कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा और जिहादी आंदोलनों के चलते दुनिया भर में सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इब्न तैमिया जैसे विचारकों द्वारा प्रतिपादित जिहाद की अवधारणा में पवित्र और अपवित्र का द्वंद्व, शहादत को महिमामंडित करता है, जिससे गैर-इस्लामी सभ्यताएं और संस्कृतियां तेजी से समाप्त हो रही हैं। यह एक वैचारिक और हिंसक संघर्ष का रूप ले चुका है, जो सह-अस्तित्व को चुनौती देता है।”कराची, लाहौर, ढाका, पेशावर जैसे आलीशान शहर छोड़ कर भाग आये। क्योंकि हम पैसा कमाने के तरीके ढूंढते रहे, उन्होंने शहर कब्जाने का तरीका ढूंढ रखा है!
हम भारतवासी जब तक इस्लाम की वास्तविकताओं को नहीं समझ लेते, तब तक हम नहीं समझ सकेंगे कि भारत भूमि पर पाकिस्तान क्यों बना? यदि देशवासी वहाबियों की वास्तविकता से अनभिज्ञ रहे आयेंगे तो वे देश के पुनः विभाजन को आमंत्रित करेंगे। हिन्दुओं को कत्ल करके और उनकी संस्कृति को नष्ट करके, अरबी संस्कृति का विस्तार करना ही इनका उद्देश्य है।
यहां यह समझना जरूरी है – जिहादी आंतकवाद व्यक्ति की जड़ों, उसके स्वतंत्र विचारों, महिलाओं के अधिकारों और बोलने की आजादी, गणराज्य की प्रकृति पर आघात करता है।
साऊदी अरब में यहूदी पूरी तरह समाप्त हो चुके है, ईरान में अपने पैतृक स्थान पर कोई पारसी नहीं बचा है। इसी तरह मुल्तान व अफगानिस्तान में अब हिन्दू नहीं है, लाहौर में सिख नहीं है, जो कभी सिखों का शहर हुआ करता था। कश्मीर में हिन्दुओं का लगभग सफाया हो चुका है, यहीं जिहाद की प्रकृति है, जिससे हम वर्तमान में जूझ रहे हैं। असत्य सनातन हलांकि इस्लामिक पंथ की कट्टरता से स्वयं मुस्लिम भी परिचित हैं और वे दुर्दांत अरबी_कबीलों का पिछलग्गू बनाने वाले मदरसों व उनके मौलवियों की पाबंदियों से ऊब गये हैं। ईरान में तो लोगों ने खुला विद्रोह ही कर दिया है मस्जिदें जला रहे हैं।
भारत में भी बड़ी संख्या में लोग इस्लाम छोड़ रहे हैं लेकिन इस्लामिक जिहाद भी भारत में उसी तेजी से कार्य कर रहा है सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमला उसी का उदहारण है।
https://www.facebook.com/share/r/1FMewfh8Hv/
छत्तीसगढ़ के एक गांव में आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि उनकी 50 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया गया है
बिहार और बंगाल से आए मुस्लिमों ने इनकी खाली पड़ी पैतृक जमीन पर बसेरा डाल दिया और धीरे धीरे इनकी संख्या हर दिन बढ़ने लगी
इन्होंने यहां के कुछ लोगों को लालच देकर अंगूठा भी लगवा लिया है
जब भी आदिवासी इन्हें कब्जा हटाने को कहते है, जान से मारने की धमकी दी जाती है, उनका दावा है कि सरकारी जमीन पर भी इन्होंने कब्जा कर रखा है
आदिवासियों की जमीन संरक्षित होती है ऐसे में बिहार और झारखंड से आए लोगों को ये जमीन कैसे मिली, उसके डॉक्यूमेंट्स इन्हें दिखाने पड़ेंगे
सभी पहलुओं को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए गए है https://www.facebook.com/share/p/1B6ST2fLYb/
टिगरी में हाइड्रोसिल एक्ट के डर से सामान्य और ओबीसी वर्ग के लोगों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। वे अपने घरों को बेचने पर मजबूर हो गए हैं और अपने परिवारों के साथ रहने की कोशिश कर रहे हैं। लोग इसे डर का नाम देते हैं। कोई भी मुझे झूठा फंसाने की कोशिश कर सकता है, जिससे मेरी प्रतिष्ठा खराब हो सकती है। इसलिए, यह आवश्यक है कि कानून का सही तरीके से उपयोग किया जाए ताकि आम लोगों का विश्वास बना रहे। अन्यथा, सम्मानित लोग आपकी असफलताओं को देखकर दूर हो जाएंगे और आप इसे अपनी वीरता की नजर से देखेंगे।
🎬 मजहब और इंसानियत पर सलीम खान की बेबाक राय
मशहूर लेखक सलीम खान ने एक इंटरव्यू में धर्म और कला को लेकर अपनी साफ़ राय रखी। उन्होंने कहा—
“मैंने मस्जिद जाना छोड़ दिया। अगर भजन गाना सच में गुनाह होता, तो ख़ुदा Mohammed Rafi को रोक देता या उनकी आवाज़ ही उनसे छीन लेता।
लेकिन सज़ा मिलने के बजाय उनकी आवाज़ समय के साथ और भी ज़्यादा सराही गई और दुनिया भर के श्रोताओं के बीच और अधिक प्रिय होती चली गई।”
उन्होंने आगे कहा—
“मैं नमाज़ पढ़ता हूँ… जिस दिन मेरा दिल चाहेगा, उस दिन मैं मस्जिद भी चला जाऊँगा। अगर कोई मुझे रोकना चाहता है, तो रोककर देख ले।”
👉 सलीम खान का मानना है कि संगीत और भक्ति किसी एक धर्म की सीमाओं में बंधे नहीं होते। कला इंसान को जोड़ती है, बाँटती नहीं।
एक बात पूरे संसार को स्पष्ट समझनी होगी कि इस्लामिक और नक्शल आतंकवाद का समाधान उनकी आरती उतार कर मिलने से रहा उनके लिए शठेशाट्ठयंम् समाचरेत् की व्यवस्था ही शास्त्रों में बताई गई है
“कभी-कभी युद्ध भी ज़रूरी हो जाता है” — नेतन्याहू ⚠️
इज़राइल के प्रधानमंत्री
बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध को लेकर
अपना निजी अनुभव साझा किया।
उन्होंने कहा —
“मैं युद्ध की कीमत जानता हूँ।
मैंने युद्ध में अपने भाई को खोया है।”
नेतन्याहू के कहा —
मैंनेे आतंकवादियों से लड़ाई की है
और एक सैनिक को
अपनी बाहों में मरते हुए भी देखा है।
यानी युद्ध उनके लिए
सिर्फ रणनीति नहीं,
एक व्यक्तिगत अनुभव भी है।
उन्होंने आगे कहा —
“कभी-कभी युद्ध उन लोगों को रोकने के लिए
ज़रूरी होता है
जो हमें नष्ट करना चाहते हैं।”
और…
“स्वतंत्रता अनमोल है
और इसे बचाना ज़रूरी है।”
यानी नेतन्याहू का संदेश स्पष्ट —
शांति की कीमत समझने वाले भी
कभी-कभी युद्ध को
आखिरी विकल्प मानते हैं।
क्योंकि जब सवाल
अस्तित्व और आज़ादी का हो…
तो दुनिया की राजनीति में
निर्णय भी उतने ही कठोर हो जाते हैं। 🔥
