योगी आदित्य नाथ जी देश और भारतीय धर्म संस्कृति के शत्रुओं को कभी क्षमा नहीं करते

योगी आदित्यनाथ जी देश और भारतीय धर्म संस्कृति के दुश्मनों को कभी क्षमा नहीं करते हैं। संविधान के प्रावधानों के मुताबिक जो भीषण से भीषण सजा हो सकती है वो योगी जी अपने दुश्मन को जरूर देते हैं।

कुछ ऐसा ही हुआ था लखनऊ में जब ओबीसी मोर्चा नामक एक संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं ने श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां लिखी हुई प्रतियों को जलाया था। सोशल मीडिया पर विडियो वायरल हुआ। अखबारों में खबर भी छप गई। सबको लगा कि मामला खत्म क्योंकि ये सब बड़े बड़े नेताओं के इशारे पर किया जा रहा था।

लेकिन जल्द ही योगी जी का फरमान आ गया… सजा ऐसी होनी चाहिए कि हिंदूद्रोहियों की 7 पुश्तों को पता चल जाए। आखिर वही हुआ दो गिरफ्तारियां हुईं… पहला मोहम्मद सलीम और दूसरा सत्येंद्र कुशवाहा। दोनों को अरेस्ट कर लिया गया लेकिन बड़ी बात ये है कि इन दोनों पर रासुका भी लगा दी गई।

अब जरा समझिए कि रासुका लगने का मतलब क्या है? जिस पर रासुका लगती है उसको सरकार बिना कोई कारण बताए 12 महीनों तक नजरबंद रख सकती है। क्योंकि इसकी FIR भी नहीं दर्ज की जाती इसलिए मामला NCRB में भी नहीं जाता है। इसके अलावा रासुका जिस पर लगती है उसे ना तो कोई वकील ही मिलता है और ना ही कोई सुनवाई होती है। यानी 12 महीने तक अनवरथ अथक… पुलिसिया डंडे का परसाद मिलता है। योगी जी की पुलिस अच्छे से सिंकाई कर देती है।

अब समझने वाली बात ये है कि स्वामी प्रसाद मौर्य तो अपने कार्यकर्ताओं को भड़का कर निकल गया। और अब ये कार्यकर्ता 12 महीने तक जेल की चक्की पीसेंगे और इनके घर की बहन बेटियों को इन्हें छुड़ाने के लिए दारुण कष्ट भोगना पड़ेगा। वकीलों के चक्कर लगाने होंगे। कोर्ट कचहरी में घिसाई होगी… सो अलग। सहानुभूति के नाम पर लोग क्या खेल करने की कोशिश करते हैं ये सब बताने की जरूरत नहीं है।

बहरहाल इसमें सबसे अहम बात ये है कि ये मोहम्मद सलीम कौन है? और ये तो ओबीसी मोर्चा का है भी नहीं तो क्या करने के लिए मानस की प्रतियां जलाने आया था?

दरअसल ये बड़ा सवाल है कि रासुका तभी लगाई जाती है जब देश की सुरक्षा को खतरा हो। क्या रासुका इसलिए लगी है क्योंकि इसमें मोहम्मद सलीम नामका एक मुस्लिम भी शामिल था। क्या इसका आईएसआई से कोई रिश्ता है। या फिर क्या ये हिंदुओं के बीच जातीय दंगे करवाने की साजिश कर रहा था। ये बड़ा सवाल है।

इसके अलावा सतनाम सिंह लवी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने लखनऊ के पीजीआई थाने में ये केस दर्ज करवाया क्योंकि इसी केस दर्ज होने के बाद ही अब इन हिंदूद्रोहियों को इतनी कठोर सजा मिल रही है। बहुत बहुत धन्यवाद सतनाम जी।