मोदी लम्बी सोच रखते हैं बीस वर्षों से लटकी यूरोपीयन संघ के साथ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील संपन्न ट्रंप को बहुत बड़ा झटका, अब ट्रंप 100% टैरिफ़ भी लगाते हैं तो भी हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा, मोदी सरकार UGC पर हाई लेवल कमिटी बनाने की तैयारी, दुर्दांत लुटेरे हिंसक आक्रांताओं ने ताजमहल और लालकिले बनवाये?, यूजीसी पर केन्द्र की हाईलेबल कमेटी की तैयारी

ये हैं यूरोपीय यूनियन की राष्ट्रपति उर्सुला वॉन डेर लेयेन…..

अमेरिका चाहता था कि

👉 रूस से तेल खरीदने को लेकर

👉 EU, भारत पर प्रतिबंध लगाए

लेकिन सामने थे मोदी जी…

और फिर जो हुआ, वो कूटनीति की मास्टरक्लास बन गया 👇

यूरोपीय यूनियन की राष्ट्रपति को

🇮🇳 भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाकर बुला लिया।

कर्तव्य पथ पर

👉 करीब दो घंटे तक भारत की शान, अनुशासन और शक्ति के बीच उन्हें खड़ा रखकर

👉 दिखा दिया कि नया भारत क्या होता है।

उन्हें दिखाई गई

🇮🇳 ऑपरेशन सिंदूर की झांकी —

साफ संदेश था: भारत शांति चाहता है,

लेकिन ज़रूरत पड़ी तो जवाब भी जानता है।

कर्तव्य पथ पर ही

👉 रूसी S-400 डिफेंस सिस्टम

👉 और रूसी लड़ाकू विमानों के करतब

पूरी दुनिया ने लाइव देखे।

यूरोपीय यूनियन की राष्ट्रपति ने खुद कहा —

“This is the Honor of a Lifetime”

…..और अब वही यूरोप 👇

👉 भारत के साथ

👉 इतिहास के सबसे बड़े कहे जा रहे

👉 “Mother of All Trade Deals” – Free Trade Agreement

पर हस्ताक्षर करने जा रहा है।

दुनियां समझ चुकी है —

भारत अब दबाव में नहीं,

बराबरी और शर्तों पर दोस्ती करता है।

मोदी हैं…तो मुमकिन ही नहीं,पक्का है। 🇮🇳🚩

कितने अफ़सोस की बात है!!!!

आज यूरोपियन यूनियन के साथ भारत के फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन हो रहे हैं। यह एग्रीमेंट, जो पिछले दो दशकों से पेंडिंग था, आज साइन हो रहा है।

यह एग्रीमेंट यूरोपियन मार्केट के दरवाज़े खोलेगा, जो US से दोगुना बड़ा है।

भारत के मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर को बहुत बड़ा बूस्टर डोज़ मिलेगा।

अगर ट्रंप 100% टैरिफ़ भी लगाते हैं, तो भी हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा।

जर्मनी और फ़्रांस की हाई टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स हमें सस्ते में मिलेंगे।

हमारा आसमान और पिनाका यूरोपियन स्पेस में उड़ान भरेंगे।

यह एक ऐसा एग्रीमेंट है जिसके अनगिनत फ़ायदे हैं।

यह एक खूबसूरत एग्रीमेंट है जो पूरी दुनिया का ध्यान भारत की तरफ़ झुकाएगा।

इस एग्रीमेंट के लिए मोदी, जयशंकर और पीयूष गोयल को बधाई देने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं…. 

लेकिन…… जय हिंद 🇮🇳🚩

पिछले पूरे हफ़्ते, UGC-2026 को लेकर सोशल साइट्स पर आग लगी रही.. 

जो लोग हमारी आलोचना करते हैं, उन्हें मोदी की पार्टी और सरकार में उन लोगों की भी आलोचना करनी चाहिए जो उनके पैरों में साँप फेंक रहे हैं… वे हमारे पीछे पड़े हैं। .

चलते रहिए…. 

FTA एग्रीमेंट के लिए मोदी सरकार को दिल से बधाईहम कह रहे थे न….. मोदी का काम उनको ही करने दो… और यूजीसी का मतलब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग है न कि कोई पुलिस थाना न स्टूडेंट्स का डायरेक्ट कोई मतलब…UGC पर बड़ी खबर!

मोदी सरकार UGC पर हाई लेवल कमिटी बनाने की तैयारी में।

शिक्षाविद, अधिकारियों और UGC को मिलाकर बनाई जा सकती है उच्चस्तरीय कमेटी।
मोदी जी नासूर का जड़ मूल से इलाज करते हैं। UGC पर जल्द हाई-लेवल कमेटी का गठन होगा। 15 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने UGC को दिशानिर्देश तैयार करने का आदेश दिया। कॉमरेड इंदिरा जयसिंह और श्रीमती तडवी द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर दिशानिर्देश बनाने के लिए 8 सप्ताह की समय-सीमा दी गई। इसलिए ये दिशानिर्देश सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार ही बनाए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात, ये दिशानिर्देश, ना सरकार ने बनाएं हैँ ना ही संसद की किसी समिति ने, ये दिशानिर्देश, यूजीसी की एक एक्सपर्ट समिति ने बनाये हैँ जिसमें सरकार या संसद का कोई दखल नहीं था
• शीतकालीन सत्र : 1 दिसंबर 2025 से 19 दिसंबर 2025।
• 12 दिसंबर 2025 : विधेयक – VBSA अर्थात विकसित भारत शिक्षा अधिक्षण विधेयक मोदी सरकार द्वारा जारी किया गया।
• लोकसभा : एक ही उच्च शिक्षा नियामक स्थापित करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर 2025 को विधेयक को मंजूरी दी थी। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया।
• उद्देश्य : यूजीसी, AICTE और NCTE को समाप्त करना और उसकी जगह एक ही उच्च शिक्षा नियामक स्थापित करना। UGC इतिहास बन जाएगा!!
• तो वर्तमान नियमों का क्या होगा? : कानूनी शून्यता से बचने के लिए, मौजूदा अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए सभी उपविधि (नियम, दिशानिर्देश) नए कानून के अंतर्गत नया प्राधिकरण और उससे सम्बंधित नए नियम बनाए जाने तक लागू रहेंगे। उसके बाद वे भी इतिहास बन जाएंगे। यही चाहिए ना आपको, कि वर्तमान नियम और गाइडलाइन्स को बदला जाए… तो वही तो होने वाला है?
UGC के 1956 के कानून को कूड़ेदान में डालकर, UGC को ही इतिहास बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। स्मरण कीजिये, कैसे 2023 के सर्वोच्च न्यायालय के दिल्ली को लेकर दिए निर्णय को संसद में नए कानून को लाकर पलटा गया था, अब वही होने जा रहा है!!
2026 में नये कानून के अंतर्गत अब नए गाइडलाइन्स बनेंगे, और सामान्य वर्ग के विरुद्ध वामपंथियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बन्दूक रख कर चलाने वाले षड़यंत्र का अंत होगा.और ये सब वही मोदी कर रहा जिसको ना जाने कैसे कैसे अपशब्द बोले जा रहे हैँ!
लेकिन समान शिक्षा का अधिकार सबको है न कोई किसीको प्रताड़ित करे न खुद होये…

बहुत समय से एक भ्रम फैलाया जा रहा है…

योगी जी को मोदी जी – शाह जी पसन्द नहीं करते।
फडणवीस को मोदी जी – शाह जी पसन्द नहीं करते।
गडकरी जी को मोदी जी -शाह जी पसन्द नहीं करते।
मोहन भागवत जी और मोदी जी में नहीं पट रही।

हिमान्ता विश्व शर्मा जी को मज़बूरी में मुख्यमन्त्री बनाया, वरना इनकी पसन्द तो सर्वानंद सोनवाल थे। आदि…

बचपन से कॉलेज तक ऐसी ही बातें अटल जी और आडवाणी जी के बारे में भी सुनता था।

पिताजी कहते थे, कि जो लोग ऐसी निराधार बातें करते हैं, वे शायद जानते ही नहीं कि संघ और भाजपा क्या है…? ये लोग वोटरों को कन्फ्यूज करने और उनको हतोत्साहित करने के लिये ऐसा भ्रम फैलाते हैं। अन्ततः टुलकिट का हिस्सा हैं, या जाने अनजाने उसके द्वारा इस्तेमाल हो रहे हैं।

जाकर मनोज सिन्हा जी से पूछिये। अमित शाह जी ने ख़ुद योगी जी का नाम मुख्यमन्त्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया था। जबकि पार्टी में कुछ लोगों की राय अलग थी। इतना ही नहीं, बाकायदा फोन कर उन्हें बताया भी था और दिल्ली आने- जाने के लिये चार्टर प्लेन भी अमित शाह जी ने ही भिजवाया था।

अमित शाह सबसे अधिक निशाने पर रहते हैं, क्योंकि वे शंकर की भांति विष पीकर पार्टी के लिये कड़वे फैसले लेते हैं। इतना ही नहीं, वे अपने फैसलों को Own भी करते हैं। कभी किसी दूसरे को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया।

धारा 370 हटाना हो, देश से नक्सलवाद का खत्मा हो, आ&तंकि£यों के Financial मॉड्यूल ध्वस्त करना हो, सरकार बनाने के लिये जोड़ तोड़ करना हो, ये सारे कठिन काम अमित शाह जी के हिस्से में है।

आज जो मोदी जी की छवि सूर्य की भांति चमक रही है, वो इसलिये कि अमित शाह जी ने अपने ऊपर कालिख लेना स्वीकार किया। आज जो भाजपा का “अपराजेय” स्वरूप है, उसे अमित शाह जी ने अपनी मेहनत से खड़ा किया है।

उनकी मेहनत, उनकी सूझबूझ से हर राज्य में एक टीम तैयार हुयी है। योगी जी, फडणवीस, हिमांता विश्व शरमा, मोहन यादव, अन्नामलाई आदि जैसेउसी टीम के हिस्से हैं।

“फूट डालो, राज करो” वालों से सावधान रहें…!
😍😍😍🇮🇳🇮🇳🇮🇳🥰🥰🥰🚩🚩🚩

जय हिन्द 🙏🇮🇳

अफगानिस्तान ( गांधार प्रदेश )

जेहादियें ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा के चारों ओर विस्फोटक लगाने में तीन दिन का वक्त लगा. उसके बाद तारें नज़दीकी मस्जिद तक बिछाई गईं जहां से उन्हें चार्ज किया गया और “ जेहादी नारों “ की आवाज़ों के बीच विस्फोट कर दिया गया..
जेहादी तालिबान कमांडर को उम्मीद थी कि वह न सिर्फ़ भगवान बुद्ध को नष्ट कर देंगे बल्कि पूरी पहाड़ी को ही गिरा देंगे लेकिन विस्फ़ोट से उस बड़े बुद्ध की सिर्फ़ टांगें ही उड़ाई जा सकीं..
उसके बाद से वह रोज़ दो या तीन विस्फोट करते थे ताकि बुद्ध को पूरी तरह नष्ट किया जा सके.”
“हम प्रतिमा में ड्रिल करके उनमें डाइनामाइट लगाते थे. इस पूरी प्रक्रिया में 25 दिन लगे.”
जब भगवान बुद्ध की प्रतिमा पूरी तरह नष्ट हो गई तो तालिबान जश्न मनाने लगे, “वो हवा में गोलियां चला रहे थे, नाच रहे थे और कुर्बानी के लिए नौ गाएं लेकर आए थे.”
और महीनों तक जश्न मनाया था ..!!

और ये बात करते है कुतुंबिनार ताजमहल लाल किला बनाने की…?

बहुत समय से एक भ्रम फैलाया जा रहा है

*योगी जी को मोदी- शाह पसंद नहीं करते
*फडणवीस को मोदी-शाह पसंद नहीं करते
*गडकरी जी को मोदी-शाह पसंद नहीं करते
*मोहन भागवत और मोदी जी में नहीं पट रहा
*हिमांता विश्व शरमा जी को मजबूरी में मुख्यमंत्री बनाया, वरना इनकी पसंद तो सर्वानंद सोनवाल थे। आदि

बचपन से कॉलेज तक ऐसी ही बातें अटल जी और आडवाणी जी के बारे में भी सुनता था।

पिताजी कहते थे, कि जो लोग ऐसी निराधार बातें करते हैं, वे शायद जानते ही नहीं कि संघ और भाजपा क्या है? ये लोग वोटरों को कन्फ्यूज करने और उनको हतोत्साहित करने के लिए ऐसा भ्रम फैलाते हैं। अंततः #toolkit का हिस्सा हैं, या जाने अनजाने उसके द्वारा इस्तेमाल हो रहे हैं।

जाकर मनोज सिन्हा जी से पूछिए। अमित शाह जी ने खुद योगीजी का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया था। जबकि पार्टी में कुछ लोगों की राय अलग थी। इतना ही नहीं, बाकायदा फोन कर उन्हें बताया भी था और दिल्ली आने- जाने के लिए चार्टर प्लेन भी अमित शाह ने ही भिजवाया था।

अमित शाह सबसे अधिक निशाने पर रहते हैं, क्योंकि वे शंकर की भांति विष पीकर पार्टी के लिए कड़वे फैसले लेते हैं। इतना ही नहीं, वे अपने फैसलों को Own भी करते हैं। कभी किसी दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराया।

धारा 370 हटाना हो, देश से नक्सलवाद का खत्मा हो, आतंकियों के Financial मॉड्यूल ध्वस्त करना हो, सरकार बनाने के लिए जोड़ तोड़ करना हो, ये सारे कठिन काम अमित शाह जी के हिस्से में है।

आज जो मोदीजी की छवि सूर्य की भांति चमक रही है, वो इसलिए कि अमित शाह ने अपने ऊपर कालिख लेना स्वीकार किया। आज जो भाजपा का “अपराजेय” स्वरूप है, उसे अमित शाह ने अपनी मेहनत से खड़ा किया है।

उनकी मेहनत, उनकी सूझबूझ से हर राज्य में एक टीम तैयार हुई है। योगी, फडणवीस, हिमांता विश्व शरमा, मोहन यादव, अन्नामलाई आदि उसी टीम के हिस्से हैं।

“फूट डालो, राज करो” वालों से सावधान