नौकरी जाए तो जाए, मंगलसूत्र नहीं उतारूंगी

“नौकरी जाए तो जाए, मंगलसूत्र नहीं उतारूंगी”—यह नारा गाजियाबाद के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र पर हिंदू महिलाओं के हंगामे का प्रतीक बना। मेटल डिटेक्टर जांच के नाम पर मंगलसूत्र हटाने के निर्देश पर महिलाओं ने जोरदार विरोध किया।

घटना का पूरा विवरण

कमला नेहरू नगर स्थित केंद्र पर भर्ती परीक्षा के दौरान महिलाओं को प्रवेश देने से रोका गया। सुरक्षा कर्मियों ने मंगलसूत्र, बिछिया जैसे आभूषण उतारने को कहा। एक महिला बोली, “यह सुहाग का प्रतीक है, आस्था का मामला। अन्य परीक्षाओं में टेप लगाकर जाने दिया जाता था।” वीडियो वायरल होने से हंगामा फैला, परीक्षा रुकी। उप-प्राचार्य इकबाल नासिर पर सख्ती के आरोप लगे

नियमों का पक्ष

आयोजकों ने तर्क दिया कि मेटल डिटेक्टर चीटिंग रोकने के लिए जरूरी। सोने-चांदी के आभूषण सिग्नल बिगाड़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य। मुंगेर जैसी घटनाओं में भी यही विवाद हुआ, जहां बाद में आश्वासन दिया गया। लाखों उम्मीदवारों वाली परीक्षा में निष्पक्षता सर्वोपरि।

महिलाओं का आक्रोश

प्रदर्शनकारियों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। “नौकरी महत्वपूर्ण, लेकिन संस्कृति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं,” चिल्लाईं। सोशल मीडिया पर #MangalsutraNotRemove ट्रेंड, समर्थकों ने लिखा “आस्था बचाओ”। कुछ ने सांप्रदायिक रंग देकर कहा अन्य समुदायों को छूट मिलती। डीएम ने हस्तक्षेप कर मंगलसूत्र हटाने पर रोक लगाई।

क्या महिला ने ठीक कहा?

भावना से सही कहा—मंगलसूत्र भावनात्मक महत्व रखता। लेकिन व्यवस्था गलत; हंगामा समाधान नहीं। आयोजक प्लास्टिक कवर या हैंड सर्च कर सकते थे। सुरक्षा और संवेदनशीलता का संतुलन जरूरी। यह सांस्कृतिक टकराव दिखाता—नियमों का सम्मान करते हुए परंपरा बचानी चाहिए। समाचार शोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

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