सवर्ण विरोधी मानसिकता : भाजपा को लाना चाहिए था यूसीसी और ले आयी यूजीसी, मोदी और बीजेपी के हर नियम कानून को सड़क पर लाने वाली कांग्रेस भी UGC के इस काले नियम पर चुप

भारतीय जनता पार्टी ने #यूजीसी के रूप में पड़ी लकड़ी लेली है, लाना था UCC कानून, जनसंख्या नियंत्रण कानून, गो हत्या निरोधक कानून, गुरूकुल व्यवस्था कानून लेकिन भाजपा ले आयी UGC कानून। इस कानून पर पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों इसकी आड़ में योगी आदित्यनाथ को तारगेट करने का हथियार भी मिल गया!! 

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तत्काल आवश्यकता है जातिवादी नमाजवादी #विसंविधान हटाकर #समान_नागरिक_संहिता लागू करने की, खोलने थे #गुरूकुल ले आये #यूजीसी यानी शिक्षण संस्थानों में जातीय जहर का विसंम प्रावधान,  #गाय_माता को राष्ट्रीय पशु घोषित कराना था, बढ़ गया बीफ एक्सपोर्ट। देश में सभी जगह की सड़कों भवनों से दुर्दांत हिंसक लुटेरे मुगल आक्रांताओं और अंग्रेजों के नाम हटा कर देश के लिए बलिदान देने वालों के नाम रखने थे, कोर्ट के जज कमीशन से रखने थे, लेकिन ले आये शिक्षण संस्थानों में जातीय जहर के बीज रोपित करने वाला #यूजीसी कानून। उत्तराखंड में हर गांव जोड़ाना था मोटर सड़कों से, बदरी गाय पालकों को देना था एक हजार रूपए प्रति गाय प्रति माह। लेकिन खुल रहे हैं दारू के ठेके। इससे भाजपा का सवर्ण विरोधी चेहरा भी अनावृत हो गया!  आज भाजपा कांग्रेस की अपठित कार्बन कापी बनती जा रही है। विनाश काले विपरित बुद्धि। क्यों अपने हाथों से अपना विनाश कर रहे हैं भाजपा वालों! क्यों हिन्दूओं की आशाओं का गला घोट रहे हो? क्यों कांग्रेस कम्युनिस्ट आदि सैक्यूलर #दल्लों की तरह बांटो और राजनीति कर रहे हो? फिर उस नारे का औचित्य क्या रह गया कि #बंटेंगे तो #कटेंगे!
क्या भाजपा भी पूरी तरह अब कांग्रेस की अपठित कार्बन कापी बन चुकी है! जो राजनीतिक भेदभाव अब कोलेजों और यूनिवर्सिटीयों में भी करने जा रही रही है। वह शिक्षण संस्थानों को भी वोट बैंक के रूप में देख रही है? ये काला काननू न्यायसंगत नहीं अपितु असमानता बढाने वाला कानून है। विषम प्रावधान है।
1-झूठी शिकायत पर क्या प्रावधान है??
2- क्या यह शिक्षा सुधार है या राजनैतिक एजेंडा???
3- जरनल वर्ग के लिए क्या सुरक्षा है??
4- कानून का दुरुप्रयोग न हो इसके लिए क्या प्रावधान है??
5- फर्जी शिकायत पर शिकायतकर्ता के लिए दंड का क्या प्रावधन है?
पहले से ही एक कांग्रेसी काला कानून SCST एक्ट कम था जो ये UGC कानून भी ले आये?
वैसे ही कांग्रेस ने आरक्षण व्यवस्था के षड्यंत्र के अन्तर्गत #सवर्ण को पहले से ही #वंचित और #प्रतिबंधित करने का सरकारी दमनात्मक षड्यंत्र चला रखा है। उपर से तुम एक और काला कानून UGC ले आये।

इधर हम देख रहे हैं शंकराचार्य और योगी सरकार की लड़ाई धीरे धीरे सोशल मीडिया पर क्षत्रिय बनाम ब्राह्मण होती जा रही है, क्षत्रिय योगी जी को और ब्राह्मण शंकराचार्य को सही बताने में अपनी पूरी शक्ति घोड़ा खोले हुए हैं।

   अरे क्षत्रिय सम्राटों एक बात को समझ लो योगी जी देश के श्रेष्ठ मुख्यमंत्री हैं और देश के भावी प्रधानमंत्री हैं, उनकी लड़ाई लड़ने और उनके पक्ष में नारेटिव बनाने के लिए उनके पास पीआर व IT टीम है, जो अपना काम अच्छे से कर भी रही है।

और हे विप्रजनों विद्वानों आपसे भी करबद्ध निवेदन है कि आप #अविमुक्तेश्वरानंद की चिंता छोड़ दें वे शंकराचार्य हों भले कम हों लेकिन कांग्रेस आचार्य अधिक बन चुके हैं, उनके पास भी एक से बढ़कर एक धनाढ्य अरबपति शिष्यों की भीड़ है जो उनकी लड़ाई लड़ सकते हैं और लड़ रहे हैं।

यह काण्ड एक बड़े षडयंत्र के अन्तर्गत  इसीलिए करवाया गया ताकि यूपी से #योगी_महाराज को #ठिकाने लगायें और #यूजीसी जैसे काले कानून से भी ध्यान हट जाय। लाना था #यूसीसी और ले आये #यूजीसी।

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तो हे #महाराणा_प्रताप और #परशुराम के वंशजों इस फर्जी विषय को छोड़कर #UGC पर ध्यान दो इसकी लड़ाई लड़ो क्योंकि यह SCST और आरक्षण कानून की भांति ही आपके विनाश का #बीज बोया जा चुका है। और आपकी लड़ाई लड़ने वाला दूसरा कोई नहीं है, आज नहीं लड़े, आज नहीं विरोध किये तो याद रखना आने वाली पीढियां आपको कभी क्षमा नहीं करेंगी।

भाजपा सहित सभी दलों ने फूट डालने के लिए ही सही अन्य जातियों के लिए कुछ न कुछ व्यवस्था की है लेकिन सवर्णो के लिए कोई सुविधा नहीं दी, उल्टे विसम विधान बना कर ठिकाने ही लगाया है। आज की आवश्यकता है सभी जातिवादी और मजहबी #विसंविधान निरस्त किए जाय। और देश में तत्काल प्रभाव से समान नागरिक संहिता UCC लागू करें। देश भर में पांच लाख गुरूकुल और पांच लाख गोशाला खोलें, सभी पदों पर जाति की जगह योग्यता को प्राथमिकता दें सेना व सुरक्षा ऐजेसिंयों में साहसी बलशाली योद्धाओं को ही रखें, इससे देश भी सुरक्षित होगा सबको स्थाई रोजगार की व्यवस्था बनेगी। (फोटो फेसबुक से लिए गये हैं) ✍️हरीश मैखुरी

सुप्रीम कोर्ट के CJI ब्राह्मण हैं यानि सवर्ण हैं और सुप्रीम कोर्ट ने UGC रेगुलेशन के लिए आदेश दिए….!!

UGC के चेयरमैन ब्राह्मण यानि सवर्ण हैं और UGC ने ये Regulations बनाए…!!

इस रेगुलेशन के लिए जो पार्लियामेंट्री कमेटी बनी उसके अध्यक्ष कॉंग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह थे जो खुद सवर्ण हैं….!!

इस रेगुलेशन का विरोध करने वाले भाजपा का विरोध कर रहे हैं जिसका अध्यक्ष सवर्ण है….!!

इस रेगुलेशन का विरोध करने वाले UP के चुनाव में योगीजी और भाजपा को सबक सिखाने की बात कर रहे हैं जबकि योगीजी खुद सवर्ण हैं….!!

कमाल है ना सवर्ण ही आदेश दे रहा है सवर्ण ही नियम बना रहा है सवर्ण ही विरोध कर रहा है और सवर्ण को ही धमकी दी जा रही है…..!!

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यदि विरोध करना ही है तो इस नियम करें ना कि भाजपा का! क्योंकि भाजपा की जगह कांग्रेस यदि सत्ता में होती तो इससे भी खतरनाक एक बनाती जैसा कि फूट डालो और राज करो के लिए अनेक जातिवादी कानून पहले भी बनाती रही है।

वैसे भी देखें तो मोदी और बीजेपी के हर नियम और कानून को सड़क पर लाने वाली कांग्रेस, UGC के इस नियम पर चुप है ।
दरअसल इन्हें भी सवर्णों से कोई सरोकार नहीं है ।
कांग्रेस सत्ता मे आई तो इस नियम को और भी भयावह मुस्लिम जातियों को OBC बना कर कर देगी। हमे हमारी बात इसी सरकार से मनवानी है और इस नियम मे सुधार की माँग रखनी है ।
“घर मे यदि चूहे हो जाए
तो उस से निपटने के लिए सांप नहीं पाला करते ।
चूहे राशन ही खाएँगे सांप आपके बच्चो को खा जायेंगे”

 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा बनाए गए नए नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. ये नियम पक्षपातपूर्ण और जातिवादी नफरत बढ़ाने वाला है…
यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई…. दुर्भाग्य देखिए कुत्तों और आतंकवादियों के प्रकरण को तत्काल सुनने वाले कोर्ट ने UGC?? जैसे आधी जनसंख्या से जुड़े महत्वपूर्ण प्रकरण पर दो माह बाद की तारीख दी है। 

डीप स्टेट द्वारा वित्तपोषित वोक लेफ्ट इकोसिस्टम हाल ही में यूजीसी नियमावली 2026 के पीछे है

यहाँ सभी विवरण हैं-

▪️ 2019 में, वामपंथी वकील इंदिरा जयसिंह ने रोहित वेमुला की मां की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर की ताकि यूजीसी को निर्देशित किया जा सके कि वह कैंपस में भेदभाव रोकने के लिए नियम बनाए

▪️ सुनवाई जनवरी 2025 में शुरू हुई, सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को 6 सप्ताह में कार्रवाई करने को कहा

▪️ 27 फरवरी 2025 को, यूजीसी ने नए नियम लाए जो उचित और अच्छे थे

▪️ वामपंथी इकोसिस्टम ने इस पर भारी विरोध किया, कहा कि 2025 के नियम 2012 के नियमों से भी कमजोर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को नागरिक समाज के सदस्यों से सुझाव लेने और नियमों को संशोधित करने को कहा

▪️ सितंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को निर्देश दिया कि वे रोहित वेमुला की मां के सुझाव नियमों में शामिल करें। याद रखें कि इंदिरा जयसिंह पूरी योजना रोहित वेमुला की मां के पीछे खेल रही थीं।

▪️ इंदिरा जयसिंह ने सुझाव तैयार किए और यूजीसी को दिए ताकि नए नियमों में शामिल किए जा सकें

▪️ इस बार यूजीसी ने हार मान ली और रोहित वेमुला की मां (इंदिरा जयसिंह) के सभी सुझाव स्वीकार कर लिए और यह विवादास्पद नए नियम लाए

यहाँ 3 बातें ध्यान देने योग्य हैं

– रोहित वेमुला ने कभी जाति भेदभाव का सामना नहीं किया। ये सब वाम मीडिया द्वारा बनाई गई कहानियाँ थीं जो डीप स्टेट द्वारा वित्तपोषित हैं

– इंदिरा जयसिंह पहले डीप स्टेट सदस्यों जैसे जॉर्ज सोरोस और फोर्ड फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित थीं, उनकी एफसीआरए लाइसेंस 2016 में मोदी सरकार द्वारा रद्द कर दी गई

– इंदिरा जयसिंह 2013 के विवादास्पद निर्भया अधिनियम के पीछे थीं जिसने कई निर्दोष पुरुषों की ज़िंदगी बर्बाद कर दी। वर्तमान में वह सुप्रीम कोर्ट में 16 वर्ष की उम्र में सेक्स को वैध करने का मामला चला रही हैं

यह पूरी कहानी है

3 पंक्तियों में, यह मामला है-

▪️ इंदिरा जयसिंह और वाम इकोसिस्टम की चालाकी

▪️ सुप्रीम कोर्ट की वोकनेस

▪️ यूजीसी, सॉलिसिटर जनरल और शिक्षा मंत्रालय की कमजोरी

मैं किसी का बचाव नहीं कर रहा 

लेकिन आप मोदी को…कोर्ट के फैसले के लिए दोष नहीं दे सकते, 

मैं सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार कर रहा हूँ , इसीलिए कह रहा हूँ, 

विरोध जरूर करें लेकिन अक्ल का भी इस्तेमाल करते रहें और दबाव बनाकर रखें । मामला कोर्ट मे लड़ा जायेगा.. वही अपनी गलती सुधारेगा….

पप्पू चाहता है कि जनरेशन Z भारत को जलाए और विदेश से लेकर देश के भीतर तक पूरी लॉबी लगी है.

बहुत गहरी हैँ जड़े… बहुत ताकतवर है दुश्मन.. उसके पास बहुत सारे तरीके हैँ.. और एक सबसे प्रमुख है जाति के नाम पर..

2014 के बाद से जाति के नाम पर लड़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ा है.. अब यहाँ तक पहुँच गये..