अजीत डोभाल जिन्होंने पाकिस्तान में भिखारी बन कर नाकाम की पाकिस्तान की प्रमाणु चालबाजी

अजीत डोभाल जिन्हें भारत का जेम्स बॉन्ड भी कहा जाता है उन्होंने 1980 के दशक में पाकिस्तान में एक भिखारी बनकर एक ख़तरनाक मिशन को अंजाम दिया था। अजीत डोभाल ने वहाँ भिखारी बनकर पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की जासूसी की थी।

इस्लामाबाद से कुछ दूरी पर कहुटा गांव था. बाहर से साधारण सा गांव, लेकिन अंदर एक कड़ी सुरक्षा में छिपा खान रिसर्च सेंटर. यहीं पाकिस्तान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पल रहा था. डोभाल जानते थे अगर यहां से सुराग न मिला तो पाकिस्तान दुनिया के सामने परमाणु शक्ति के रूप में खड़ा हो जाएगा.

लेकिन सवाल था अंदर कैसे जाएं? यहां कुत्ते तक पहचान लेते थे कि कौन अजनबी है. और तब अजीत डोभाल ने चुना एक ऐसा रूप, जिसे देखकर कोई किसी को भी शक ना हो और वो था एक भिखारी का भेष। इस मिशन में केवल उनकी जान खतरे में रही, बल्कि देश की सुरक्षा भी खतरे में जा सकती थी।

इस मिशन में अजीत डोभाल भिखारी बन कर पड़ोसी मुल्क में रहते थे और अपने मिशन पर काम करते थे। भिखारी के भेष में घूमते अजीत डोभाल को आते-जाते लोग भीख भी दिया करते थे। हालांकि, उन्हें किसी बात की कोई फिक्र नहीं थी। वह अपने मिशन पर लगे हुए थे। इस दौरान घूमते-घूमते वह एक दिन एक नाई की दुकान पर पहुंचे, जहां पर हर रोज खान रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक आया करते थे। डोभाल उस दिन भी दुकान के बाहर बैठे थे, लेकिन उनका ध्यान अंदर फर्श पर था, जहां पर बाल बिखरे थे। जैसे ही ख़ान रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक बाल कटवाकर गए। अजीत डोभाल ने सावधानी से बालों को इकट्ठा किया और गुपचुप तरीके से भारत तक पहुंचा दिया।

जब वैज्ञानिकों ने उन बालों की जांच की तो परिणाम देखकर सभी दंग रह गए. बालों में रेडिएशन और यूरेनियम के कण मौजूद थे. ये सबूत था कि पाकिस्तान गुप्त रूप से परमाणु हथियारों पर काम कर रहा है. इस एक चालाकी भरे कदम से डोभाल ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर सपनों का पूरा नक्शा भारत के सामने रख दिया। (साभार)