढ़ गयी है, क्योंकि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के गंगा-भोगपुर स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट कार्यरत थीं। सितंबर 2022 में शारीरिक सेवा नहीं देने के कारण उस निरपराध बच्ची की कुछ दरिंदों द्वारा हत्या कर दी गई, उस लड़की का शव चीला नहर से बरामद मिला। इस केस में धामी सरकार की कड़ी पहल और पुलिस एसआईटी की कठोर कार्यवाही के चलते अंकिता भंडारी के हत्यारों पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट का मालिक और पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा), अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर हैं। इन तीनों आरोपियों को मई 2025 में अपहरण और हत्या के आरोपों में दोषी ठहराते हुए हाईकोर्ट नैनीताल से आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है, हत्यारे जेल में हैं। अब इस विषय को उठाना कोर्ट की #अवमानना है। फिर भी यदि अब भी किसी के पास साक्ष्य हैं तो #उचित_फोरम पर प्रस्तुत करें ताकि अंकिता के दुर्दांत हत्यारों को जनता के टैक्स से जेल में सरकारी बिरयानी खिलाने वाला संविधान का कानून जागे और उन्हें फांसी पर लटकाये। पर नहीं साहब इन ऐजेंडेबाजों को तो अंकिता भंडारी की लाश पर अपने राजनीतिक आकांक्षाओं पकोड़े सेकनें हैं।
इन रामद्रोही ऐजेंडेबाजों को पता होना चाहिए अंकिता भंडारी के बाद २०० से अधिक बालिकाएं उत्तराखंड में #लव_जिहाद की शिकार बनाई जा चुकी हैं। जबकि उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए बनाए गए ‘उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ (UFRA) के अन्तर्गत वर्ष 2018 से जनवरी 2026 तक 62 प्रकरण पंजीकृत हैं।
आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार केवल वर्ष 2023 में 20 केस और वर्ष 2025 में 18 केस पंजीकृत हुए। जून 2023 तक उस वर्ष 52 विशेष शिकायतों के प्रकरण सामने आये, लेकिन अभी तक केवल पांच केसों का पूरा ट्रायल हो सका है। ऐसे में बालिकाएं बचेंगी??
विपक्षी यदि इतने ही बालिकाओं के प्रति सचेत व संवेदनशील हैं तो उठाते क्यों नहीं कांग्रेसी और बामपंथी लवजिहाद जिहाद की शिकार बच्चियों के प्रति आवाज। या लवजिहादी तुमरे राजनीतिक ऐजेंडे पर फिट नहीं बैठते??✍️ हरीश मैखुरी
