मात्र 3 घंटे में हुई इस ‘Deal’ से पलटा दुनिया का खेल! भारत बना खाड़ी देशों का ‘परमाणु कवच’, US-PAK रह गए चौकन्ने, धामी सरकार का बड़ा ट्रांसपोर्ट प्लान, देहरादून समेत प्रमुख शहरों में ई-बीआरटी और रोपवे नेटवर्क की तैयारी, एआई सहायता के साथ 23 भाषाओं में उपलब्ध यूसीसी सेवाएं

*मात्र 3 घंटे में हुई इस ‘Deal’ से पलटा दुनिया का खेल! भारत बना खाड़ी देशों का ‘परमाणु कवच’, US-PAK रह गए चौकन्ने!*

दुनिया की कूटनीति में कई बार बड़े फैसले महीनों या सालों की लंबी बातचीत के बाद होते हैं, लेकिन 2026 में भारत-UAE के बीच हुई यह डील पूरे विश्व के लिए बेहद चौंकाने वाली रही।

मात्र 3 घंटे की मुलाकात ने मिडिल ईस्ट का पूरा की पूरा पावर बैलेंस बदल कर रख दिया और पाकिस्तान समेत कई देशों के लिए नया परिदृश्य तैयार कर दिया।

ये डील है ‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’

दिल्ली में UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) की प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक के दौरान एक ऐसा समझौता हुआ, जिसने अरब दुनिया की सुरक्षा की दिशा ही बदल दी। यह डील सिर्फ न्यूक्लियर पावर प्लांट संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे रणनीतिक विशेषज्ञ ‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’ के रूप में देख रहे हैं।

UAE के बाराक न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भारत की निगरानी का अधिकार मिलना इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि अब खाड़ी देशों की सुरक्षा का एक बड़ा भाग भारत के भरोसे होगा। इस प्लांट को अब भारत की कंपनी NPCIL (न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) ऑपरेट करेगी। यह प्लांट अरब दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है, और इसके लिए अब तक दक्षिण कोरिया और अमेरिका जिम्मेदार थे।

भारत की ये ‘डील’ नई सुरक्षा गारंटी

विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील सिर्फ तकनीकी साझेदारी नहीं है, बल्कि एक नई सुरक्षा गारंटी भी है। भारत के विशेषज्ञ UAE की सुरक्षा प्रणाली, वैज्ञानिक और ऑपरेशनल कंट्रोल में सीधे योगदान देंगे। यदि कोई तीसरा देश इस संयंत्र को निशाना बनाता है, तो इसे भारत के हितों पर हमला माना जाएगा। यही वजह है कि इसे ‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’ कहा जा रहा है।

पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा

इस डील से पाकिस्तान की पुरानी रणनीति पूरी तरह असफल हो गई है। बीते महीनों में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ म्यूचुअल डिफेंस डील कर अरब दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया था। लेकिन, भारत ने मात्र 3 घंटे की बैठक में ही मिडिल ईस्ट की सुरक्षा की दिशा बदल दी। UAE ने पूरी तरह से साफ़ कर दिया कि अब वह अपने सुरक्षा और ऊर्जा संसाधनों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहेगा बल्कि भारत को अपना रणनीतिक साझेदार चुना है।

खासतौर यह डील आगामी वक़्त में तेल के बाद की विश्व की तस्वीर भी बदल सकती है। UAE क्लीन एनर्जी, डेटा, AI और तकनीक पर फोकस कर रहा है। ऐसे में भारत का चुनाव उसके लिए एक स्मार्ट और विश्वसनीय विकल्प साबित हुआ। यह डील केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान और तकनीकी हस्तांतरण का नया अध्याय भी शुरू करती है।

अमेरिका और चीन की बढ़ी टेंशन

इस समझौते के बाद अमेरिका और चीन की भी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिका हमेशा से चाहता था कि खाड़ी के देश उसकी सुरक्षा छतरी के नीचे रहें, जबकि चीन अपनी तकनीक के जरिए क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा था। लेकिन भारत ने खुद को एक सुरक्षित, विश्वसनीय और रणनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी वक़्त में इस डील के तहत मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम्स की तैनाती भी हो सकती है। यह ‘सुरक्षा कवच’ भारत और UAE के बीच भाई-भाई जैसा मजबूत रिश्ता स्थापित करेगा। जहां पहले सिर्फ व्यावसायिक और सैन्य साझेदारी थी, अब यह साझेदारी भविष्य की सुरक्षा और तकनीकी विश्वास का प्रतीक बन चुकी है।

बता दे, 3 तीन घंटे की यह मुलाकात भारत के लिए मिडिल ईस्ट में एक नई सुरक्षा और रणनीतिक भूमिका की शुरुआत है। पाकिस्तान और अन्य देशों के लिए यह एक साफ़ संदेश है कि अब अरब दुनिया की सुरक्षा भारत के भरोसे भी है और यह विश्वास केवल हथियारों या सैन्य ताकत पर नहीं, बल्कि तकनीकी और रणनीतिक क्षमता पर आधारित है। *

*यूसीसी का एक वर्ष *

*एआई सहायता के साथ 23 भाषाओं में उपलब्ध यूसीसी सेवाएं*

*उत्तराखंड समान नागरिक संहिता बनी तकनीकी उत्कृटता का मॉडल*

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की सेवाएं, अंग्रेजी के अलावा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं। साथ ही आवेदक एआई की सहायता से भी यूसीसी की प्रक्रिया को समझने के साथ ही अपना पंजीकरण करवा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि, यूसीसी के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा जाए, साथ ही वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली रखा जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति स्वयं ही अपना पंजीकरण करवा सके। इसी क्रम में आईटीडीए ने यूसीसी की वेबसाइट को आठवीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं — असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी के साथ अंग्रेजी में तैयार किया है। इस तरह आवेदक अपनी भाषा के अनुसार ना सिर्फ यूसीसी के नियम, प्रक्रिया और पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ले सकता है, बल्कि अपनी भाषा में ही आवेदन भी कर सकता है। इस काम में एआई की भी मदद ली जा सकती है।

*हमारी सरकार पहले ही दिन से सरलीकरण से समाधान तक के मूलमंत्र लेकर चल रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनसामान्य को पंजीकरण में किसी तरह की मुश्किल न आए। यूसीसी तकनीकी उत्कृटता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यही कारण है कि बीते एक साल में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत नहीं आई है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

“!S!S टेरिटरी में ‘दया’ की तलाश—एक मासूमियत जिसका अंत त्रासदी में हुआ।” 🧐🌍

​”इंसान अच्छे होते हैं”—इसी एक वाक्य के भरोसे जय और लॉरेन ने अपनी सुरक्षित ज़िंदगी छोड़ दी। उनका ब्लॉग ‘Simply Cycling’ उदारवाद की मिसाल था, लेकिन ताजिकिस्तान की सड़कों पर उनका सामना उस विचारधारा से हुआ जो दया नहीं, सिर्फ विनाश जानती है।

​यह घटना उन लोगों के लिए एक ‘आईना’ है जो मानते हैं कि संवाद और प्रेम से कट्टरपंथ को जीता जा सकता है। कुछ विचारधाराएं ‘इंसानियत’ को नहीं मानतीं, वे केवल अपने ‘अकीदे’ को मानती हैं। जय और लॉरेन का जाना दुखद है, लेकिन यह सवाल भी छोड़ जाता है कि क्या हम अपनी ‘आदर्श दुनिया’ बनाने के चक्कर में ज़मीनी खतरों को भूल रहे हैं?

देहरादून22 जनवरी 2026

*धामी सरकार का बड़ा ट्रांसपोर्ट प्लान, देहरादून समेत प्रमुख शहरों में ई-बीआरटी और रोपवे नेटवर्क की तैयारी*

*आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में यूकेएमआरसी की समीक्षा बैठक, देहरादून में शहरी परिवहन परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार राज्य में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण–अनुकूल शहरी परिवहन प्रणाली विकसित करने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में देहरादून सहित प्रमुख शहरों में मेट्रो रेल, ई-बीआरटी एवं रोपवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आज सचिवालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूकेएमआरसी) द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान यूकेएमआरसी के प्रबंध निदेशक द्वारा राज्य में शहरी परिवहन को सुदृढ़ करने से जुड़ी योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

*देहरादून में ई-बीआरटी परियोजना को मिली सैद्धांतिक सहमति*
बैठक में प्रबंध निदेशक, यूकेएमआरसी ने अवगत कराया कि यूकेएमआरसी बोर्ड द्वारा देहरादून शहर में दो प्रमुख कॉरिडोरों पर ई-बीआरटी (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) परियोजना लागू करने के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी गई है। इसके लिए आवश्यक अध्ययन कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अध्ययन पूर्ण होने के पश्चात परियोजना प्रस्ताव को कैबिनेट अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाएगा। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि देहरादून शहर में लगातार बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए ई-बीआरटी जैसी पर्यावरण–अनुकूल मास रैपिड ट्रांजिट प्रणाली की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल प्रदूषण को कम करेगी, बल्कि आम नागरिकों को तेज, सुरक्षित और किफायती परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराएगी।

*हरकी पौड़ी के लिए इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना को हरी झंडी*
बैठक में हरिद्वार स्थित हरकी पौड़ी के लिए प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना पर भी चर्चा की गई। प्रबंध निदेशक ने बताया कि यूकेएमआरसी बोर्ड द्वारा इस परियोजना को अनुमोदन प्रदान कर दिया गया है तथा प्रस्ताव शीघ्र ही सक्षम प्राधिकरण को प्रस्तुत किया जाएगा। आवास सचिव ने निर्देश दिए कि प्रस्ताव को शीघ्र प्रस्तुत करते हुए आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम आवागमन सुविधा मिल सके।

*त्रिवेणी घाट–नीलकंठ रोपवे परियोजना में बड़ी प्रगति*
त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना के संबंध में प्रबंध निदेशक ने जानकारी दी कि इस परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। फॉरेस्ट क्लियरेंस स्टेज–1 की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। सचिव ने निर्देश दिए कि सभी आवश्यक अनुमोदन समयबद्ध रूप से पूर्ण कर टेंडर प्रक्रिया शीघ्र आरंभ की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा विकल्प उपलब्ध हो सके।

*नैनीताल, कांची धाम और मसूरी में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं*
बैठक में नैनीताल, कांची धाम और मसूरी में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। यूकेएमआरसी द्वारा इन स्थलों के लिए संभाव्यता अध्ययन कराया जा रहा है। आवास सचिव ने इन प्रस्तावों की सराहना करते हुए कहा कि विशेष रूप से नैनीताल और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर रोपवे परियोजनाएं यातायात जाम को काफी हद तक कम करने में सहायक सिद्ध होंगी और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी उपयोगी रहेंगी।

*देहरादून में सेकंड ऑर्डर मास ट्रांजिट पर भी मंथन*
इसके अतिरिक्त बैठक में देहरादून शहर में सेकंड ऑर्डर मास ट्रांजिट सिस्टम की संभावनाओं पर भी सचिव को अवगत कराया गया। इस पर सचिव ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक परिवहन योजना तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में यूकेएमआरसी द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। बैठक उपरोक्त निर्देशों के साथ संपन्न हुई।

*बैठक में उपस्थित अधिकारी*
बैठक में श्री ब्रजेश कुमार मिश्रा, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन; श्री संजीव मेहता, निदेशक (वित्त); श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, संयुक्त सचिव, आवास विभाग; श्री कृष्णानन्द शर्मा, कंपनी सचिव; श्री अजय बाबू, संयुक्त महाप्रबंधक (संकेतन एवं दूरसंचार); श्री सौरभ शेखर, संयुक्त महाप्रबंधक (विद्युत); श्री सर्वेश कुमार, खंड अभियंता तथा श्री अशोक डोभाल, सहायक खंड अभियंता उपस्थित रहे।